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5 तरीके नये नये एक ।कलर डाप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट (Ultrasound Test)

5 तरीके नये नये एक ।कलर डाप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट(Ultrasound Test) -आजकल जितने भी रेडियोलॉजिकल टेस्ट हैं उनमे अल्ट्रासाउंड टेस्ट सबसे कॉमन टेस्ट में से एक है अल्ट्रासाउंड examination एक बहुत ही common test है और शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने इस टेस्ट का नाम ना सुना हो जब भी पेट में दर्द हो, लिवर या गॉलब्लेडर की परेशानी हो, या घर में नए मेहमान के आने की confirmation करनी हो तो डॉक्टर की सलाह होती है कि-“ए 5 तरीके नये नये एक ।कलर डाप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट(Ultrasound Test) -आजकल जितने भी रेडियोलॉजिकल टेस्ट हैं उनमे अल्ट्रासाउंड टेस्ट सबसे कॉमन टेस्ट में से एक है अल्ट्रासाउंड examination एक बहुत ही common test है और शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने इस टेस्ट का नाम ना सुना हो जब भी पेट में दर्द हो, लिवर या गॉलब्लेडर की परेशानी हो, या घर में नए मेहमान के आने की confirmation करनी हो तो डॉक्टर की सलाह होती है कि-“एक अल्ट्रासाउंड करवा लीजिए।" आखिर यह Ultrasound क्या चीज़ है? क्या इसमें कोई सुई लगती है या कोई खतरनाक किरणें निकलती हैं? आइए इसे बिल्कुल सीधी भाषा में समझते हैं। मान लीजिए आप एक गहरे कुएं के पास खड़े हैं और नीचे चिल्लाते हैं—आपकी आवाज टकराकर वापस आती है, जिसे हम echo यानी गूंज कहते हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन ठीक इसी सिद्धांत पर काम करती है। इसमें कोई हानिकारक X-ray रेडिएशन नहीं होता। इसमें एक छोटी सी डिवाइस होती है जिसे Probe कहते हैं। डॉक्टर त्वचा पर एक ठंडा सा Gel लगाते हैं और इस probe को ऊपर घुमाते हैं। यह मशीन इंसान के कान से न सुनी जा सकने वाली High-frequency Sound Waves (ध्वनि तरंगें) शरीर के अंदर भेजती है। ये तरंगें अंदरूनी अंगों से टकराकर जब वापस आती हैं, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर आपके अंगों की एक साफ-सुथरी तस्वीर (Live Image) बना देती हैं। डॉक्टर इसे कब कराने की सलाह देते हैं? शरीर के अंदर किसी भी तरह की हलचल या दिक्कत को पकड़ने के लिए यह सबसे भरोसेमंद और शुरुआती साधन है: * Pregnancy (गर्भावस्था): पेट में पल रहे बच्चे की धड़कन देखने, उसकी ग्रोथ जांचने और सही पोजीशन का पता लगाने के लिए। आजकल तो ये टेस्ट इतना एडवांस हो गया है कि जब बच्चा माँ के पेट में रहता है यानी गर्भ में रहता है और अगर उस बच्चे के पेट के अंदर अगर कोई प्रॉब्लम है तो ये उसको भी दिखा देता है * Abdominal (पेट की समस्याएं): गॉलब्लेडर में पथरी (Gallstones), किडनी स्टोन (Kidney stones), या लिवर में फैट (Fatty liver) Appendicitis, पेशाब की थैली, Spleen देखने के लिए * Musculoskeletal System (जोड़ों और मांसपेशियों की जांच): मांसपेशियों का फटना, लिगामेंट में सूजन, या जोड़ों के आसपास पानी भर जाने पर। * Blood Vessels (नसें): अगर पैरों की नसों में थक्का हो जाना।

Personality Disorder

व्यक्तित्व (Personality) और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) को आसान भाषा में समझें डॉ. अनिल तांबी (वरिष्ठ मनोचिकित्सक) हमारे दैनिक जीवन में हम अक्सर सुनते हैं— "अरे, उस व्यक्ति की पर्सनैलिटी कितनी अच्छी है!" या "वह बहुत चिड़चिड़े स्वभाव का है।" लेकिन एक मनोचिकित्सक के रूप में, जब मैं 'पर्सनैलिटी' की बात करता हूँ, तो इसका मतलब केवल बाहरी दिखावा या बातचीत का तरीका नहीं होता। आज हम बहुत ही सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे कि 'व्यक्तित्व' (Personality) क्या है, 'पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' (Personality Disorder) क्या होता है, और हम खुद को व अपने आसपास के लोगों को कैसे बेहतर समझ सकते हैं। 1. व्यक्तित्व (Personality) क्या है? व्यक्तित्व हमारी "मनोवैज्ञानिक त्वचा" (Psychological Skin) की तरह है। जिस तरह हमारी शारीरिक त्वचा हमारे आंतरिक अंगों की रक्षा करती है और हमें बाहरी दुनिया से जोड़ती है, ठीक उसी तरह हमारी पर्सनैलिटी हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार का वह संयोजन है जो हमें दूसरों से अलग बनाता है। सरल शब्दों में, पर्सनैलिटी में तीन मुख्य बातें शामिल होती हैं: 1. हम कैसे सोचते हैं (हमारे विचार और खुद व दूसरों के प्रति धारणाएं) 2. हम कैसे महसूस करते हैं (हमारी भावनाएं और मूड) 3. हम कैसा व्यवहार करते हैं (तनाव और परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रिया) उदाहरण: जब दो लोग सड़क पर अचानक लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम में फंसते हैं: व्यक्ति A (लचीला व्यक्तित्व): सोचता है— "अब फंस ही गए हैं तो थोड़ा संगीत सुन लेते हैं या किसी मित्र से बात कर लेते हैं।"व्यक्ति B (अत्यधिक तनावग्रस्त व्यक्तित्व): स्टीयरिंग व्हील पर हाथ मारता है, दूसरों पर चिल्लाता है और पूरे दिन का मूड खराब कर लेता है। 2. पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) क्या है? हर व्यक्ति में कुछ कमियां या अनोखे स्वभाव होते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने का तरीका अत्यधिक कठोर (Rigid), अस्वास्थ्यकर और असामान्य हो जाए, तो इसे पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहा जाता है। जब व्यक्ति का स्वभाव ऐसा हो जाए कि: वह बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल न पाए (Inflexible)। उसके रिश्तों में लगातार कड़वाहट और उथल-पुथल बनी रहे। वह अपने काम, पढ़ाई या सामाजिक जीवन में सामान्य रूप से कार्य न कर पाए। उसे खुद यह अहसास न हो कि समस्या उसके अपने व्यवहार में है, बल्कि वह हमेशा दूसरों को दोष दे। 3. आम जीवन के उदाहरणों से समझें पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के प्रकार आम भाषा में समझने के लिए इन्हें तीन मुख्य श्रेणियों (Clusters) में देखा जा सकता है: क) अत्यधिक शक्की या अलग-थलग रहने वाला स्वभाव (Odd/Eccentric Pattern) पैरानॉयड पर्सनैलिटी (Paranoid): ऐसे व्यक्ति को बिना किसी ठोस वजह के हमेशा लगता है कि लोग उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं या उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उदाहरण: एक सहकर्मी जो यह सोचकर परेशान रहता है कि चाय के ब्रेक में सहकर्मी उसी का मज़ाक उड़ा रहे थे, भले ही वे सामान्य बात कर रहे हों। ख) अत्यधिक भावनात्मक, ड्रामेटिक या आवेगपूर्ण स्वभाव (Dramatic/Emotional Pattern) बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी (Borderline Personality Disorder - BPD): इसमें व्यक्ति के मूड, आत्म-सम्मान और रिश्तों में तीव्र उथल-पुथल होती है। इन्हें अकेलेपन से बहुत डर लगता है। रिश्तों में ये या तो किसी को भगवान मान लेते हैं या तुरंत उसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन। उदाहरण: छोटी-सी बात या देर से जवाब मिलने पर यह महसूस करना कि सामने वाला उन्हें छोड़ रहा है, अत्यधिक गुस्सा करना या खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी देना। नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी (Narcissistic): इसमें व्यक्ति स्वयं को दूसरों से बहुत श्रेष्ठ समझता है, लगातार प्रशंसा की मांग करता है और दूसरों की भावनाओं के प्रति सहानुभूति (Empathy) की कमी रखता है। ग) अत्यधिक डर, चिंता या पूर्णता (Perfectionism) का स्वभाव (Anxious/Fearful Pattern) ऑब्सेसिव-कंपल्सिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (OCPD): ऐसे लोग नियमों, व्यवस्था और पूर्णता (Perfection) को लेकर इतने कठोर होते हैं कि वे काम पूरा ही नहीं कर पाते और दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। (ध्यान दें: यह OCD बीमारी से अलग स्वभावगत कठोरता है)। डिपेंडेंट पर्सनैलिटी (Dependent): ऐसे व्यक्ति छोटे-छोटे फैसलों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं और अकेले रहने के डर से अनुचित बातें भी मान लेते हैं। 4. खुद को और दूसरों को समझने के लिए व्यावहारिक सुझाव 1. स्व-जागरूकता (Self-Awareness) विकसित करें: जब भी किसी स्थिति में तनाव बढ़े, तो रुककर सोचें: "क्या मेरी प्रतिक्रिया स्थिति के हिसाब से सही है, या यह मेरा पुराना व्यवहारिक ढर्रा है?" अपनी भावनाओं को पहचानना और उन पर विचार करना (Mentalizing) मानसिक स्थिरता की पहली सीढ़ी है। 2. दूसरों के प्रति दृष्टिकोण बदलें: यदि कोई व्यक्ति बार-बार अपने रिश्तों में उलझ रहा है या अत्यधिक प्रतिक्रिया दे रहा है, तो केवल यह कहकर उसे खारिज न करें कि वह "बुरा" या "ड्रामा करने वाला" है। कई बार यह उनके व्यक्तित्व की किसी गहरी असंतुलित ग्रंथि (Personality vulnerability) का परिणाम होता है। 3. काम और प्रेम (Love & Work) में संतुलन: एक स्वस्थ व्यक्तित्व वह है जो सार्थक संबंध (Love) बना सके और अपने जीवन में उत्पादक कार्य (Work) कर सके। यदि आपका स्वभाव इन दोनों चीजों में बाधा डाल रहा है, तो मदद मांगने में संकोच न करें। निष्कर्ष और संदेश पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कोई 'चरित्र की कमी' या 'पाप' नहीं है। यह आनुवंशिक (Genetics) और बचपन के माहौल/अनुभवों के मेल से विकसित होने वाली एक मानसिक स्थिति है। अच्छी बात यह है कि सही साइकोथेरेपी (Psychotherapy), काउंसिलिंग और आत्म-जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवहारिक ढर्रे को बदल सकता है और एक संतुलित व खुशहाल जीवन जी सकता है। यदि आप या आपका कोई प्रियजन लगातार भावनात्मक या सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो किसी विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

ग़ज़ल(Ghazal goi)

ग़ज़ल की साधना कृपया ध्यान दें इस बार आपका टास्क थोड़ा अलग है. इस बार अपने टास्क को तीन भागों में पूरा करेंगे. 1. सबसे पहले दी गई ज़मीन में ग़ज़ल लिखने के लिए आप अपने क़ाफ़िया शब्दों का चुनाव करेंगे और उसे ग्रुप में मुझे भेजेंगे, 2. उसके बाद आप 6-7 सानी मिसरे लिखकर भेजेंगे, 3. और फिर अंत में, सभी सानी मिसरों के ऊला मिसरों को लिखकर अपनी ग़ज़ल मुकम्मल करेंगे और भेजेंगे. ऐसा शब्दों के सही चुनाव एवं उचित वाक्य विन्यास को ध्यान में रखकर किसी भी शेर को कहने की आदत को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है; साथ में इस बात के महत्व को समझने के लिए भी कि किसी भी शेर में दो मिसरों के बीच के रब्त का अत्यधिक महत्त्व है, जिसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है. अभ्यास के लिए तरही मिसरा/ शेर अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 ी तक़ती'अ- अपना जो कुछ/था मेरा ज़ीस्त में,सारा/तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा/हुआ तारा/तुम हो //1 मापनी- 2122-1122-1122-22 रकान- फ़ाइलातुन-फ़इलातुन-फ़इलातुन-फ़ेलुन बह्र- बह्र-ए-रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ क़ाफ़िया की तुक-'आरा' रदीफ़-'तुम हो' ग़ज़लغزل: 2122-1122-1122-22 दोस्तो, ये ग़ज़ल अब तक मेरी क्रमांकित ग़ज़लों में नहीं शामिल थी. आज मुझे इसी बह्र में का नया अभ्यास क्रमांक 67 देना था. जब अपने आर्काइव में ढूंढा तो मुझे राज़ की रोज़ाबेल कैथरीन के लिए लिखे दो अशआर लिखे मिले.आनन फानन में मैंने 5 और अशआर लिखकर यह ग़ज़ल पूरी कर दी. सोचा आप लोगों को पेश भी कर दूं . अर्ज़ किया है - अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 सालों से ढूंढ रहा हूं जिसे मिलता ही नहीं जबकि बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा तुम हो //2 मेरी हस्ती का कोई और नहीं सय्यारा मेरे चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा तुम हो //3 छोड़कर जाओ न इस हाल में तन्हा हमको बूढ़े मां-बाप के जीवन का सहारा तुम हो //4 किसलिए जाऊं मैं दिखलाने शिफ़ागर के पास मेरे हर ग़म का मुदावा मेरे यारा तुम हो //5 आग ने यूँ नहीं लिक्खी है कहानी मेरी मेरी हस्ती के तसव्वुर का शरारा तुम हो //6 तुम हरी सब्ज़ी नहीं हूं जिसे खाऊं हर रोज़ मेरे बाग़-ए-वफ़ा का आलू-बुख़ारा तुम हो //7 'राज़'वो भी नहीं मिलता जो कभी कहता था मेरे हर दुख,मेरे हर दर्द का चारा तुम हो //8 ग़ज़ल के कठिन शब्द एवं शब्दार्थ 1. ज़ीस्त — जीवन, ज़िंदगी 2. तक़दीर — भाग्य, नियति 3. बह्र — समुद्र, सागर 4. बह्र-ए-वफ़ा — वफ़ा का सागर / निष्ठा का समुद्र 5. हस्ती — अस्तित्व, वजूद 6. सय्यारा — ग्रह, आकाश में भ्रमण करने वाला खगोलीय पिंड 7. चर्ख़ — आकाश, आसमान; चक्र 8. चर्ख़-ए-वफ़ा — वफ़ा का आकाश / प्रेम एवं निष्ठा का संसार 9. तन्हा — अकेला, अकेले 10. शिफ़ागर — घाव भरने वाला, उपचारक, चिकित्सक 11. ग़म — दुःख, शोक 12. मुदावा — उपचार, इलाज, निवारण 13. यारा — प्रिय मित्र, प्यारा साथी, प्रेमी 14. तसव्वुर — कल्पना, विचार, चिंतन 15. शरारा — चिंगारी 16. बाग़ — बागीचा, उपवन 17. आलू-बुख़ारा — एक प्रकार का फल; अंग्रेज़ी में Plum कहा जाता है 18. चारा — उपाय, इलाज, समाधान 19. राज़ — रहस्य, भेद; यहाँ शायर का तख़ल्लुस भी है 🌹 संयुक्त पदों के भावार्थ 🔹 बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा — वफ़ा रूपी विशाल सागर के दोनों किनारे अर्थात वफ़ा की पूर्णता एवं उसका समग्र विस्तार। 🔹 मेरी हस्ती का सय्यारा — मेरे अस्तित्व के आकाश का ग्रह अथवा मेरे जीवन-जगत का महत्वपूर्ण केंद्र। 🔹 चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा — प्रेम एवं निष्ठा के आकाश को प्रकाशित करने वाला प्रिय व्यक्ति। 🔹 हस्ती के तसव्वुर का शरारा — मेरे अस्तित्व की कल्पना अथवा चेतना को जन्म देने वाली चिंगारी। 🔹 हर ग़म का मुदावा — प्रत्येक दुःख का उपचार अथवा निवारण। 🔹बाग़-ए-वफ़ा का आलू बुख़ारा तुम हो — वफ़ा अथवा प्रेम और निष्ठा के बगीचा का खट्टा मीठा फल आलू बुख़ारा तुम हो ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ इसी बह्र पर लिखे गये कुछ फ़िल्मी गीत/ग़ज़ल ***************************** रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है पकी मद भरी आँखों को कँवल कहते हैं दिल की आवाज भी सुन मेरे फ़साने पे न जा वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी कोई फरियाद तेरे दिल में छुपी हो जैसे ध्यान देने योग्य बातें- ----------------------- 1. सबसे ऊपर बह्र का नाम लिखें 2. उसके नीचे अरकान के नाम लिखें 3. उसके नीचे मापनी लिखें 4. फिर रदीफ़ और क़ाफ़िया लिखें 5. मतला एवं मक़ता समेत कुल 6 अशआर लिखें 6. अपने प्रत्येक शेर का क्रमांक //1, //2, //3... इस फॉर्मेट में लिखें 7. ग़ज़ल के नीचे अपना नाम लिखें 8. और अंत में, कठिन शब्दों के अर्थ लिखें 9. अंत में अपनी ग़ज़ल की तक़ती'अ करें 10. ख़्याल रहे कि विचार आपके अपने हों, किसी और के नहीं

उसको भी हमसे मोहब्बत, हो जरूरी तो नहीं !(Ghazal)

(no subject) Usko Bhi humse Mohabbat Ho zaroori to Nahin_Saba Akabaraabadi__ उसको भी हमसे मोहब्बत, हो जरूरी तो नहीं ! इश्क़ ही इश्क़ की की़मत हो जरूरी तो नहीं!! اس کو بھی ہم سے محبت ہو ضروری تو نہیں* عشق ہی عشق کی قیمت ہو ضروری تو نہیں** एक दिन आपकी बरहम निगाही देख चुके हैं! रोज एक ताजा़ क़यामत हो ज़रूरी तो नहीं!! ایک دن آپ کی برہم نگہی دیکھ چکے ہیں* روز ایک تازہ قیامت ہو ضروری تو نہیں** मेरी शमओं को हवाओं ने बुझाया होगा ! यह भी उनकी ही शरारत हो ज़रूरी तो नहीं!! میری شمعوں کو ہواؤں نے بجھایا ہوگا* یہ بھی ان کی ہی شرارت ہو ضروری تو نہیں** दोस्ती आपसे लाजि़म है मगर इसके लिए! सारी दुनिया से अदावत हो ज़रूरी तो नहीं!! دوستی آپ سے لازم ہے مگر اس کے لیے* ساری دنیا سے عداوت ہو ضروری تو نہیں** पुरसिश ए हाल को तुम आओगे उस वक्त मुझे! लब हिलाने की भी ताक़त हो ज़रूरी तो नहीं!! پرسش حال کو تم آؤ گے اس وقت مجھے* لب ہلانے کی بھی طاقت ہو ضروری تو نہیں** सैकड़ो दर हैं ज़माने में गदाई के लिए! आप ही का दर ए दौलत हो ज़रूरी तोनहीं!! سینکڑوں در ہیں زمانے میں گدائی کے لیے* آپ ہی کا در دولت ہو ضروری تو نہیں** बाहमी रब्त में रंजिश भी मज़ा देती है! बस मोहब्बत ही मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं!! باہمی ربط میں رنجش بھی مزہ دیتی ہے* بس محبت ہی محبت ہو ضروری تو نہیں** **** बरहम निगाही__ग़ुस्से भरी नज़रें गदाई_मांगना बाहमी रब्त _आपसी मेल-जोल

Authenticity/Personality

Authenticity/Personality जीवन का सबसे बड़ा तनाव: 'वह बनने की कोशिश करना, जो आप वास्तव में नहीं हैं' नमस्कार साथियों, मनोचिकित्सा के अपने वर्षों के अनुभव में मैंने देखा है कि आज अधिकांश लोग तनाव, चिंता, अवसाद या किसी न किसी लत (Addiction) से जूझ रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस मानसिक और शारीरिक पीड़ा की असली जड़ कहाँ है? प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. गैबोर माटे के गहरे शोध और मनोविज्ञान के सिद्धांतों के आधार पर, आज मैं आपके साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण सत्य साझा कर रहा हूँ। इसे ध्यान से समझें और अपने जीवन का अवलोकन करें: 1. मुखौटा बनाम आपका वास्तविक स्वरूप (Authenticity vs. Personality) हम सभी मूल रूप से 'प्रामाणिक' (Authentic) ही पैदा होते हैं। लेकिन समाज, परिवार और परिवेश की अपेक्षाओं के चलते हम अपने ऊपर "हमेशा अच्छा दिखने" (Being nice all the time) और लोगों को खुश करने के मुखौटे चढ़ा लेते हैं। बचपन से ही हमें यह डर सिखा दिया जाता है कि यदि हम वही बने रहे जो हम वास्तव में हैं, तो लोग हमें अस्वीकार कर देंगे। मुक्ति (Liberation) कोई जादुई घटना नहीं है; मुक्ति तब मिलती है जब आपको यह अहसास होता है कि आपका 'कंडीशन्ड व्यक्तित्व' (Personality) आपका वास्तविक आत्म (True Self) नहीं है। 2. खुद पर आरोप मत लगाइए, 'दयालु जिज्ञासा' (Compassionate Curiosity) अपनाइए जब भी हम कोई पुरानी गलत आदत दोहराते हैं, तो हम खुद से कहते हैं— "मैं ऐसा क्यों हूँ? मैं क्यों नहीं बदल पा रहा?" यह कोई सवाल नहीं, बल्कि खुद पर लगाया गया एक 'आरोप' है, जो आपके आत्मसम्मान को चोट पहुँचाता है। इसकी जगह खुद से दयालु जिज्ञासा (Compassionate Curiosity) के साथ पूछिए: "क्या बात है जो मुझे ऐसा करने पर मजबूर कर रही है? इसके पीछे कौन सा अनसुलझा दर्द छिपा है?" जब आप खुद पर हमला करेंगे, तो मन बचाव (Defense) की मुद्रा में आ जाएगा; लेकिन जब आप आत्म-सहानुभूति रखेंगे, तभी सच्चाई सामने आएगी। 3. आदतें और मस्तिष्क की प्रोग्रामिंग (Habit Energies) अपनी भावनाओं को दबाना एक सीखी हुई आदत है, जो बचपन में आपके दिमाग के न्यूरोलॉजिकल सर्किट्स में बैठ गई थी। यह एक स्वचालित व्यवहार (Automatic behavior) है। जैसे जिम में पहले ही दिन 150 पाउंड वजन नहीं उठाया जा सकता, वैसे ही इन 'हैबिट एनर्जीज' को बदलने के लिए लगातार, धैर्यपूर्वक और बिना खुद को कोसे अभ्यास करने की आवश्यकता होती है। 4. लत (Addiction) और शारीरिक दर्द की असली वजह: बचपन का अनसुलझा दर्द लत (चाहे वह किसी पदार्थ की हो, काम की हो या किसी व्यवहार की) कोई नैतिक कमजोरी या केवल अनुवांशिक बीमारी नहीं है। यह असल में भावनात्मक दर्द, अकेलेपन, बेचैनी और खालीपन को 'सुन्न' (Numb) करने का एक असफल प्रयास है। शोध बताते हैं कि जिन लोगों ने बचपन में प्रतिकूल परिस्थितियों या आघात (Adverse Childhood Experiences / Trauma) का सामना किया होता है, वयस्क होने पर उनके शरीर में क्रोनिक दर्द और मानसिक बीमारियों की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। वे केवल लत के शिकार नहीं हैं, बल्कि वे एक गहरे आघात से जूझ रहे व्यक्ति हैं जिसका शरीर उस दर्द पर प्रतिक्रिया दे रहा है। 5. आधुनिक जीवन में तनाव के 3 ट्रिगर और 4 बड़े 'अलगाव' (Alienations) तनाव मुख्य रूप से तीन चीजों से पैदा होता है: अनिश्चितता (Uncertainty) जानकारी का अभाव (Lack of Information) नियंत्रण खोने का अहसास (Loss of Control) जब यह तनाव बढ़ता है, तो इंसान चार तरह के अलगाव का शिकार होता है: 1. प्रकृति से अलगाव (Alienation from Nature): प्राकृतिक वातावरण से पूरी तरह कट जाना। 2. दूसरों से अलगाव (Alienation from Others): आत्मीयता, भरोसे और गहरे रिश्तों की कमी। 3. अपने काम से अलगाव (Alienation from Work): ऐसा काम करना जिसमें कोई आत्मिक अर्थ या रचनात्मकता न हो, जिसके कारण लोग बाहरी दिखावे और भौतिक वस्तुओं में झूठी खुशी तलाशने लगते हैं। 4. स्वयं से अलगाव (Alienation from Self): अपनी अंतरात्मा और अंतर्ज्ञान (Gut Feeling) को दबा देना। जब हम बचपन में अपनों का प्यार पाने के लिए अपनी भावनाओं को मार देते हैं, तो हम अपने ही सत्य से कट जाते हैं। 6. तनाव कैसे बीमारी बनता है? तनाव सिर्फ बाहरी घटना नहीं है। तनाव तीन चरणों में काम करता है: बाहरी घटना (Stressor) हमारा आंतरिक नजरिया (Processing Apparatus - हमारे अवचेतन विश्वास और व्याख्याएं) शारीरिक प्रतिक्रिया (Physiological Response - एड्रेनालाईन, कोर्टिसोल, तंत्रिका तंत्र और अंगों पर असर) जब हम दूसरों की स्वीकृति पाने के लिए लगातार अपनी प्रामाणिकता की बलि देते हैं, तो हम अपने शरीर को भारी तनाव में डालते हैं, जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले लेता है। 7. बीमारी एक शिक्षक के रूप में और 'रिकवरी' का वास्तविक अर्थ बीमारी केवल एक विपत्ति नहीं है, बल्कि कई बार यह एक अलार्म की तरह आती है जो हमें यह सिखाती है कि हम कहाँ अपने वास्तविक स्वरूप से भटक गए थे। स्वास्थ्य लाभ के लिए 'Recovery' (पुनर्प्राप्ति) शब्द का प्रयोग होता है। रिकवर करने का अर्थ है— उसे दोबारा पाना जो कभी खोया ही नहीं था। आपका सच्चा, प्रामाणिक स्वरूप हमेशा आपके भीतर मौजूद है, बस उस पर जमी धूल और कंडीशनिंग को हटाना है। मुख्य संदेश: जीवन का सबसे बड़ा तनाव किसी और की अपेक्षाओं के अनुसार जीना है। लोगों को खुश करने के लिए अपनी अंतरात्मा की आवाज को मत दबाइए। अपनी कमियों को स्वीकार कीजिए, खुद के प्रति करुणामय बनिए और अपने वास्तविक स्वरूप में जीने का साहस जुटाइए।

रघुपति सहाय फ़िराक़_गोरखपुरी

फ़िराक़ गोरखपुरी Pavan Kumar Sharma Fri 28 Aug, 08:43 (5 days ago) to Pavan फ़िराक़ गोरखपुरी..प्रमुख शायर..भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित.. फ़िराक़ गोरखपुरी का परिचय उपनाम :'फ़िराक़' मूल नाम :रघुपति सहाय जन्म :28 Aug 1896 | गोरखपुर, उत्तर प्रदेश निधन :03 Mar 1982 | दिल्ली, भारत बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं तुझे ऐ ज़िंदगी हम --------- दूर से पहचान लेते हैं फ़िराक़ गोरखपुरी एक युग निर्माता शायर और आलोचक थे। उनको अपनी विशिष्टता की बदौलत अपने ज़माने में जो प्रसिद्धि और लोकप्रियता मिली वो कम ही शायरों को नसीब होती है। अगर फ़िराक़ न होते तो हमारी ग़ज़ल की सरज़मीन बेरौनक़ रहती, फ़िराक़ के शे’र दिल को प्रभावित करने के इलावा सोचने को विवश भी करते हैं और उनकी यही विशेषता फ़िराक़ को दूसरे सभी शायरों से उत्कृष्ट करती है। रघुपति सहाय फ़िराक़_गोरखपुरी आसमान-ए-उर्दू के उस जगमगाते सितारे का नाम है जिसकी चमक नए आने वाले शायरों की रहनुमाई रहती दुनिया तक करती रहेगी. इस अलमस्त शायर ने क्लासिकल ग़ज़ल के हुस्न और नज़ाकत को बरक़रार रखते हुए उसकी नोक पलक संवार कर बड़ी नफ़ासत से उसे जदीदियत के सांचे में ढाला जिससे रिवायती ग़ज़ल में एक अनोखा लोच और बांकपन पैदा हो गया. उनके बनाए हुए इसी पैटर्न पर चलते हुए बशीर बद्र और उनके हम-अस्र दूसरे शायरों ने बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़लें कही हैं. फ़िराक़ साहब को उनके दीवान गुलेनग़मा पर 1960 में साहित्य_अकादमी_पुरस्कार और इसी किताब पर 1970 में ज्ञानपीठ_अवार्ड से नवाज़ा गया. उर्दू लिटरेचर की ख़िदमात के सिले में फ़िराक़ साहब को पद्मभूषण पुरुस्कार से सम्मानित किया गया. उनकी रूमानियत से रची बसी फ़लसफ़ियाना अंदाज़ की शायरी की एक बानगी मुलाहिज़ा फ़रमाएं - रात भी, नींद भी, कहानी भी हाए क्या चीज़ है, जवानी भी मौत का भी इलाज हो शायद ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं वो चुप-चाप आँसू बहाने की रातें वो इक शख़्स के याद आने की रातें दीदार में यक-तरफ़ा दीदार नज़र आया हर बार छुपा कोई, हर बार नज़र आया किसी का यूं तो हुआ कौन उम्र भर, फिर भी ये हुस्नो इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ उफ़ ले गई है मुझ को मोहब्बत कहाँ कहाँ बेताबी-ओ-सुकूँ की हुईं मंज़िलें तमाम बहलाएँ तुझ से छुट के तबी'अत कहाँ कहाँ फ़ुर्क़त हो या विसाल वही इज़्तिराब है तेरा असर है ऐ ग़म-ए-फ़ुर्क़त कहाँ कहाँ फ़र्क़ आ गया था दौर-ए-हयात-ओ-ममात में आई है आज याद वो सूरत कहाँ कहा जैसे फ़ना बक़ा में भी कोई कमी सी हो मुझ को पड़ी है तेरी ज़रूरत कहाँ कहाँ.. होश-ओ-जुनूँ भी अब तो बस इक बात हैं 'फ़िराक़' होती है उस नज़र की शरारत कहाँ कह

Ghazal (Kateel Shifaai)

Ghazal (Kateel Shifaai) It looks like this message is in Hindi तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं। किसको खबर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैँ सावन आया लेकिन अपनी किस्मत में बरसात नहीं। टूट गया ये दिल तो फिर ये साँस के क्या मा'नी गूंज रही है क्यूँ शहनाई ज़ब कोई बारात नहीं। गाम के अंधियारे में तुझको अपना साथी क्यूँ समझूँ तू फिर भी तू है मेरा तो साया भी मेरे साथ नहीं। माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती है लेकिन मुझको ये तो बता दे क्या तू औरत जात नहीं। ख़त्म हुआ मेरा फ़साना अब ये आँसू पौंछ भी तो जिस में कोई तारा चमके आज की रात वो रात नहीं। मेरे गमगीँ होने पर अहबाब है यूँ हैरान " कतील " जैसे मैं पत्थर हूँ मेरे सीने में जज़्बात नहीं। अहबाब = मित्र, दोस्त। " कतील शिफाई "

Rasleela Nathdwara Style | Twin Eternals - Matter & Energy

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