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Swasti Sansthan
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:56 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Aurat Ka Aashkaar हिलाओं के कपड़ों पर ज्ञान देने से पहले, कभी अपने कपड़ों पर भी नजर डाल लिया करो•••• आजकल डांडिया की ड्रेस को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है, लड़कियों ने बैकलेस ड्रेस क्या पहन ली,कुछ लोगों की जुबान ही गंदी हो गई तरह-तरह की भद्दी टिप्पणियाँ की जा रही हैं• और ऐसा नहीं है कि सिर्फ मर्द ही बोल रहे हैं, औरतें भी पीछे नहीं हैं यहाँ तक कहा जा रहा है कि ऐसी ड्रेस पहनेंगी तो रेप तो होंगे ही सच में रेप पहनावे की बजह से होते हैं क्या तो जरा अपने पहनावे पर भी नजर डाल लो• सड़क किनारे लगे नल पर सिर्फ 4 इंच का कच्छा पहनकर नहाना,बिना शर्ट के इधर-उधर घूमना,ऐसे टाइट लोअर पहनना कि शरीर का हर हिस्सा दिखाई दे रहा हो शॉर्ट्स पहन कर घूमना,शर्ट के बटन खोल कर घूमना अंडरवेयर के नाम पर फ्रेंची पहन कर बाल्कनी में खड़े होना बाॅडी फिटेड कपड़े क्या ये सब बहुत संस्कारी लगता है महिलाओं ने तो कभी तुम्हारे पहनावे को लेकर ऐसी गंदी टिप्पणियाँ नहीं कीं, फिर महिलाओं के लिए अलग नियम और पुरुषों के लिए अलग नियम क्यों••• जो लोग बार-बार पुराने जमाने की औरतों के पहनावे की मिसाल देते हैं, उनसे भी एक सवाल है पुरानी औरतें साड़ी पहनती थीं, सिर पर पल्लू रखती थीं, तो सुनो पुराने मर्द भी धोती-कुर्ता पहनते थे ,कुर्ता पाजामे पहनते थे अंडरवेयर ढीला -ढाला घुटने तक का होता था , वनियान की स्लीव्स कोहनी तक होती थी उनके अंडरआर्म्स भी नहीं दिखते थे उनके पहनावे में भी एक मर्यादा होती थी और आज के मर्द जिम जा रहे बाॅडी बना के नंगे घूम रहे है टाइट फिटिंग कपड़े पहन के घूम रहे है फिर तुलना करनी है, तो दोनों की करो ना• सिर्फ महिलाओं को ही पुराने जमाने की याद क्यों दिलाई जाती है, पुरुषों को क्यों नहीं कहा जाता कि अपने पहनावे और व्यवहार में भी वही मर्यादा रखें क्या संस्कारों की सारी जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की है क्या पर्दा सिर्फ औरतों को करना चाहिए क्या पुरुषों को मर्यादा में रहने की जरूरत नहीं है और सबसे बड़ी बात, किसी लड़की ने बैकलेस ड्रेस पहन ली, तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि अब कोई उसके बारे में कुछ भी बोलने लगेगा••• कपड़े उसकी पसंद हैं, लेकिन तुम्हारी जुबान और तुम्हारी सोच पर तो तुम्हारा अपना नियंत्रण होना चाहिए ना••• रे*प जैसी घिनौनी घटना को किसी महिला के कपड़ों से जोड़ना तो और भी शर्मनाक है, अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले की होती है, पीड़िता के कपड़ों की नही कोई महिला पूरे कपड़े पहने या अपनी पसंद के आधुनिक कपड़े, उसे गलत नजर से देखने या उसके साथ जबरदस्ती करने का अधिकार किसी को नहीं मिल जाता। और औरतों से भी एक बात कहना चाहूँगी, दूसरी औरत के कपड़े देखकर उसे नीचा मत दिखाओ आज तुम किसी और के पहनावे पर सवाल उठा रही हो, कल कोई तुम्हारी पसंद पर सवाल उठाएगा कपड़े छोटे होने से किसी का चरित्र छोटा नहीं हो जाता, और पूरे कपड़े पहन लेने से किसी की सोच बड़ी नहीं हो जाती मैं ये नहीं कहती कि हर किसी को एक जैसे कपड़े पहनने चाहिए हर इंसान की अपनी पसंद है लेकिन किसी के कपड़ों को देखकर उसके चरित्र का फैसला करना और किसी अपराध के लिए उसी को जिम्मेदार ठहरा देना बिल्कुल गलत है संस्कारों की बात करनी है, तो दोनों के लिए करो महिलाओं से मर्यादा की उम्मीद रखते हो, तो पुरुषों से भी रखो क्योंकि संस्कार का मतलब किसी महिला के कपड़ों पर पहरा लगाना नहीं, बल्कि अपनी सोच, अपनी जुबान और अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना है।
8:47 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
10 Principles Of Living Happily ीवन में सफल और खुश रहने के लिए जरूरी हैं ये 10 Life Skills! क्या हम अपने बच्चों को ये सिखा रहे हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि कोई बच्चा पढ़ाई में बहुत अच्छा होने के बावजूद जीवन की छोटी-छोटी समस्याओं से क्यों घबरा जाता है? कोई व्यक्ति बहुत सफल होने के बाद भी रिश्तों में परेशान क्यों रहता है? और कोई व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर सही निर्णय कैसे ले लेता है? इसका एक महत्वपूर्ण उत्तर है—Life Skills यानी जीवन जीने के कौशल। स्कूल हमें गणित, विज्ञान और इतिहास सिखाते हैं, लेकिन जीवन में आगे बढ़ने के लिए स्वयं को समझना, भावनाओं को सँभालना, सही निर्णय लेना और दूसरों के साथ अच्छे संबंध बनाना भी उतना ही जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जीवन को बेहतर ढंग से सँभालने के लिए 10 प्रमुख Life Skills बताए हैं। आइए, इन्हें सरल उदाहरणों से समझें। 🧠 1. आत्म-जागरूकता (Self-Awareness) अपने स्वभाव, खूबियों, कमजोरियों, पसंद-नापसंद और भावनाओं को पहचानना आत्म-जागरूकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपको पता है कि आलोचना सुनकर आपको बहुत गुस्सा आता है, तो आप तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय स्वयं को शांत कर सकते हैं। अभ्यास: रोज पाँच मिनट स्वयं से पूछें—आज मुझे किस बात से खुशी हुई, किस बात से परेशानी हुई और मैंने उससे क्या सीखा? ❤️ 2. सहानुभूति (Empathy) दूसरे व्यक्ति की भावनाओं और परिस्थितियों को समझने की कोशिश करना सहानुभूति है। हर व्यक्ति का जीवन, अनुभव और संघर्ष अलग होता है। जो बात हमें छोटी लगती है, वह किसी दूसरे के लिए बहुत बड़ी हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि बच्चा परीक्षा में असफल हो जाए, तो उसे डाँटने से पहले यह समझने की कोशिश करें कि वह किस परेशानी से गुजर रहा है। याद रखें: हर व्यवहार के पीछे कोई कारण हो सकता है। समझने की कोशिश करना, तुरंत निर्णय सुनाने से बेहतर है। 🔍 3. आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) किसी बात को बिना जाँच किए सच मान लेने के बजाय उसके तथ्यों, कारणों और प्रमाणों को समझना आलोचनात्मक सोच है। आज सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य, शिक्षा, रिश्तों और सफलता को लेकर अनेक दावे किए जाते हैं। हर वायरल संदेश सही नहीं होता। अभ्यास: किसी जानकारी पर विश्वास करने से पहले पूछें—इसका प्रमाण क्या है? क्या कोई दूसरा पक्ष भी है? क्या मैं भावनाओं में आकर निर्णय ले रहा हूँ? 💡 4. रचनात्मक सोच (Creative Thinking) किसी समस्या को नए दृष्टिकोण से देखना और उसके अलग-अलग समाधान खोज पाना रचनात्मक सोच है। यदि बच्चा किसी विषय को एक तरीके से नहीं समझ पा रहा, तो उसे दूसरे तरीके से समझाने का प्रयास करना इसका उदाहरण है। जीवन में हर समस्या का समाधान हमेशा पुराने तरीके से नहीं निकलता। कभी-कभी दृष्टिकोण बदलने से नई संभावनाएँ दिखाई देने लगती हैं। अभ्यास: जब कोई समस्या आए, तो तुरंत हार मानने के बजाय उसके कम-से-कम तीन संभावित समाधान सोचें। ⚖️ 5. निर्णय लेने की क्षमता (Decision-Making) जीवन में हर दिन हमें अनेक निर्णय लेने पड़ते हैं—किसके साथ मित्रता करनी है, समय का उपयोग कैसे करना है, कौन-सा करियर चुनना है और पैसे कहाँ खर्च करने हैं। अच्छा निर्णय वह नहीं जो हमेशा तुरंत सही साबित हो जाए, बल्कि वह है जो उपलब्ध जानकारी, संभावित परिणामों और अपने मूल्यों को ध्यान में रखकर लिया गया हो। अभ्यास: कोई बड़ा निर्णय लेने से पहले अपने विकल्प लिखें, उनके लाभ-हानि समझें और जल्दबाजी से बचें। 🛠️ 6. समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem-Solving) समस्या आने पर घबराने या दूसरों को दोष देने के बजाय उसके कारण को समझना और समाधान की दिशा में कदम उठाना इस कौशल का हिस्सा है। उदाहरण के लिए, यदि पढ़ाई में मन नहीं लग रहा, तो केवल स्वयं को आलसी कहने के बजाय यह देखें कि नींद की कमी, मोबाइल, तनाव या विषय को न समझ पाना तो कारण नहीं है। याद रखें: समस्या को छोटे-छोटे हिस्सों में बाँटने से उसका समाधान आसान हो सकता है। 🗣️ 7. प्रभावी संवाद (Effective Communication) अपनी बात स्पष्ट, सम्मानजनक और सही तरीके से कहना तथा सामने वाले की बात ध्यान से सुनना प्रभावी संवाद है। अनेक पारिवारिक विवाद इसलिए बढ़ते हैं क्योंकि हम समझने से पहले जवाब देने लगते हैं। उदाहरण के लिए, “तुम कभी मेरी बात नहीं समझते” कहने के बजाय कहें, “जब मेरी बात पूरी नहीं सुनी जाती, तो मुझे दुख होता है।” अभ्यास: बात करते समय बीच में न टोकें, अपनी भावनाएँ स्पष्ट शब्दों में व्यक्त करें और असहमति होने पर भी सम्मान बनाए रखें। 🤝 8. स्वस्थ संबंध बनाने की क्षमता (Interpersonal Relationship Skills) परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और समाज के साथ स्वस्थ संबंध बनाना और उन्हें सँभालना भी एक महत्वपूर्ण जीवन-कौशल है। अच्छे संबंधों का अर्थ यह नहीं कि सभी लोग हमेशा हमसे सहमत हों। इसका अर्थ है कि हम विश्वास, सम्मान, सहयोग और उचित सीमाओं के साथ संबंध निभा सकें। अभ्यास: दूसरों के लिए समय निकालें, अपनी गलती स्वीकार करें, जरूरत पड़ने पर माफी माँगें और जहाँ जरूरी हो, विनम्रता से अपनी सीमाएँ स्पष्ट करें। 🌊 9. तनाव से निपटना (Coping with Stress) तनाव जीवन का सामान्य हिस्सा है। परीक्षा, नौकरी, आर्थिक जिम्मेदारियाँ, बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियाँ तनाव पैदा कर सकती हैं। तनाव को पूरी तरह समाप्त करना हमेशा संभव नहीं, लेकिन उससे निपटने के तरीके सीखे जा सकते हैं। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, गहरी साँस लेना, काम की प्राथमिकताएँ तय करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना उपयोगी हो सकता है। अभ्यास: जब तनाव बढ़े, तो कुछ देर रुकें, अपनी साँस पर ध्यान दें और समस्या को एक-एक कदम करके सुलझाने की योजना बनाएँ। 😊 10. भावनाओं से निपटना (Coping with Emotions) गुस्सा, डर, उदासी, ईर्ष्या, निराशा और खुशी—ये सभी मानवीय भावनाएँ हैं। भावनाओं का आना कमजोरी नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि हम उनके प्रभाव में आकर कैसा व्यवहार करते हैं। उदाहरण के लिए, गुस्सा आने पर तुरंत अपशब्द बोल देना और कुछ देर रुककर अपनी बात कहना—इन दोनों के परिणाम अलग हो सकते हैं। अभ्यास: अपनी भावना को पहचानें और उसका नाम दें—“मैं इस समय गुस्से में हूँ” या “मुझे इस बात से डर लग रहा है।” फिर प्रतिक्रिया देने से पहले थोड़ा समय लें। 🌱 इन 10 Life Skills को जीवन का हिस्सा कैसे बनाएँ? इन कौशलों को सीखने के लिए किसी विशेष उम्र या डिग्री की आवश्यकता नहीं है। बच्चे, किशोर और वयस्क सभी इनका अभ्यास कर सकते हैं। * बच्चों के लिए: उन्हें अपनी भावनाएँ व्यक्त करने दें, छोटे निर्णय लेने के अवसर दें और गलतियों से सीखने में मदद करें। * माता-पिता के लिए: केवल अच्छे अंक लाने पर जोर न दें; बच्चों को संवाद, सहानुभूति और समस्याएँ सुलझाना भी सिखाएँ। * युवाओं के लिए: सोशल मीडिया की हर बात पर विश्वास न करें, साथियों के दबाव में निर्णय न लें और जरूरत पड़ने पर मदद माँगें। * वयस्कों के लिए: अपने व्यवहार पर विचार करें, तनाव के संकेत पहचानें और रिश्तों में सुनने व समझने की आदत विकसित करें। याद रखिए, ये कौशल केवल पढ़ने से नहीं आते। इन्हें रोजमर्रा के जीवन में अभ्यास करके बेहतर बनाया जाता है। मेरा संदेश मैं मानता हूँ कि अच्छी शिक्षा केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को जीवन की वास्तविक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करना भी है। अच्छे अंक, धन और पेशेवर सफलता जीवन में महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन स्वयं को समझना, भावनाओं को सँभालना, दूसरों का सम्मान करना और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बच्चों को केवल सफल बनना मत सिखाइए—उन्हें जीवन जीना भी सिखाइए। और याद रखिए, इन कौशलों में कठिनाई होना कोई चरित्र-दोष नहीं है। इन्हें सीखा और विकसित किया जा सकता है। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे माता-पिता, शिक्षकों, युवाओं और अपने मित्रों के साथ साझा कीजिए। हो सकता है, यह किसी के जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बन जाए।
8:43 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
FAHAMI BADAYUNI. प्रसिद्ध उर्दू शायर, दिल को छू लेने वाले अशआर और आधुनिक विषयों से प्रभावित करने के लिए प्रसिद्ध.. परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के वफ़ा करने की नौबत आ गई है ❣️❣️❣️ ख़त लिफ़ाफ़े में ग़ैर का निकला उस का क़ासिद भी बे-वफ़ा निकला ❣️❣️❣️❣️ फ़हमी बदायूनी का परिचय जन्म :04 Jan 1952 | बदायूँ, उत्तर प्रदेश निधन :20 Oct 2024 | बदायूँ, उत्तर प्रदेश फ़हमी साहब ने शायरी में एक ऐसा रंग ईजाद किया है जो उनके हर शेर में मोहर की तरह नज़र आता है। फ़हमी साहब के शेर में आम तौर पर इतने कम अल्फ़ाज़ का इस्तेमाल होता है कि हर लफ़्ज़ की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है। पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा कितना आसान था इलाज मिरा चारा-गर की नज़र बताती है हाल अच्छा नहीं है आज मिरा मैं तो रहता हूँ दश्त में मसरूफ़ क़ैस करता है काम-काज मिरा कोई कासा मदद को भेज अल्लाह मेरे बस में नहीं है ताज मिरा मैं मोहब्बत की बादशाहत हूँ मुझ पे चलता नहीं है राज मिरा 🌹🌹🌹🌹🌹 ज़रा मोहतात होना चाहिए था बग़ैर अश्कों के रोना चाहिए था अब उन को याद कर के रो रहे हैं बिछड़ते वक़्त रोना चाहिए था 🌹🌹🌹🌹 प्रसिद्ध ग़ज़ल: "तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ" तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ। मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ? कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो, मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे, यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ। अदाकारी बहुत दुख दे रही है, मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ।
8:51 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
आफताब मुज़तर एहद ए हाजि़र के शायर साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना साहिल पर खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना! मैं डूब रहा हूं अभी डूबा ___तो नहीं हूं!! ساحل پہ کھڑے ہوں تمہیں کیا غم چلے جانا میں ڈوب رہا ہوں ابھی ڈوبا تو نہیں ہوں ऐ वादा फरामोश मैं तुझसे तो नहीं हूं! हर ज़ुल्म तेरा याद है __भुला तो नहीं हूं!! اے وعدہ فراموش میں تجھ سا تو نہیں ہوں ہر ظلم تیرا یاد ہے__ بھولا تو نہیں ہوں ऐ वक़्त मिटाना मुझे __आसां तो नहीं है! इंसान हूं मैं नक़्श ए कफ़ ए पा तो नहीं हूं !! اے وقت مٹانا مجھے آساں تو نہیں ہے انسان ہوں میں نقش کف پا تو نہیں ہوں चुपचाप सही मसलहतन ___वक़्त के हाथों! मजबूर सही वक़्त से हारा तो नहीं हूं!! چپ چاپ سہی مصلحتا وقت کے ہاتھوں مجبور ںسہی وقت سے__ ہارا تو نہیں ہوں दिल तोड़ा है अपनों ने तो शिकवा ना करेंगे! वह भूल गए मुझको मैं __भूला तो नहीं हूं!! دل توڑا ہے اپنوں نے تو شکوہ نہ کریں گے وہ بھول گئے مجھ کو میں بھولا تو نہیں ہوں मुज़तर मुझे क्यों देखता रहता है ज़माना! दीवाना सही उनका तमाशा तो नहीं हूं!! وہ بھول گئے مجھ کو مضطر مجھے کیوں دیکھتا رہتا ہے زمانہ دیوانہ سہی ان کا تماشہ تو نہیں ہوں
8:51 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
🥀जब खि़ज़ां आए तो पत्ते ना शजर बचता है! 🥀जब खि़जां आए तो पेत्ते ना शजर बचता है! ख़ाली झोली लिए वीरान शजर बचता है!! جب خزاں ائے تو پتے نہ شجر بچتا ہے* خالی جھولی لیے ویران شجر بچتا ہے** 🥀नुक्ता चीं शौक़ से दिन रात मेरे ऐब निकाल! क्योंकि जब है ऐब निकल जाएं हुनर बचता है!! نکتہ چین شوق سے دن رات میرے عیب نکال* کیونکہ جب عیب نکل جائے ہنر بچتا ہے**
8:49 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
आपने भृंगी ऋषि के बारे में सुना होगा। भृंगी ऋषि जो थे वो केवल शिव को पूजना चाहते थे माता पार्वती को नही आपने यह भी पढ़ा होगा जब भृंगी ऋषि शिव की पूजा करने गए तो केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर रहे थे । हमारे ऋषि बताते है जब यह माता पार्वती देखती है कि भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर है तो माता पार्वती भगवान शिव के थोड़ा करीब आकर बैठ जाती है उन दोनों के बीच मात्र थोड़ी सी जगह बचती है फिर जब भृंगी अपने आप आपको एक पतले सांप में बदल लेते है और शिव और पार्वती के बीच जो थोड़ी जगह बची होती है वो उसके बीच केवल शिव की परिक्रमा करने लगते है। जब यह माता पार्वती देखती है माता पार्वती भगवान शिव से मिल जाती है और आधा पुरुष और आधा नारी का रूप बन जाता है। फिर भी भृंगी अपने सरीर को एक सूक्ष्म जीव का आकार लेकर शिव के शरीर के आधे भाग के अंदर से घुसकर परिक्रमा करना चाहते है। तो यहाँ पर माता पार्वती कहती है जब ये मान नही रहा है तो इससे मैं वह सब वापिस ले लेती हूं जो इसके पास मेरी वजह से है और आप कथा में सुने होंगे जैसे माता पार्वती अपना सब कुछ भृंगी ऋषि के शरीर से लेती है भृंगी ऋषि के सरीर में केवल हड्डियों का ढांचा बचता है वो भी कुछ मात्रा में ही बाकी उनके सरीर के सभी मांस रक्त और सब कुछ गायब हो जाता है केवल सरीर का ढांचा ही बचता है। 1980 से 1990 तक वैज्ञानिकों ने यह पता कर लिया था कि शरीर में जीन होते हैं जेनेटिक होते हैं डीएनए होते हैं और एक बच्चे में उसके माँ और बाप दोनों के आधे आधे जीन आते हैं कहीं पे उसके माँ के जीन कहीं पे उसके पिता के जीन लेकिन 1980 में वैज्ञानिकों को एक हैरान कर देने वाली एक अजीब चीज पता चली कि हमारी जो पूरी बॉडी है ये छोटे छोटे सेल्स से बनी हुई है और अपने जीव विज्ञान में पढ़ा होगा कि उस छोटे सेल्स को जो ऊर्जा देता है वो होता है माइटोकॉन्ड्रिया जिसे पावर हाउस भी बोलते है। अब वो जो माइटोकॉन्ड्रिया हमारी बॉडी में होते है उनका जो 100% डीएनए आता है हमेशा वो आता है माँ से यानी फीमेल से। यानी हमारी बॉडी का जो पावर हाउस है जो हमारे सरीर के सेल्स को ऊर्जा देता है उसका डीएनए पिता से आता ही नही वह आता है केवल माता से। ये बेसिक लेवल पर है उसके बाद जो हम भोजन या प्रकृति से ऊर्जा लेते है वो तभी ले पाते है क्योंकि उसके पहले हमारे सरीर का पावरहाउस सेल्स को ऊर्जा देता है फिर वो सेल्स भोजन से ऊर्जा लेने लायक बन पाते है। अगर वो एनर्जी हमारे सरीर के सेल्स को ना मिले तो हमारे सरीर में जो खून मांस सब कुछ है वो सब नष्ट हो जाएगा जैसे इंसान के मरने के बाद केवल इंसान में केवल हड्डियों का ढांचा बच जाता है और सब कुछ गायब हो जाता है हड्डियाँ इसलिए भी बच जाती है क्योंकि वो मात्र ढांचा होता है। इसीलिए हमारे ऋषियों ने माता पार्वती को शक्ति या ऊर्जा बताया है पूरे ब्रह्मांड को और साथ मे सभी स्त्रियों को भी शक्ति या ऊर्जा बताया है इसीलिए आप सनातन धर्म मे तमाम देवियों के शक्तिपीठ भी देखते होंगे। क्योंकि हमारे ऋषियों मुनियों को वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजी से पहले पता था जो सबमें शक्ति है ऊर्जा है वो स्त्रियों से ही आता है इसीलिए स्त्रियां शक्ति का प्रतीक मानी गई है। अगर आपके ही सरीर से आपकी माँ के द्वारा गर्भ में मिला हुआ वो माइटोकॉन्ड्रिया यानी पावर हाउस आपके सरीर से किसी तरह निकाल दिया जाए तो आपके शरीर मे केवल हड्डियों का ढांचा मात्र बचेगा आपके सरीर से आपकी चमड़ी से लेकर मांस खून सब कुछ गायब हो जाएगा। ऋषि भृंगी की कहानी के माध्यम से हमारे ऋषियों ने हमे बहुत ही सूक्ष्म विज्ञान समझाया था। सनातन धर्म मे जो जो लाइन लिखी है वह सब एक रहस्य है यदि वो जिसको काल्पनिक लगती है इसका मतलब अभी उसके दिमाग का उतना विकास नही हो पाया है
8:41 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
सहूलियत नहीं होती क्रांति कविता से न ही दूर होता है कदाचार न ही थमती है निरंकुशता सरकार की न ही कमी आती है किंचित् भी विशेषाधिकारियों के विशेषाधिकार में और आम आदमी की आम दिक़्क़त में. कुछ भी नहीं होता जो चाहती है कविता पाठक बस धन्य करता है पढ़कर कविता को और कवि को भी. कविता का पाठक बस पाठक होता है नहीं उतरता वह किसी दिव्य लोक से हो सकता है वह भी विशेषाधिकारों से लैस निरंकुश सरकार का निरंकुश कारिंदा आम आदमी की दिक़्क़तों का जनक शोषण और लफंगई में मुब्तला भी हो सकता है पाठक. लेकिन कुछ भी होने से पहले ‘दुनियादार’ होता है पाठक कवि से ज़्यादा होशियार होता है पाठक और लग जाता है ‘धंधे’ में तुरंत धन्य करने के बाद कवि और कविता को. पता नहीं, जिस आदमी की लड़ाई लड़ती है कविता पढ़ना मयस्सर भी है उसे कविता उसके लिए तो ज़ंग लगा औज़ार है कविता. उसका कर्ज़ अदा नहीं करती कविता उसकी बेटी की शादी नहीं कराती कविता बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च भी नहीं उठाती कविता बस क्रांति और आम आदमी की बात करती है कविता. कवि लिखता है फिर भी कविता कर लेता है क्रांति वह कविता में ही फिर रहता है मगन सफलता के नशे में क्रांति कर पाने की नहीं, कविता लिख पाने की. ख़ुश होता है लिखकर हर बार एक कविता और भी ख़ुश होता है पाकर सम्मान, पुरस्कार बढ़ जाती है हैसियत उसकी दुनिया में हो जाती है थोड़ी सहूलियत खड़े होने में ‘विशिष्ट’ लोगों की कतार में जिसके लिए दरअसल उसने लिखनी शुरू की थी कविता. ……………..
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