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Swasti Sansthan
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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9:24 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
अनासक्त स्वधर्म पालन क्रमशः श्लोक ११ यज्ञों से तुम करो प्रसन्न देव को देव करेंगे तुमको उन्नत । एक दूसरे को उन्नत कर सबका होगा कल्याण परम ॥११/अध्याय ३ ॥ स्वधर्म और देवताओं की सम्बन्ध श्रंखला : निष्काम भाव से स्वधर्म पालन के रूप में किये कर्म लोक-संग्रह का कारण बनते हैं । इस प्रकार देवताओं के रूप में न केवल प्रकृति के अंश पाँच महत् तत्व अपितु शरीर की सभी इन्द्रियों में भी देवताओं का वास सनातन हिंदू परंपरा को मान्य है और उन्हीं दैवी शक्तियों की उन्नति की बात श्लोक में कही गई है ॥ कर्मक्षेत्रे-रणक्षेत्रे : श्रीकृष्ण गीता से
9:22 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
गीता : ३/१० सहयज्ञाः प्रजाः सृष्ट्वा पुरोवाच प्रजापतिः । अनेन प्रसविष्यध्वमेष वोऽस्त्विष्टकामधुक्॥ तथा कर्म न करने से तू पाप को भी प्राप्त होगा; क्योंकि— प्रजापति ब्रह्मा ने कल्प के आदि में यज्ञसहित प्रजाओं को रचकर उनसे कहा कि तुमलोग इस यज्ञ के द्वारा वृद्धि को प्राप्त होओ और यह यज्ञ तुमलोगों को इच्छित भोग प्रदान करने वाला हो। अनासक्त स्वधर्म पालन का वर्णन (श्लोक १०-१३) सभी प्रजा की रचना के ही साथ यज्ञ को भी भी रचा सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने और कहा इससे तुम करो वृद्धि निज पाओगे तुम इच्छित फल इस यज्ञ से ॥ ॥१०/अध्याय ३ ॥ पुरा उवाच: सृष्टि की रचना के समय ही ब्रह्मा ने यज्ञ की भी रचना की और मनुष्यों से कहा । यज्ञ : श्रीमद्भगवद्गीता में यज्ञ शब्द शास्त्र-विहित सम्पूर्ण विहित क्रियाओं का भी वाचक है । वर्ण , आश्रम , धर्म, जाति,स्वभाव , देश , काल आदि के अनुसार प्राप्त कर्तव्य कर्म , यज्ञों के अंतर्गत आते हैं । श्लोक ९ और १० का ज्ञानेश्वरी का भावार्थ: तुम्हें स्वधर्म को ही ‘नित्य यज्ञ’ समझना चाहिए ।इसीलिए जो व्यक्ति स्वधर्मानुसार कर्मों का आचरण करता है उसके द्वारा उन कर्मों के आचरण ही में अनवरत यज्ञकर्म होते रहते हैं । इसी लिए ऐसे कर्म करने वाले व्यक्तियों को संसार के बंधन बाँध ही नहीं सकते । श्रीकृष्ण गीता से
9:19 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
आपका बच्चा सिर्फ 'सब्जेक्ट' पढ़ रहा है या 'तनाव' झेलना भी सीख रहा है? आज मैं आपसे एक ऐसी बात करने आया हूँ जो शायद आपकी कोचिंग क्लासेस या किताबों में नहीं मिलेगी। आज हमारे जयपुर और पूरे देश में 'प्रतियोगी परीक्षाओं' (IIT, NEET, UPSC) का माहौल एक 'प्रेशर कुकर' जैसा हो गया है। हर घर में एक छात्र है जो दिन-रात एक कर रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतने होनहार बच्चे, इतनी मेहनत के बाद भी ऐन वक्त पर क्यों बिखर जाते हैं? जवाब है— मस्तिष्क का पुराना सॉफ्टवेयर। 🧠 एग्जाम में दिमाग 'फ्रीज' क्यों हो जाता है? (विज्ञान की भाषा में) हमारे मस्तिष्क का एक हिस्सा है जिसे हम 'एमिग्डाला' (Amygdala) कहते हैं। हजारों साल पहले यह हिस्सा हमें जंगल में शेर से बचाने के काम आता था। आज शेर तो नहीं है, लेकिन परीक्षा का डर, 'लोग क्या कहेंगे' का डर और 'फेल होने' का डर हमारे दिमाग के लिए उस 'शेर' जैसा ही है। जब छात्र तनाव में होता है, तो उसका दिमाग 'सर्वाइवल मोड' में चला जाता है। ऐसे में सोचने-समझने वाला हिस्सा (Prefrontal Cortex) काम करना बंद कर देता है। नतीजा? आता हुआ सवाल भी गलत हो जाता है और बच्चा 'ब्लैक आउट' महसूस करता है। इसीलिए, हमने विवेकानंद डीप TMS और मनोवैज्ञानिक सेवा केंद्र में एक अनूठी ट्रेनिंग शुरू की है, जिसका आधार है प्रसिद्ध पुस्तक 'बुद्धास ब्रेन' (Buddha’s Brain)। 🧘♂️ क्या है 'बुद्धास ब्रेन' ट्रेनिंग? (दिमाग को रिवायर करना) हम सिर्फ यह नहीं कहते कि "टेंशन मत लो," हम छात्र के दिमाग को Part by Part (हिस्से दर हिस्सा) प्रशिक्षित करते हैं। हम न्यूरोसाइंस और बुद्ध की प्राचीन शांति को एक साथ लाए हैं। अगले 6 महीनों में हम छात्र के मस्तिष्क को 24 सत्रों (Sessions) में इस तरह तैयार करते हैं: 1. नकारात्मकता को बाहर निकालना (Negative Bias Training) दिमाग बुरी खबरों को जल्दी पकड़ता है। हम छात्रों को सिखाते हैं कि कैसे पढ़ाई की छोटी-छोटी जीत (Small wins) को मस्तिष्क में दर्ज करें ताकि आत्मविश्वास पत्थर जैसा मजबूत हो जाए। 2. फोकस और माइंडफुलनेस (Concentration) आजकल 'डिस्ट्रैक्शन' बहुत है। हम सिखाते हैं कि कैसे वर्तमान क्षण (Present Moment) में रहकर 100% एकाग्रता के साथ पढ़ा जाए, ताकि 10 घंटे की पढ़ाई 4 घंटे में पूरी हो सके। 3. तनाव में भी शांति (The Calm System) हम छात्रों को ऐसी तकनीक सिखाते हैं (जैसे 4-4-8 ब्रीदिंग और पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करना), जिससे परीक्षा हॉल में दिल की धड़कन तेज होने पर भी दिमाग बर्फ जैसा ठंडा रहे। 4. प्रेरणा और 'फ्लो स्टेट' (Peak Performance) ज्यादातर छात्र 'बोझ' मानकर पढ़ते हैं। हम सिखाते हैं कि पढ़ाई को 'आनंद' और 'फ्लो' में कैसे बदलें, ताकि वे बिना थके अपनी सर्वश्रेष्ठ परफॉरमेंस दे सकें। अभिभावकों (Parents) के लिए मेरी एक सलाह प्यारे माता-पिता, आपका बच्चा एक मशीन नहीं है। उसे आपकी उम्मीदों के बोझ से ज्यादा आपके भरोसे की जरूरत है। अक्सर अनजाने में हम बच्चों से कहते हैं, "बेटा, बस ये दो साल मेहनत कर लो, फिर ऐश है।" यह वाक्य बच्चे के मन में एक अदृश्य तनाव पैदा करता है। हमें उन्हें सिर्फ 'मेधावी' (Intelligent) नहीं, बल्कि 'मानसिक रूप से लचीला' (Resilient) बनाना है। अगर उसका मन शांत है, तो वह किसी भी परीक्षा को पार कर लेगा। लेकिन अगर मन अशांत है, तो सारी सुख-सुविधाएं और कोचिंग बेकार हैं। अत्याधुनिक Deep TMS (Transcranial Magnetic Stimulation) तकनीक का उपयोग भी करते हैं। यह एक ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है जो बिना किसी दवा के, मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करती है जो एकाग्रता, मूड और याददाश्त के लिए जिम्मेदार हैं। परीक्षा बिना किसी 'मानसिक घाव' के हर विद्यार्थी जब परीक्षा केंद्र से बाहर निकले, तो उसके चेहरे पर थकान या हार का डर नहीं, बल्कि एक 'बुद्ध' जैसी शांति और विजेता वाली मुस्कान हो। प्रिय छात्रों, याद रखना, "लहरों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उन पर तैरना सीखा जा सकता है।" (You can't stop the waves, but you can learn to surf). यदि आप या आपका बच्चा परीक्षा के तनाव, नींद की कमी, याददाश्त की समस्या या घबराहट से जूझ रहा है, तो 6 महीने के सफर में हम आपके दिमाग को सफलता के लिए 'प्रोग्राम' करें।
9:14 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
1988 में कोलंबिया विश्वविद्यालय में एक लैब बेंच पर िंडा बक अकेले बैठे,आनुवंशिक अनुक्रमों को घूरते हुए जिसने व्यवहार करने से इनकार कर दिया । दशकों से, गंध की मानवीय भावना जीव विज्ञान की महान शर्मिंदगी में से एक थी । वैज्ञानिकों ने दृष्टि को समझा। वे सुन समझ गए। वे समझा सकते हैं कि कैसे आंख प्रकाश को रंग में अलग करती है, कैसे कान संगीत में कंपन का अनुवाद करता है । लेकिन गंध? कोई भी यह नहीं समझा सकता था कि नाक ने मस्तिष्क को खिलने वाले गुलाब और गीले कुत्ते के बीच का अंतर कैसे बताया । प्रमुख सिद्धांत साफ और किफायती था । अधिकांश विशेषज्ञों का मानना था कि नाक में केवल कुछ प्रकार के रिसेप्टर्स होते हैं, और मस्तिष्क ने उन संकेतों को विभिन्न संयोजनों में मिलाया । यह साफ था। कुशल। धन योग्य।और बहुत गलत होने की संभावना है । लिंडा बक को उस मॉडल की पुष्टि करनी थी । यदि वह विफल हो जाती है, तो काम के वर्षों—और भविष्य के वित्त पोषण—वाष्पित हो जाएंगे । अनुदान समितियां मृत सिरों को पुरस्कृत नहीं करती हैं । युवा वैज्ञानिकों को चुपचाप "अनुत्पादक" प्रश्नों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । आम सहमति विज्ञान को स्थिर रखती है । सहकर्मी समीक्षा वृद्धिशील प्रगति का पक्षधर है । आप जो पहले से ज्ञात है उस पर निर्माण करते हैं । आप विशाल छिपे हुए सिस्टम के लिए शिकार नहीं करते हैं जहां एक छोटे से उम्मीद की जाती है । यह नियम तब तक काम करता है—जब तक कि कोई तर्क में दरार न देख ले । उस रात देर से, लिंडा ने इसे महसूस किया: एक कैरियर का ठंडा डर कहीं नहीं जा रहा है । कैफीन और थकावट से उसके हाथ थोड़े कांप गए । महीनों के काम ने कुछ भी नहीं बनाया था जो स्वीकृत मॉडल के अनुकूल हो । इसलिए उसने पेशेवर रूप से कुछ खतरनाक किया । उसने एक छोटे से जवाब की तलाश बंद कर दी । वह एक परिवार की तलाश करने लगी । मुट्ठी भर गंध जीन की खोज करने के बजाय, उसने एक पूरे नेटवर्क की खोज की—छोटे बदलावों के साथ सैकड़ों संबंधित आनुवंशिक ब्लूप्रिंट । यह थकाऊ काम था । प्लास्टिक ट्रे धोने के दिन । डीएनए के अंतहीन तार पढ़ने की रातें। कोई सफलता नहीं । बस धैर्य! वह चूहों के साथ शुरू हुआ । जीव विज्ञान सिखाता है कि प्रकृति कुशल है । जब दस करेंगे तो यह एक हजार उपकरण नहीं बनाता है । लिंडा को जो कुछ भी सिखाया गया था, उसने कहा कि यह खोज विफल हो जाएगी । लेकिन फिर उसे एक जीन मिला। फिर दूसरा। फिर दस। फिर पचास। वह सूर्योदय के माध्यम से प्रयोगशाला में रही, ट्रैकिंग पैटर्न जो मौजूद नहीं होना चाहिए । संख्या चढ़ाई रखा.उसने जो खुलासा किया वह आश्चर्यजनक था: नाक कुछ सेंसर का उपयोग नहीं करता है । यह एक सेना का उपयोग करता है । लगभग एक हजार अलग जीन - एक अलग गंध रिसेप्टर के लिए प्रत्येक कोडिंग । पूरे शरीर में सबसे बड़ा जीन परिवार, एक ही अर्थ के लिए समर्पित । प्रत्येक न्यूरॉन सिर्फ एक रिसेप्टर व्यक्त करता है । मस्तिष्क संकेतों के विशाल संयोजनों से अर्थ को इकट्ठा करता है । गंध सरल नहीं थी । यह मनुष्यों के पास सबसे जटिल संवेदी प्रणालियों में से एक था । 1991 में, लिंडा बक और उनके सहयोगी रिचर्ड एक्सल ने प्रकृति में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए । मैदान शांत हो गया । पुराना साफ सिद्धांत रातोंरात ढह गया । उन्होंने मानव चेहरे में एम्बेडेड एक छिपे हुए नक्शे का खुलासा किया था—एक सुरुचिपूर्ण प्रणाली जिसे किसी ने कल्पना करने की हिम्मत नहीं की थी । 2004 में, उनकी खोज को फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था । नोबेल समिति ने न केवल एक तकनीकी सफलता, बल्कि एक दार्शनिक को मान्यता दी: मानव धारणा सादगी की तुलना में काफी समृद्ध है । लिंडा बक सर्वसम्मति का पालन करके सफल नहीं हुई । वह यह देखकर सफल हुई कि सर्वसम्मति ने समझ बनाना बंद कर दिया—और वैसे भी देखने का साहस रखने के लिए । विज्ञान न केवल उत्तरों के माध्यम से आगे बढ़ता है, बल्कि एक प्रश्न पूछने की इच्छा के माध्यम से हर कोई सोचता है कि पहले से ही तय है । पानी का वह ठंडा गिलास बेंच पर अछूता बैठ गया । और गंध की मानवीय भावना को आखिरकार समझा गया । और अगर गंध शेष न रहे या कम भी होती लगे तो न्यूरो जेनरेटिव डिक्लाइन के लक्षण हैं। अल्झाइमर्स / पार्किसन्स की संभावनाएं प्रबल हैं ।
9:10 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
नई अल्जाइमर की सफलता: एक प्रोटीन को अवरुद्ध करना मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रणाली को रिचार्ज करके चूहों में स्मृति को पुनर्स्थापित करता है । कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने वाले प्रोटीन को लक्षित करके अल्जाइमर के इलाज के लिए एक आशाजनक नई रणनीति का खुलासा किया है । वर्षों से, मुख्य रूप से अमाइलॉइड-बीटा सजीले टुकड़े को हटाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है, लेकिन यह नया दृष्टिकोण यह बताता है कि मस्तिष्क पहले स्थान पर खुद को साफ करना क्यों बंद कर देता है । पीटीपी 1 बी नामक एंजाइम को रोककर, वैज्ञानिकों ने पाया कि वे माइक्रोग्लिया नामक थका हुआ प्रतिरक्षा कोशिकाओं को पुनर्जीवित कर सकते हैं । ये कोशिकाएं मस्तिष्क के आंतरिक रखरखाव दल के रूप में कार्य करती हैं, और जब पीटीपी 1 बी अवरुद्ध हो जाता है, तो वे संज्ञानात्मक गिरावट से जुड़े विषाक्त समूहों को प्रभावी ढंग से निगलने और साफ़ करने की अपनी क्षमता हासिल करते हैं । माउस मॉडल में किए गए अध्ययन ने प्रदर्शित किया कि इस प्रोटीन को अक्षम करने से न केवल पट्टिका बिल्डअप कम हो गया, बल्कि सीखने और स्मृति में भी महत्वपूर्ण सुधार हुआ । यह खोज विशेष रूप से प्रभावशाली है क्योंकि पीटीपी 1 बी पहले से ही मोटापे और टाइप 2 मधुमेह में एक ज्ञात कारक है, जो चयापचय स्वास्थ्य और न्यूरोडीजेनेरेशन के बीच जैविक लिंक को मजबूत करता है । जबकि वर्तमान उपचार मामूली नैदानिक लाभ प्रदान करते हैं, शोधकर्ताओं का मानना है कि मौजूदा उपचारों के साथ इन नए अवरोधकों को जोड़ना बीमारी को धीमा करने का एक अधिक व्यापक तरीका प्रदान कर सकता है । यह बहु-आयामी दृष्टिकोण अल्जाइमर के दीर्घकालिक प्रभाव का सामना करने वाले लाखों परिवारों के लिए जीवन की गुणवत्ता को संरक्षित करने के लिए नई आशा प्रदान करता है । स्रोत: सेन, वाई।, अल्वेस, एसआर, सॉन्ग, डी।, फेलिस, सी।, प्रील, जेबी, वैन एलस्ट, एल।, और टोंक्स, एनके (2026) । पीटीपी 1 बी अवरोध एसवाईके सिग्नलिंग को बढ़ाकर अल्जाइमर रोग मॉडल में माइक्रोग्लियल फागोसाइटोसिस को बढ़ावा देता है । राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही।
9:06 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
मात्रा गिराने की छूट एवं दिशा निर्देश मात्रा गिराने की छूट को किसी दिशा निर्देश के तहत परिभाषित और सीमांकित करना ज़रूरी था अन्यथा इसको लेकर भी अराजकता फैल जाती। इसलिए इसे छूट के दिशा निर्देश कहा गया है जो एक लिहाज से उचित भी है। ख़ैर, छूट चाहे जो भी हो, बेहतर यही है कि जहाँ तक संभव हो, मात्रा न गिराई जाए, हालांकि बहुधा ये हो नहीं पाता। आइए अब हम छूट के कुछ तय दिशा निर्देशों की बात करते हैं। मेरा यह मानना है कि मात्रा गिराने की छूट के दिशा निर्देशों को लोगों ने बहुत जटिल बना कर पेश किया है, जबकि यथार्थ में यह बहुत सरल है। मेरे ख़्याल से #इसे_सिर्फ़_एक_वाक्य_में_बतलाया_जा_सकता_है_कि मात्रा गिराने की छूट के दिशा निर्देश के तहत आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, और, अं स्वरों में से सिर्फ़आ_ई_ऊ_ए_और_ओ_स्वरों तथा इनके सहयोग से बने और शब्द_के अंत में आए व्यंजनों के भार को दो मात्रिक से गिराकर एक मात्रिक किया जा सकता है। इसका अर्थ हुआ कि शब्द के अंत में आए आ (2) को गिराकर अ (1) ई (2) को गिराकर इ (1) ऊ (2) को गिराकर उ (1) ए (2) और ओ (2) को गिराकर (कोई अन्य ध्वनि नहीं बस मात्रा गिराकर) (1) किया जा सकता है। व्यंजन का उदाहरण लें तो, दर्या (22) को गिराकर दर्य (21) पानी (22) को गिराकर पानि (21) बाजू (22) को गिराकर बाजु (21) जैसे (22) को गिराकर जैसे (21) एवं मुझको (22) को गिराकर मुझको (21) किया जा सकता है। बाक़ी तीन स्वरों ऐ_औ_और_अं एवं #इनके_संयोग_से_बने_व्यजनों को शब्द के अंत में होने की स्थिति में भी #नहीं_गिराया_जा_सकता_है। इसका अर्थ हुआ कि ऐ(2) को गिराकर (1) औ (2) को गिराकर (1), एवं अं (2) को गिरकर (1) नहीं_किया_जा_सकता_है। व्यंजन का उदाहरण लें तो लै, मै, इत्यादि (2) को गिराकर (1) सौ, नौ, रौ, जौ, ज़ौ, पौ (2) को गिराकर (1), एवं दोनों (22), वीराँ(22), अरमाँ (22), दास्ताँ (212) को क्रमशः गिराकर (21), (21), (21), एवं (211) #ननहीं_किया_जा_सकता_है। ये तो दिशा निर्देश की बात हो गई कि (१) कुछ दीर्घ स्वरों एवं उनके योग से बने व्यंजनों की मात्रा को गिराया जा सकता है, एवं (२) मात्राओं को शब्द के प्रारंभ या मध्य में नहीं बल्कि सिर्फ़ शब्द के अंत में गिराया जा सकता है। मगर महत्वपूर्ण बात ये है कि इन दिशा निर्देशों के अपवाद भी पहले से निर्दिष्ट हैं। यानी निषिद्ध स्वरों एवं उनके योग से बने व्यंजनों को भी गिराया जा सकता है एवं शब्द के प्रारम्भ एवं मध्य में भी गिराया जा सकता है, जिनके गिने चुने अपवाद पहले से ही चिन्हित हैं जो नीचे दिए गए हैं- अपवाद 1. कोई- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 2. मेरा/मेरी/तेरा/तेरी- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 3. मैं/में- २ से गिरा कर केवल १ हो सकता है 4. यूँही- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 5. जिन्हें/उन्हें/किन्हीं/उन्हीं/नहीं- १२ से गिराकर ११ कर सकते हैं पर २ कभी नहीं 6. कहाँ/वहाँ/जहाँ/यहाँ- १२ से गिराकर ११ कर सकते हैं पर २ कभी नहीं 7. लगाएँगे/बनाएँगे/पिलाएँगे/सुलाएँगे/खाएँगे/रोएँगे इत्यादि में बीच में आने वाली एँ की मात्रा को गिराकर २ से १ किया जा सकता है। अपवाद की यह सूची और लंबी हो सकती है, पाठकगण/विशेषज्ञ इसे मंच के संज्ञान में ला सकते हैं।
9:03 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
ग़ज़लغزل: डर है वो मुझसे प्यार मांगेगा और वो भी उधार मांगेगा //1 मुझसे बोसा तो लेके देख कभी शर्त है बार-बार मांगेगा //2 ज़ोहद की एक ही मुसीबत है नफ़्स पे इख़्तियार मांगेगा //3 उसको ही बेक़रार रहना है वो जो हरदम क़रार मांगेगा //4 कौन पड़ता है तेरे पीछे तू सब्र और इंतिज़ार मांगेगा //5 मुझको मय की तलब नहीं कुछ भी पर है तू बेक़रार, मांगेगा //6 'राज़' वो तब'अ से है साहूकार एक देकर हज़ार मांगेगा //7 बोसा- चुम्बन, किस ज़ोहद- संयम का पालन, धर्म परायणता, सांसारिक सुखों का त्याग, पारसाई, विरक्ति, परहेज़गारी नफ़्स पे इख़्तियार- विषय वासना पर नियंत्रण बेक़रार- बेचैन क़रार-चैन, सुकून, शांति तब'अ- स्वाभाव, मिज़ाज
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