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Swasti Sansthan
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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9:03 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
क़स्बा जो छूट गया बहुत मोहक, बहुत काम्य था वह क़स्बा डेढ़ कोस दूर गाँव से पहला पड़ाव हर यात्रा का वहीं से मिलती थी बस ज़िले के सदर मुक़ाम की जहाँ था जंक्शन जाती थीं गाड़ियाँ वहीं से भरकर लोगों को दूर-दूर जाने किस दुनिया में. दिखने से पहले ही क़स्बे के सुनाई पड़ती थी पुक-पुक चक्की की और शुरू हो जाती थी थरथराहट नन्हें-से दिल के किसी कोने में. फिर दिखते थे बड़े-बड़े अक्षर सुघड़, सुडौल, रंगीन झोंपड़ों के पिछवाड़े रंगीन पुती, साफ़-सुथरी कच्ची दीवार पर डोंगरे का बालामृत, वैद्यनाथ का बालासर डाबर की कोई घुट्टी भी जुड़ गई थी बाद में मोटे-ताज़े ख़ुशहाल बच्चे के साथ. रंगों का दिखना ही था क़स्बे का पूर्वराग खींचता था एक लहर की तरह मन के आर-पार. फिर दिखती थी नई-नवेली सड़क तारकोल की चिकनी, दूर तक बहती छरहरी नदी-सी गुज़र जाती थी उस पर कभी कोई बस दुकानों के बीच से झलक दिखाकर पीछे छोड़कर भोंपू की काँपती आवाज़ और पेट्रोल की वह अनचीन्हीं रोमांचक गंध हवा में घुलती-तैरती आती थी नासाग्र तक उछल पड़ता था दिल ज़ोर से उस अनजानी दुनिया के लिए जो सर्राटे से निकलती बस की मंज़िल होगी. फिर दिखता दुकानों के ठीक पिछवाड़े, दूर तक फैले खेतों के बीच रावण का खड़ा और कुम्भकर्ण का लेटा पुतला टूटा-फूटा, प्लास्टर झड़ा सजेगा साल के सिर्फ़ एक दिन दशमी के मेले के लिए आयेगी ज़रूर उसमें कंपनी नौटंकी की बनारस वाली नाचेंगी, ‘खेला’ भी करेंगी, असली औरतें गाँव की तरह औरत-बने मर्द नहीं. और मौत के कुँएँ की दीवार पर नीचे से ऊपर, ऊपर से नीचे बेधड़क चलाती फटफटिया वह क़द्दावर लड़की भी और गोल-गोल घूमते खटोलों वाले झूले ऊँचाई से उतरते भीतर का कुछ रह जाता था ऊपर डर की लहर के साथ फिर आता था तहसील का अहाता बीच में कुआँ, बरगद का पेड़ और गोल-मटोल मोटी दीवारवाली छोटी सख़्त इमारत ख़जाने की भारी-भरकम ताला-लगे दरवाज़े के सामने सीधा खड़ा संतरी सावधान बंदूक में खुँसी संगीन के साथ हमेशा अटेंशन में गोल इमारत के मुस्तक़िल हिस्से-जैसा. बाद में बताया गया ख़ज़ाने की वसूली के लिए ही तहसील थी और था सारा ताम-झाम. कि सन् बयालीस में इसी को लूटने आए थे आस-पास के गाँवों से ‘क्रांतिकारी’ नाम लेकर बताते थे कौन-कौन गया था डेढ़ कोस दूर हमारे गाँव से लेकिन चूक हो गई नहीं तोड़ा पुल पहले ही नाले का फिर मुख़बिर की ख़बर पर आ गई 'गारद' सदर मुक़ाम से और बच गया ख़ज़ाना और रह गया क़स्बा इतिहास में दर्ज होते-होते. फिर आता था बाज़ार सड़क से निकलती एक गली में जो आगे बनाती थी गलियों का संजाल क़िस्म-क़िस्म की दुकानों के लिए क़िस्म-क़िस्म की गलियाँ बड़ों को हमेशा होता था वहाँ कोई काम और नहीं तो ख़रीदारी सुरती-सुपारी की. मन न लगा कभी उसका बाज़ार में हमेशा वह चाहता आगे निकलकर बैठे पुल पर देखे बस को बिल्कुल पास से गुज़रते झन्नाटे से, हिलाते पुल को. पुल था उस चौड़े नाले पर जिसका एक दुबला-पतला सहायक जाता था उसके गाँव तक टेढ़ा-मेढ़ा, लम्बी दूरी तयकर. कितनी बार मन हुआ, चलें नाले के साथ अपने गाँव तक खेतों से, मेड़ों से, कुश-काश, ढाक-बबूल के जंगलों से सरपत और बेहया की झाड़ियों से पर कभी न हो सका इतना-सा साहस. आख़िर छूट गया गाँव, छूट गया क़स्बा. कहाँ खो गया वह बचपन का गाँव, बचपन का क़स्बा अब नहीं गुज़रता वह क़स्बे से गाँव जाते या गाँव से लौटते हुए मुँह छिपाकर निकल लेता है बायपास से शर्म लगती है बचपन के उस दोस्त से पहले-पहले प्यार से दुनिया खोलनेवाले द्वार से. कहाँ मालूम था दुनिया इतनी बड़ी, इतनी बेरहम है रँग देती है अपने ही रंग में छील-छीलकर सिखा देती है मीठे-मुलायम शब्दोंवाली कथनी और छल-कपट आडम्बरोंवाली करनी दो पाटों की दुधारी दुनियादारी. ...............
9:00 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
आइए ग़ज़ल कहना सीखें- ------------------------------------- वज़्न/बह्र/रुक्न क्या है-२ पिछले पोस्ट में हमने जाना कि शब्दों का वज़्न या भार क्या होता है और किस तरह लघु/ हर्स्व/ लाम(उर्दू) को छोटा ध्वनि-भार गिनते हुए १ की संख्या से एवं गुरु/ दीर्घ/ ग़ाफ़ (उर्दू) को बड़ा ध्वनि-भार गिनते हुए २ की संख्या से इंगित करते हैं. सीखने के इच्छुक व्यक्तियों को पढ़ने के साथ साथ मश्क़ (अभ्यास) की सलाह दी जाती है. जिस तरह अंग्रेज़ी भाषा में शब्दों के syllables होते हैं, जो उनके उच्चारण और accent को निर्धारित करते हैं, उसी तरह हिन्दी/ उर्दू में भी शब्दों को syllables एवं accent के आधार पर तोड़कर उनके वज़्न या भार को आसानी से पता किया जा सकता है. उदहारण के तौर पे अंग्रेज़ी का एक शब्द psychology/ साइकोलॉजी लेते हैं. इसे अंग्रेज़ी में सपाट तौर पे साइकोलॉजी न बोलकर साइक’लजी बोलते हैं. यदि सपाट साइकोलॉजी पे भार गिनें तो भार होगा २१२२२ (सा-२, इ-१, को-२, लॉ-२, जी-२), मगर यदि syllables एवं accent को ध्यान में रखकर बोले जाने वाले शब्द साइ’क’लजी पे भार गिनें तो भार होगा २१११२/ या २११११ (यदि जी पर भी ध्वनि छोटी रखी जाए तो). ये उदहारण इस बात को समझने के लिए पर्याप्त है कि हमें हिंदी/उर्दू के शब्दों के भार को पता करने के लिए शब्दों की मात्रा के साथ साथ शब्दों के syllables एवं accent को भी ध्यान में रखना होगा, अर्थात ये देखना होगा कि किसी शब्द में कितनी अलग-अलग ध्वनियाँ हैं. जैसे एक शब्द है इम्तिहान, इसे खंडित करके यदि पढेंगे तो शब्द इस प्रकार होगा इम+ति+हा+न और इस प्रकार इसका भार होगा इम२+ति१+हा२+न१, यानी २१२१. अगर इसी शब्द को उर्दू क़ायदे के हिसाब से इम्तिहाँ बोलें तो भार होगा २१२ (इम+ति+हाँ). एक अन्य उदाहरण लेते हैं, कलम. इसे क+लम बोलते हैं, कल+म नहीं. यदि क+लम बोला जाए, जो कि सही है, तो भार होगा १२ (क१+लम२), और यदि कल+म बोला जाए, जो कि ग़लत है, तो भार होगा २१ (कल२+म१). तो आइए भार के हम कुछ और उदाहरण देखते हैं. दिवाली १२२ दीवाली २२२ ख़ामोश २२१ ख़मोश १२१ पटना २२ लंका २२ स्त्री २२ पूर्ण २१ पूर्णा २२ अर्ध २१ कल्पना २१२ दोस्ती २१२ मुलाक़ात १२२१ बरसात २२१ मुहब्बत १२२ मकान १२१ मकाँ १२ दूकान २२१ अत्याचारी २२२२ वैरागी २२२ दुश्मन २२ पूर्व २१ पूर्वा २२ पुरवाई २२२/२२१ गुलाम १२१ राजा २२ राज़ २१ रज़ा १२ सल्तनत २१२ इत्तिफ़ाक़ २१२१ ग़मनाक २२१ उज्जवल २१२ विध्वंस २२१ वंश २१ अंश २१ तृप्ति २१ इत्यदि
8:57 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Hustle Culture (Savoring) जीवन को सच में कैसे जिएं: आनंद, अर्थ और 'सavoring' (रस लेने) का मनोविज्ञान डॉ. अनिल तांबी आज के भागदौड़ और 'हसल-कल्चर' (Hustle Culture) के दौर में हम सभी सफल होने की रेस में भाग रहे हैं। हमने करियर बना लिया, जिम्मेदारियां पूरी कर लीं, लेकिन इसके बावजूद भीतर एक खालीपन महसूस होता है। कई बार ऐसा लगता है जैसे हम केवल दिन काट रहे हैं, जीवन को गहराई से महसूस नहीं कर पा रहे। समस्या यह नहीं है कि आपके जीवन में खुशियों या उपलब्धियों की कमी है; असली समस्या यह है कि हम 'सavoring' (जीवन के अनुभवों का स्वाद या रस लेना) भूल चुके हैं। विज्ञान और न्यूरोसाइंस (Neuroscience) के अनुसार, जब तक आप अपने वर्तमान, अतीत और भविष्य के अनुभवों को गहराई से महसूस नहीं करते, तब तक सच्चा मानसिक संतोष और आनंद पाना असंभव है। 1. 'सavoring' (रस लेना) क्या है और यह क्यों जरूरी है? 'Savoring' का सीधा सा अर्थ है—किसी भी अनुभव (चाहे वह अच्छा हो, सामान्य हो या कठिन) में पूरी तरह उपस्थित होना, ठहरना और उसे गहराई से महसूस करना। न्यूरोलॉजिकल प्रभाव: जब आप किसी पल का रस लेते हैं—जैसे चाय की चुस्की लेना, अपनों के चेहरे को ध्यान से देखना या ठंडी हवा को महसूस करना—तो यह आपके मस्तिष्क के रिवॉर्ड सेंटर (Ventral Striatum) को सक्रिय करता है। इससे डोपामाइन और खुशी के केमिकल्स रिलीज होते हैं। अवसाद (Depression) से बचाव: अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग रोजमर्रा की छोटी-छोटी घटनाओं में पूरी तरह मौजूद रहते हैं, उनमें अवसाद और तनाव का स्तर काफी कम होता है। सकारात्मक स्मृतियाँ: जितना गहराई से आप वर्तमान का आनंद लेंगे, आपका मस्तिष्क (Hippocampus) उतनी ही मजबूत और सुखद यादें तैयार करेगा, जो भविष्य में आपको मानसिक शक्ति देंगी। 2. हम स्वाभाविक रूप से खुशियों का आनंद क्यों नहीं ले पाते? हमारा दिमाग लगभग 2,500,000 साल पुराने सर्वाइवल मैकेनिज्म (Survival Mechanism) पर काम करता है। हमारे पूर्वजों को जिंदा रहने के लिए हमेशा खतरों और नकारात्मक चीजों पर ध्यान देना पड़ता था। इसे मनोविज्ञान में Negativity Bias कहा जाता है। हमारा दिमाग हमेशा भविष्य की चिंता या आने वाली समस्याओं को खोजने में लगा रहता है। प्रकृति का उद्देश्य हमें केवल जीवित रखना था, खुश रखना नहीं। लेकिन मानव मस्तिष्क की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हम अपनी चेतना (Prefrontal Cortex) का उपयोग करके इस नकारात्मक प्रवृत्ति को बदल सकते हैं और जागरूक होकर खुशियों का चयन कर सकते हैं। 3. जीवन का पूर्ण आनंद लेने के व्यावहारिक तरीके अपने जीवन की गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए आप इन वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीकों को अपना सकते हैं: A. तीनों काल खंडों (Time Zones) में जीवन को महसूस करें 1. अतीत का आनंद (Past): बीते दिनों की केवल बुरी यादों को न पकड़ें। अतीत की उन छोटी-छोटी खूबसूरत घटनाओं को याद करें जिन्होंने आपको खुशी दी थी। अपनी यादों को सकारात्मक दृष्टिकोण से एडिट करना सीखें। 2. वर्तमान में ठहराव (Present): आप जो भी कर रहे हैं, उसमें 100% मौजूद रहें। अगर आप बर्तन भी धो रहे हैं या टहल रहे हैं, तो केवल उसी क्रिया पर ध्यान केंद्रित करें। 3. भविष्य की उम्मीद (Future): आने वाले दिनों में किसी अच्छी घटना या छोटे-छोटे अवसरों की उत्सुकता से प्रतीक्षा करें। B. 'सavoring' के चार मुख्य कौशल शारीरिक अभिव्यक्ति (Behavioral Display): मुस्कुराने का प्रयास करें। यहाँ तक कि एक बनावटी मुस्कान भी आपके दिमाग को संदेश देती है कि आप सुरक्षित और खुश हैं। मन को ठहराना (Be Present): खुद से कहें, "इस वक्त मैं यह काम कर रहा हूँ और मैं इसका आनंद ले रहा हूँ।" खुशियों को साझा करना (Capitalizing): जब आपके साथ कुछ अच्छा हो, तो अपनों के साथ उसकी चर्चा करें और साथ मिलकर जश्न मनाएं। पॉजिटिव टाइम ट्रेवल: दिन के अंत में या शुरुआत में कुछ मिनट निकाल कर सुखद क्षणों को दोबारा अपने मन में दोहराएं। C. असफलताओं और कठिन समय का रस कैसे लें? जीवन में केवल सुख ही नहीं, असफलताएं और दुख भी आते हैं। कठिन समय को संभालने के लिए 'Failure Journal' की तकनीक अपनाएं: 1. जब भी कोई विफलता या दुखद घटना हो, उसे कागज पर लिखें और नीचे दो खाली लाइनें छोड़ दें। 2. एक महीने बाद: पहली खाली लाइन में लिखें कि उस बुरी घटना से आपने क्या सीखा। 3. दो महीने बाद: दूसरी खाली लाइन में लिखें कि उस घटना के कारण आपके जीवन में क्या नया और अच्छा बदलाव आया। यह अभ्यास कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी अर्थ और मानसिक परिपक्वता प्रदान करता है। 4. जीवन के दो सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यदि आप जीवन में दिशाहीन महसूस कर रहे हैं, तो खुद से ये दो सवाल पूछें: 1. मैं जीवित क्यों हूँ? (मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?) 2. मैं किस चीज़ के लिए अपना जीवन समर्पित कर सकता हूँ? जब आप अपने उत्तर खोज लेते हैं, तो आपका जीवन केवल एक दिनचर्या नहीं रहता, बल्कि एक अर्थपूर्ण यात्रा बन जाता है। अपने वर्तमान पलों को जीना शुरू करें, हर पल का रस लें, और अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
8:33 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
5 तरीके नये नये एक ।कलर डाप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट(Ultrasound Test) -आजकल जितने भी रेडियोलॉजिकल टेस्ट हैं उनमे अल्ट्रासाउंड टेस्ट सबसे कॉमन टेस्ट में से एक है अल्ट्रासाउंड examination एक बहुत ही common test है और शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने इस टेस्ट का नाम ना सुना हो जब भी पेट में दर्द हो, लिवर या गॉलब्लेडर की परेशानी हो, या घर में नए मेहमान के आने की confirmation करनी हो तो डॉक्टर की सलाह होती है कि-“ए 5 तरीके नये नये एक ।कलर डाप्लर अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट(Ultrasound Test) -आजकल जितने भी रेडियोलॉजिकल टेस्ट हैं उनमे अल्ट्रासाउंड टेस्ट सबसे कॉमन टेस्ट में से एक है अल्ट्रासाउंड examination एक बहुत ही common test है और शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने इस टेस्ट का नाम ना सुना हो जब भी पेट में दर्द हो, लिवर या गॉलब्लेडर की परेशानी हो, या घर में नए मेहमान के आने की confirmation करनी हो तो डॉक्टर की सलाह होती है कि-“एक अल्ट्रासाउंड करवा लीजिए।" आखिर यह Ultrasound क्या चीज़ है? क्या इसमें कोई सुई लगती है या कोई खतरनाक किरणें निकलती हैं? आइए इसे बिल्कुल सीधी भाषा में समझते हैं। मान लीजिए आप एक गहरे कुएं के पास खड़े हैं और नीचे चिल्लाते हैं—आपकी आवाज टकराकर वापस आती है, जिसे हम echo यानी गूंज कहते हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन ठीक इसी सिद्धांत पर काम करती है। इसमें कोई हानिकारक X-ray रेडिएशन नहीं होता। इसमें एक छोटी सी डिवाइस होती है जिसे Probe कहते हैं। डॉक्टर त्वचा पर एक ठंडा सा Gel लगाते हैं और इस probe को ऊपर घुमाते हैं। यह मशीन इंसान के कान से न सुनी जा सकने वाली High-frequency Sound Waves (ध्वनि तरंगें) शरीर के अंदर भेजती है। ये तरंगें अंदरूनी अंगों से टकराकर जब वापस आती हैं, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर आपके अंगों की एक साफ-सुथरी तस्वीर (Live Image) बना देती हैं। डॉक्टर इसे कब कराने की सलाह देते हैं? शरीर के अंदर किसी भी तरह की हलचल या दिक्कत को पकड़ने के लिए यह सबसे भरोसेमंद और शुरुआती साधन है: * Pregnancy (गर्भावस्था): पेट में पल रहे बच्चे की धड़कन देखने, उसकी ग्रोथ जांचने और सही पोजीशन का पता लगाने के लिए। आजकल तो ये टेस्ट इतना एडवांस हो गया है कि जब बच्चा माँ के पेट में रहता है यानी गर्भ में रहता है और अगर उस बच्चे के पेट के अंदर अगर कोई प्रॉब्लम है तो ये उसको भी दिखा देता है * Abdominal (पेट की समस्याएं): गॉलब्लेडर में पथरी (Gallstones), किडनी स्टोन (Kidney stones), या लिवर में फैट (Fatty liver) Appendicitis, पेशाब की थैली, Spleen देखने के लिए * Musculoskeletal System (जोड़ों और मांसपेशियों की जांच): मांसपेशियों का फटना, लिगामेंट में सूजन, या जोड़ों के आसपास पानी भर जाने पर। * Blood Vessels (नसें): अगर पैरों की नसों में थक्का हो जाना।
8:18 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
व्यक्तित्व (Personality) और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) को आसान भाषा में समझें डॉ. अनिल तांबी (वरिष्ठ मनोचिकित्सक) हमारे दैनिक जीवन में हम अक्सर सुनते हैं— "अरे, उस व्यक्ति की पर्सनैलिटी कितनी अच्छी है!" या "वह बहुत चिड़चिड़े स्वभाव का है।" लेकिन एक मनोचिकित्सक के रूप में, जब मैं 'पर्सनैलिटी' की बात करता हूँ, तो इसका मतलब केवल बाहरी दिखावा या बातचीत का तरीका नहीं होता। आज हम बहुत ही सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे कि 'व्यक्तित्व' (Personality) क्या है, 'पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' (Personality Disorder) क्या होता है, और हम खुद को व अपने आसपास के लोगों को कैसे बेहतर समझ सकते हैं। 1. व्यक्तित्व (Personality) क्या है? व्यक्तित्व हमारी "मनोवैज्ञानिक त्वचा" (Psychological Skin) की तरह है। जिस तरह हमारी शारीरिक त्वचा हमारे आंतरिक अंगों की रक्षा करती है और हमें बाहरी दुनिया से जोड़ती है, ठीक उसी तरह हमारी पर्सनैलिटी हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार का वह संयोजन है जो हमें दूसरों से अलग बनाता है। सरल शब्दों में, पर्सनैलिटी में तीन मुख्य बातें शामिल होती हैं: 1. हम कैसे सोचते हैं (हमारे विचार और खुद व दूसरों के प्रति धारणाएं) 2. हम कैसे महसूस करते हैं (हमारी भावनाएं और मूड) 3. हम कैसा व्यवहार करते हैं (तनाव और परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रिया) उदाहरण: जब दो लोग सड़क पर अचानक लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम में फंसते हैं: व्यक्ति A (लचीला व्यक्तित्व): सोचता है— "अब फंस ही गए हैं तो थोड़ा संगीत सुन लेते हैं या किसी मित्र से बात कर लेते हैं।"व्यक्ति B (अत्यधिक तनावग्रस्त व्यक्तित्व): स्टीयरिंग व्हील पर हाथ मारता है, दूसरों पर चिल्लाता है और पूरे दिन का मूड खराब कर लेता है। 2. पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) क्या है? हर व्यक्ति में कुछ कमियां या अनोखे स्वभाव होते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने का तरीका अत्यधिक कठोर (Rigid), अस्वास्थ्यकर और असामान्य हो जाए, तो इसे पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहा जाता है। जब व्यक्ति का स्वभाव ऐसा हो जाए कि: वह बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल न पाए (Inflexible)। उसके रिश्तों में लगातार कड़वाहट और उथल-पुथल बनी रहे। वह अपने काम, पढ़ाई या सामाजिक जीवन में सामान्य रूप से कार्य न कर पाए। उसे खुद यह अहसास न हो कि समस्या उसके अपने व्यवहार में है, बल्कि वह हमेशा दूसरों को दोष दे। 3. आम जीवन के उदाहरणों से समझें पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के प्रकार आम भाषा में समझने के लिए इन्हें तीन मुख्य श्रेणियों (Clusters) में देखा जा सकता है: क) अत्यधिक शक्की या अलग-थलग रहने वाला स्वभाव (Odd/Eccentric Pattern) पैरानॉयड पर्सनैलिटी (Paranoid): ऐसे व्यक्ति को बिना किसी ठोस वजह के हमेशा लगता है कि लोग उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं या उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उदाहरण: एक सहकर्मी जो यह सोचकर परेशान रहता है कि चाय के ब्रेक में सहकर्मी उसी का मज़ाक उड़ा रहे थे, भले ही वे सामान्य बात कर रहे हों। ख) अत्यधिक भावनात्मक, ड्रामेटिक या आवेगपूर्ण स्वभाव (Dramatic/Emotional Pattern) बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी (Borderline Personality Disorder - BPD): इसमें व्यक्ति के मूड, आत्म-सम्मान और रिश्तों में तीव्र उथल-पुथल होती है। इन्हें अकेलेपन से बहुत डर लगता है। रिश्तों में ये या तो किसी को भगवान मान लेते हैं या तुरंत उसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन। उदाहरण: छोटी-सी बात या देर से जवाब मिलने पर यह महसूस करना कि सामने वाला उन्हें छोड़ रहा है, अत्यधिक गुस्सा करना या खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी देना। नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी (Narcissistic): इसमें व्यक्ति स्वयं को दूसरों से बहुत श्रेष्ठ समझता है, लगातार प्रशंसा की मांग करता है और दूसरों की भावनाओं के प्रति सहानुभूति (Empathy) की कमी रखता है। ग) अत्यधिक डर, चिंता या पूर्णता (Perfectionism) का स्वभाव (Anxious/Fearful Pattern) ऑब्सेसिव-कंपल्सिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (OCPD): ऐसे लोग नियमों, व्यवस्था और पूर्णता (Perfection) को लेकर इतने कठोर होते हैं कि वे काम पूरा ही नहीं कर पाते और दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। (ध्यान दें: यह OCD बीमारी से अलग स्वभावगत कठोरता है)। डिपेंडेंट पर्सनैलिटी (Dependent): ऐसे व्यक्ति छोटे-छोटे फैसलों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं और अकेले रहने के डर से अनुचित बातें भी मान लेते हैं। 4. खुद को और दूसरों को समझने के लिए व्यावहारिक सुझाव 1. स्व-जागरूकता (Self-Awareness) विकसित करें: जब भी किसी स्थिति में तनाव बढ़े, तो रुककर सोचें: "क्या मेरी प्रतिक्रिया स्थिति के हिसाब से सही है, या यह मेरा पुराना व्यवहारिक ढर्रा है?" अपनी भावनाओं को पहचानना और उन पर विचार करना (Mentalizing) मानसिक स्थिरता की पहली सीढ़ी है। 2. दूसरों के प्रति दृष्टिकोण बदलें: यदि कोई व्यक्ति बार-बार अपने रिश्तों में उलझ रहा है या अत्यधिक प्रतिक्रिया दे रहा है, तो केवल यह कहकर उसे खारिज न करें कि वह "बुरा" या "ड्रामा करने वाला" है। कई बार यह उनके व्यक्तित्व की किसी गहरी असंतुलित ग्रंथि (Personality vulnerability) का परिणाम होता है। 3. काम और प्रेम (Love & Work) में संतुलन: एक स्वस्थ व्यक्तित्व वह है जो सार्थक संबंध (Love) बना सके और अपने जीवन में उत्पादक कार्य (Work) कर सके। यदि आपका स्वभाव इन दोनों चीजों में बाधा डाल रहा है, तो मदद मांगने में संकोच न करें। निष्कर्ष और संदेश पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कोई 'चरित्र की कमी' या 'पाप' नहीं है। यह आनुवंशिक (Genetics) और बचपन के माहौल/अनुभवों के मेल से विकसित होने वाली एक मानसिक स्थिति है। अच्छी बात यह है कि सही साइकोथेरेपी (Psychotherapy), काउंसिलिंग और आत्म-जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवहारिक ढर्रे को बदल सकता है और एक संतुलित व खुशहाल जीवन जी सकता है। यदि आप या आपका कोई प्रियजन लगातार भावनात्मक या सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो किसी विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
8:31 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
ग़ज़ल की साधना कृपया ध्यान दें इस बार आपका टास्क थोड़ा अलग है. इस बार अपने टास्क को तीन भागों में पूरा करेंगे. 1. सबसे पहले दी गई ज़मीन में ग़ज़ल लिखने के लिए आप अपने क़ाफ़िया शब्दों का चुनाव करेंगे और उसे ग्रुप में मुझे भेजेंगे, 2. उसके बाद आप 6-7 सानी मिसरे लिखकर भेजेंगे, 3. और फिर अंत में, सभी सानी मिसरों के ऊला मिसरों को लिखकर अपनी ग़ज़ल मुकम्मल करेंगे और भेजेंगे. ऐसा शब्दों के सही चुनाव एवं उचित वाक्य विन्यास को ध्यान में रखकर किसी भी शेर को कहने की आदत को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है; साथ में इस बात के महत्व को समझने के लिए भी कि किसी भी शेर में दो मिसरों के बीच के रब्त का अत्यधिक महत्त्व है, जिसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है. अभ्यास के लिए तरही मिसरा/ शेर अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 ी तक़ती'अ- अपना जो कुछ/था मेरा ज़ीस्त में,सारा/तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा/हुआ तारा/तुम हो //1 मापनी- 2122-1122-1122-22 रकान- फ़ाइलातुन-फ़इलातुन-फ़इलातुन-फ़ेलुन बह्र- बह्र-ए-रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ क़ाफ़िया की तुक-'आरा' रदीफ़-'तुम हो' ग़ज़लغزل: 2122-1122-1122-22 दोस्तो, ये ग़ज़ल अब तक मेरी क्रमांकित ग़ज़लों में नहीं शामिल थी. आज मुझे इसी बह्र में का नया अभ्यास क्रमांक 67 देना था. जब अपने आर्काइव में ढूंढा तो मुझे राज़ की रोज़ाबेल कैथरीन के लिए लिखे दो अशआर लिखे मिले.आनन फानन में मैंने 5 और अशआर लिखकर यह ग़ज़ल पूरी कर दी. सोचा आप लोगों को पेश भी कर दूं . अर्ज़ किया है - अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 सालों से ढूंढ रहा हूं जिसे मिलता ही नहीं जबकि बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा तुम हो //2 मेरी हस्ती का कोई और नहीं सय्यारा मेरे चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा तुम हो //3 छोड़कर जाओ न इस हाल में तन्हा हमको बूढ़े मां-बाप के जीवन का सहारा तुम हो //4 किसलिए जाऊं मैं दिखलाने शिफ़ागर के पास मेरे हर ग़म का मुदावा मेरे यारा तुम हो //5 आग ने यूँ नहीं लिक्खी है कहानी मेरी मेरी हस्ती के तसव्वुर का शरारा तुम हो //6 तुम हरी सब्ज़ी नहीं हूं जिसे खाऊं हर रोज़ मेरे बाग़-ए-वफ़ा का आलू-बुख़ारा तुम हो //7 'राज़'वो भी नहीं मिलता जो कभी कहता था मेरे हर दुख,मेरे हर दर्द का चारा तुम हो //8 ग़ज़ल के कठिन शब्द एवं शब्दार्थ 1. ज़ीस्त — जीवन, ज़िंदगी 2. तक़दीर — भाग्य, नियति 3. बह्र — समुद्र, सागर 4. बह्र-ए-वफ़ा — वफ़ा का सागर / निष्ठा का समुद्र 5. हस्ती — अस्तित्व, वजूद 6. सय्यारा — ग्रह, आकाश में भ्रमण करने वाला खगोलीय पिंड 7. चर्ख़ — आकाश, आसमान; चक्र 8. चर्ख़-ए-वफ़ा — वफ़ा का आकाश / प्रेम एवं निष्ठा का संसार 9. तन्हा — अकेला, अकेले 10. शिफ़ागर — घाव भरने वाला, उपचारक, चिकित्सक 11. ग़म — दुःख, शोक 12. मुदावा — उपचार, इलाज, निवारण 13. यारा — प्रिय मित्र, प्यारा साथी, प्रेमी 14. तसव्वुर — कल्पना, विचार, चिंतन 15. शरारा — चिंगारी 16. बाग़ — बागीचा, उपवन 17. आलू-बुख़ारा — एक प्रकार का फल; अंग्रेज़ी में Plum कहा जाता है 18. चारा — उपाय, इलाज, समाधान 19. राज़ — रहस्य, भेद; यहाँ शायर का तख़ल्लुस भी है 🌹 संयुक्त पदों के भावार्थ 🔹 बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा — वफ़ा रूपी विशाल सागर के दोनों किनारे अर्थात वफ़ा की पूर्णता एवं उसका समग्र विस्तार। 🔹 मेरी हस्ती का सय्यारा — मेरे अस्तित्व के आकाश का ग्रह अथवा मेरे जीवन-जगत का महत्वपूर्ण केंद्र। 🔹 चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा — प्रेम एवं निष्ठा के आकाश को प्रकाशित करने वाला प्रिय व्यक्ति। 🔹 हस्ती के तसव्वुर का शरारा — मेरे अस्तित्व की कल्पना अथवा चेतना को जन्म देने वाली चिंगारी। 🔹 हर ग़म का मुदावा — प्रत्येक दुःख का उपचार अथवा निवारण। 🔹बाग़-ए-वफ़ा का आलू बुख़ारा तुम हो — वफ़ा अथवा प्रेम और निष्ठा के बगीचा का खट्टा मीठा फल आलू बुख़ारा तुम हो ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ इसी बह्र पर लिखे गये कुछ फ़िल्मी गीत/ग़ज़ल ***************************** रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है पकी मद भरी आँखों को कँवल कहते हैं दिल की आवाज भी सुन मेरे फ़साने पे न जा वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी कोई फरियाद तेरे दिल में छुपी हो जैसे ध्यान देने योग्य बातें- ----------------------- 1. सबसे ऊपर बह्र का नाम लिखें 2. उसके नीचे अरकान के नाम लिखें 3. उसके नीचे मापनी लिखें 4. फिर रदीफ़ और क़ाफ़िया लिखें 5. मतला एवं मक़ता समेत कुल 6 अशआर लिखें 6. अपने प्रत्येक शेर का क्रमांक //1, //2, //3... इस फॉर्मेट में लिखें 7. ग़ज़ल के नीचे अपना नाम लिखें 8. और अंत में, कठिन शब्दों के अर्थ लिखें 9. अंत में अपनी ग़ज़ल की तक़ती'अ करें 10. ख़्याल रहे कि विचार आपके अपने हों, किसी और के नहीं
8:58 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
(no subject) Usko Bhi humse Mohabbat Ho zaroori to Nahin_Saba Akabaraabadi__ उसको भी हमसे मोहब्बत, हो जरूरी तो नहीं ! इश्क़ ही इश्क़ की की़मत हो जरूरी तो नहीं!! اس کو بھی ہم سے محبت ہو ضروری تو نہیں* عشق ہی عشق کی قیمت ہو ضروری تو نہیں** एक दिन आपकी बरहम निगाही देख चुके हैं! रोज एक ताजा़ क़यामत हो ज़रूरी तो नहीं!! ایک دن آپ کی برہم نگہی دیکھ چکے ہیں* روز ایک تازہ قیامت ہو ضروری تو نہیں** मेरी शमओं को हवाओं ने बुझाया होगा ! यह भी उनकी ही शरारत हो ज़रूरी तो नहीं!! میری شمعوں کو ہواؤں نے بجھایا ہوگا* یہ بھی ان کی ہی شرارت ہو ضروری تو نہیں** दोस्ती आपसे लाजि़म है मगर इसके लिए! सारी दुनिया से अदावत हो ज़रूरी तो नहीं!! دوستی آپ سے لازم ہے مگر اس کے لیے* ساری دنیا سے عداوت ہو ضروری تو نہیں** पुरसिश ए हाल को तुम आओगे उस वक्त मुझे! लब हिलाने की भी ताक़त हो ज़रूरी तो नहीं!! پرسش حال کو تم آؤ گے اس وقت مجھے* لب ہلانے کی بھی طاقت ہو ضروری تو نہیں** सैकड़ो दर हैं ज़माने में गदाई के लिए! आप ही का दर ए दौलत हो ज़रूरी तोनहीं!! سینکڑوں در ہیں زمانے میں گدائی کے لیے* آپ ہی کا در دولت ہو ضروری تو نہیں** बाहमी रब्त में रंजिश भी मज़ा देती है! बस मोहब्बत ही मोहब्बत हो ज़रूरी तो नहीं!! باہمی ربط میں رنجش بھی مزہ دیتی ہے* بس محبت ہی محبت ہو ضروری تو نہیں** **** बरहम निगाही__ग़ुस्से भरी नज़रें गदाई_मांगना बाहमी रब्त _आपसी मेल-जोल
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