तरही मिसरा/शेर --------------------------------- है 'ग़ालिब' की ये बज़्म-ए-नज़्म-गोई यहाँ मो'जिज़-बयानी चल रही है //4 है 'ग़ालिब' की/ ये बज़्म-ए-नज़्/म-गोई यहाँ मो'जिज़/-बयानी चल/ रही है //4 मापनी- 1222-1222-122 अरकान- मुफ़ाईलुन-मुफ़ाईलुन-फ़ऊलुन बह्र- बह्र-ए-हज़ज मुसद्दस महजूफ़ क़ाफ़िया की तुक- 'आनी' रदीफ़- 'चल रही है' ग़ज़लغزل: ९९९ ------------------------ 1222-1222-122 मोहब्बत की कहानी चल रही है वही बस सरगिरानी चल रही है //1 गुज़ारा हो रहा है जैसे तैसे ख़ुदा की मेहरबानी चल रही है //2