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Swasti Sansthan
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:54 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Ghazal;- Nasir kazmi (dil mein eak leher si uthi hei abhi) दिल में एक लहर सी उठी है अभी! कोई ताज़ा हवा चली है अभी!! دل میں ایک لہر سی اٹھی ہے اب کوئی تازہ ہوا چلی ہے ابھی کوئی कुछ तो नाजुक मिज़ाज हैं हम भी ! और यह चोट भी नई है अभी!! کچھ تو نازک مزاج ہیں ہم بھی اور یہ چوٹ بھی نئی ہے ابھی शोर बरपा है खा़ना-ए-दिल में! कोई दीवार सी गिरी है अभी!! شور برپا ہے خانہء دل میں کوئی دیوار سی گری ہے ابھی याद के बे निशां जजी़रों से! तेरी आवाज़ आ रही है अभी!! یاد کے بے نشان جزیروں میں تیری تیری آواز آرہی ہے ابھی सो गए लोग उसे हवेली के! कोई खिड़की मगर खुली है अभी!! سو گئے لوگ اس-- حویلی کے کوئی کھڑکی مگر کھلی ہے ابھی भरी दुनिया में जी नहीं लगता ! जाने किस चीज़ की कमी है अभी!! بھری دنیا میں جی-- نہیں لگت جانے کس چیز کی کمی ہے ابھی वक्त़ अच्छा भी आएगा नासिर! ग़म ना कर ज़िन्दगी पड़ी है अभी!! وقت اچھا بھی-- ائے گا ناصر غم نہ کر زندگی پڑی ہے ابھی
8:50 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
मानसिक मजबूती और अटूट शांति के 18 स्वर्णिम नियम (18 Lifestyle Changes for Mental Resilience) क्या आपके पास अच्छी नौकरी, परिवार या सुख-सुविधाएं होते हुए भी रात को बिस्तर पर लेटते ही मन में अनजानी बेचैनी, भविष्य की चिंता या पुरानी बातों का पछतावा बना रहता है? आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में डिप्रेशन, एंग्जाइटी और ओवरथिंकिंग की सबसे बड़ी वजह यह है कि हम अपनी सोच और प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करने के बजाय बाहरी दुनिया, परिस्थितियों और लोगों को बदलने में अपनी ऊर्जा बर्बाद करते हैं। व्यावहारिक मनोविज्ञान पर आधारित ये 18 जीवनशैली बदलाव (Lifestyle Changes) आपके मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत, लचीला और अटूट बना सकते हैं: 1️⃣ नकारात्मक कल्पना का अभ्यास (Negative Visualization - कृतज्ञता की चाबी): दिन में कुछ पलों के लिए यह कल्पना करें कि जो खुशियां, रिश्ते, अच्छी सेहत या नौकरी आज आपके पास हैं, यदि वे कल अचानक न रहें तो कैसा लगेगा? यह अभ्यास उदास होने के लिए नहीं, बल्कि वर्तमान जीवन के प्रति गहरी कृतज्ञता (Gratitude) जगाने के लिए है। जब आप चीज़ों को 'सहज' (Taken for granted) लेना बंद कर देते हैं, तो जीवन के हर छोटे पल में सुकून मिलने लगता है। 2️⃣ नियंत्रण का विभाजन (Dichotomy of Control): जीवन की हर परिस्थिति को दो हिस्सों में बाँटना सीखें: • जो आपके नियंत्रण में हैं: आपकी सोच, आपकी नियत, आपका प्रयास और आपकी प्रतिक्रिया। • जो आपके नियंत्रण से बाहर हैं: दूसरों का व्यवहार, मौसम, अतीत, परिणाम और भविष्य। जो आपके वश में नहीं है, उसकी चिंता छोड़ दें। परिणाम के डर से मुक्त होकर केवल अपने प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करें—यही मानसिक मजबूती का पहला नियम है। 3️⃣ अतीत और वर्तमान की पूर्ण स्वीकार्यता (Acceptance of Reality): जो घटना घट चुकी है या जो पल आपके सामने खड़ा है, उसे ब्रह्मांड की कोई शक्ति नहीं बदल सकती। "काश ऐसा न हुआ होता" कहकर ऊर्जा बर्बाद करने के बजाय घटित हो चुकी सच्चाई को स्वीकार करें और खुद से पूछें: "अब यहाँ से आगे मुझे क्या करना है?" यह एक आदत आपकी 80% मानसिक थकान मिटा सकती है। 4️⃣ स्वैच्छिक असुविधा का अभ्यास (Voluntary Discomfort): लगातार सुख-सुविधाओं में रहने से इंसान मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है। कभी-कभी जानबूझकर खुद को थोड़ा असुविधाजनक स्थिति में डालें—जैसे सादा भोजन करना, कुछ समय के लिए डिजिटल डिवाइसेस से दूरी बनाना या शारीरिक मेहनत करना। इससे आपकी सहनशक्ति (Frustration Tolerance) बढ़ती है और आप विपरीत परिस्थितियों में घबराते नहीं हैं। 5️⃣ दैनिक आत्म-निरीक्षण और रात्रि ऑडिट (Daily Night Self-Audit): रात को सोने से पहले 5 मिनट शांत बैठें और एक निष्पक्ष दर्शक की तरह अपने दिनभर के व्यवहार का अवलोकन करें। खुद से पूछें: "आज मैंने कहाँ अपना आपा खोया? कहाँ समझदारी दिखाई? और कल मैं खुद में क्या सुधार कर सकता हूँ?" खुद को कोसे बिना किया गया यह आत्म-मूल्यांकन आपको हर दिन मानसिक रूप से अधिक परिपक्व बनाता है। 6️⃣ सामाजिक कर्तव्य और मानवीय करुणा (Social Duty & Compassion): मानसिक स्वास्थ्य केवल अकेले में शांत बैठना नहीं है, बल्कि समाज और अपनों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाना भी है। जब आप बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करते हैं और कड़वे स्वभाव वाले लोगों को भी उनकी कमियों के साथ स्वीकार करते हैं, तो आपके भीतर एक स्थायी आंतरिक शांति का निर्माण होता है। 7️⃣ दूसरों के स्वभाव को पूर्व-स्वीकार करना (Managing Social Expectations): दुनिया में हर इंसान आपके अनुसार व्यवहार नहीं करेगा। कुछ लोग स्वभाव से स्वार्थी, चिड़चिड़े या असभ्य हो सकते हैं। जब आप पहले से मानसिक रूप से तैयार रहते हैं कि लोग अपने स्वभाव के अनुसार ही आचरण करेंगे, तो उनके बुरे व्यवहार से आपको अचानक मानसिक झटका नहीं लगता और आपका गुस्सा नियंत्रित रहता है। \ 8️⃣ अपमान और तानों के प्रति तटस्थता (Handling Insults with Grace): किसी व्यक्ति का ताना या आलोचना उसकी अपनी सोच का दर्पण है, आपकी आत्म-कीमत (Self-Worth) का प्रमाण नहीं। यदि कोई आपको मूर्ख कहे, तो उससे आपकी बुद्धि कम नहीं हो जाती। अपमान का जवाब गुस्से से देने के बजाय हल्की मुस्कान, हास्य या शांत तटस्थता से दें। अपनी मानसिक शांति की चाबी दूसरों के हाथों में न सौंपें। 9️⃣ दुख और शोक का स्वस्थ प्रसंस्करण (Healthy Grief Processing): जीवन में किसी प्रियजन के जाने या बड़े नुकसान पर दुख होना स्वाभाविक है। भावनाओं को पत्थर की तरह दबाना गलत है। दुख को महसूस करें, लेकिन खोए हुए व्यक्ति के साथ बिताए हसीन पलों के प्रति आभारी होना सीखें। दुख में हमेशा के लिए खो जाने के बजाय आंसुओं के साथ धीरे-धीरे जीवन की ओर वापस लौटें। 🔟 क्रोध पर विराम की तकनीक (10-Second Pause for Anger Management): क्रोध अक्सर हमारी अनियंत्रित अपेक्षाओं से पैदा होता है। जब भी आपको गुस्सा आए, तुरंत प्रतिक्रिया न दें। कम से कम 10 सेकंड का विराम (Pause) लें, गहरी साँस लें और खुद से पूछें: "क्या मेरी प्रतिक्रिया स्थिति को सुधारेगी या बिगाड़ेगी?" यह छोटा सा विराम आपको जीवनभर के पछतावे से बचा सकता है। 1️⃣1️⃣ बाहरी वैलीडेशन और लाइक्स की होड़ से मुक्ति (Detaching from External Validation): यदि आपकी खुशी दूसरों की तारीफ, सोशल मीडिया के लाइक्स या बाहरी प्रसिद्धि पर टिका है, तो आपका मन हमेशा अस्थिर रहेगा। काम इसलिए बेहतर करें क्योंकि वह सही है, न कि इसलिए कि लोग आपकी वाहवाही करें। जब आपका मूल्य आपके अपने चरित्र से तय होता है, तो एक अद्भुत मानसिक स्वतंत्रता मिलती है। 1️⃣2️⃣ धन और सुख-सुविधाओं के साथ संतुलित संबंध (Balanced Relationship with Wealth): धन और भौतिक सुख-सुविधाएं जीवन को आसान बनाती हैं और बुरी नहीं हैं, लेकिन उनका गुलाम बनना घातक है। यह याद रखें कि सच्ची खुशी महंगी चीज़ों के ढेर में नहीं, बल्कि न्यूनतम इच्छाओं में होती है। धन का आनंद लें, लेकिन उसे अपनी खुशी का मालिक न बनने दें। 1️⃣3️⃣ बदलाव और नई परिस्थितियों में अनुकूलन (Adaptability to Change): स्थान, नौकरी, शहर या रिश्ते बदलने पर यह न समझें कि जीवन खत्म हो गया है। आपका चरित्र, बुद्धिमत्ता और आंतरिक शांति आपके भीतर है, किसी कमरे या शहर में बंद नहीं। जब परिस्थितियां बदलें, तो समझें कि जीवन का एक नया और बेहतर अध्याय शुरू हुआ है। 1️⃣4️⃣ उम्र बढ़ने और शारीरिक बदलावों को सहर्ष अपनाना (Graceful Aging): उम्र बढ़ना कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन की एक स्वाभाविक और खूबसूरत यात्रा है। झुर्रियों या शारीरिक ऊर्जा में कमी से डरने के बजाय ढलती उम्र के साथ आने वाले अनुभव, समझ और मानसिक गहराई का सम्मान करें। 1️⃣5️⃣ मृत्यु की चेतना से जीवन को जीवंत बनाना (Memento Mori): यह याद रखना कि हमारा समय इस धरती पर सीमित है, डर पैदा करने के लिए नहीं बल्कि वर्तमान क्षण की कीमत समझाने के लिए है। जब आप यह जानते हैं कि समय सीमित है, तो आप अनर्गल विवादों और नफरत को छोड़कर अपनों को प्यार देने और सकारात्मक काम करने में एक पल भी गँवाते नहीं हैं। 1️⃣6️⃣ लगातार अभ्यास और उपहास की परवाह न करना (Consistency & Resilience): मानसिक मजबूती रातों-रात नहीं मिलती, यह एक दैनिक अभ्यास है। जब आप अपनी जीवनशैली और सोच बदलेंगे, तो कुछ लोग आपका मज़ाक भी उड़ा सकते हैं। दूसरों की मंज़ूरी की परवाह किए बिना अपने मानसिक स्वास्थ्य के मार्ग पर अडिग रहें। 1️⃣7️⃣ उपभोक्तावाद की अंधी दौड़ से दूरी (Breaking the Consumerist Loop): एक इच्छा पूरी होते ही अगली चीज़ के पीछे भागना (Hedonic Treadmill) इंसान को मानसिक रूप से थका देता है। लगातार नई चीज़ें खरीदने की अंधी दौड़ से खुद को अलग करें और जो आपके पास है, उसमें संतोष (Contentment) तलाशें। 1️⃣8️⃣ ज्ञान को जीवन में उतारना (Actionable Psychological Practice): केवल बातें पढ़ने या सुनने से मानसिक स्वास्थ्य ठीक नहीं होता। जिस तरह डॉक्टर की दवा को रोज़ नियमित रूप से खाना पड़ता है, उसी तरह इन सिद्धांतों को अपने रोज़मर्रा के फैसलों में लागू करें। आपकी प्रतिक्रिया चुनने की स्वतंत्रता ही मानसिक स्वास्थ्य की असली कुंजी है। "आप हमेशा यह तय नहीं कर सकते कि ज़िंदगी आपके सामने क्या परिस्थितियाँ लाएगी, लेकिन आप यह ज़रूर तय कर सकते हैं कि उन परिस्थितियों के सामने आप कौन बनकर खड़े होंगे।"
8:47 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
शर्म (Shame), अपराध बोध (Guilt) और पछतावे (Regret) से कैसे उबरें? — एक मानसिक स्वास्थ्य दृष्टिकोण नमस्कार दोस्तों, अपने नैदानिक अनुभव (Clinical Experience) में मैंने देखा है कि इंसान को सबसे ज़्यादा मानसिक पीड़ा दूसरों से नहीं, बल्कि अपने ही अंदर छुपे तीन भावों से मिलती है— अपराध बोध (Guilt), शर्मिंदगी/हीन भावना (Shame), और पछतावा (Regret)। ये तीनों भावनाएं हमारे आत्म-सम्मान, रिश्तों और मानसिक शांति को पूरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं। लेकिन अगर हम इन्हें सही ढंग से समझें, तो हम खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ और हल्का बना सकते हैं। आइए आज इसे गहराई से समझें: 1. तीनों के बीच का अंतर समझना बहुत ज़रूरी है: अपराध बोध (Guilt): यह सोच कि "मैंने एक गलती की है" (I made a mistake)। यह एक असहज भावना ज़रूर है, लेकिन यह बुरी नहीं है। यह हमें अपनी गलती सुधारने और सही कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। शर्मिंदगी / हीन भावना (Shame): यह सोच कि "मैं ही गलत/बेकार हूँ" (I am a mistake)। यह बहुत ही ज़हरीली (Toxic) भावना है। जब व्यक्ति शर्म में होता है, तो उसे लगता है कि वह सुधर ही नहीं सकता और यदि लोग उसकी असलियत जान गए, तो उसे ठुकरा देंगे। यह इंसान को अंदर से तोड़ देती है। पछतावा (Regret): यह सोच कि "काश! मैंने उस समय कुछ अलग किया होता।" पछतावे का सबसे बड़ा ख़तरा यह है कि इंसान अतीत की बातों को बार-बार सोचकर (Rumination / मानसिक जुगाली) खुद को लगातार सज़ा देता रहता है। 2. खुद से पूछें यह एक मूल प्रश्न: "क्या वास्तव में मैंने कुछ गलत किया है?" जब भी मन में ग्लानि या शर्म महसूस हो, तो शांति से बैठें और खुद से यह सवाल पूछें। यहाँ से दो स्थितियाँ बनती हैं: स्थिति A: जवाब है "नहीं, मैंने कुछ गलत नहीं किया" (झूठी शर्म/False Shame) विशेष रूप से किसी ट्रॉमा, दुर्घटना या कड़वे अनुभवों (जैसे बाल शोषण, घरेलू हिंसा या धोखाधड़ी) के शिकार लोग अक्सर खुद को ही दोषी मानने लगते हैं। हमारा दिमाग अत्यधिक तनाव में खुद को ही दोषी ठहराने की गलत आदत बना लेता है। एक आसान उपाय: एक कागज़ लें, बीच में रेखा खींचें। एक तरफ लिखें "मेरे काम/फैसले" और दूसरी तरफ लिखें "सामने वाले के काम/फैसले"। कागज़ को बीच से फाड़ दें! याद रखें, आप केवल अपनी पसंद और फैसलों के लिए ज़िम्मेदार हैं, किसी दूसरे व्यक्ति के गलत आचरण, अपराध या व्यवहार के लिए नहीं। जब आप यह स्पष्टता लाते हैं, तो झूठी शर्म अपने आप खत्म हो जाती है। स्थिति B: जवाब है "हाँ, मुझसे गलती हुई है" (वास्तविक गलती) जब आपसे वास्तव में कोई गलती हुई हो, तो आपके पास दो रास्ते होते हैं: 1. भागना और छुपना (जो ज़हरीली शर्म को बढ़ाता है): अपनी गलती का दोष दूसरों पर मढ़ना, बहाने बनाना, नशे या स्क्रीन्स में खुद को भटकाना। खुद पर यह लेबल लगा लेना कि "मैं तो हूँ ही बेकार/टूटा हुआ, मुझसे कुछ ठीक नहीं हो सकता।" यह खुद को ज़िम्मेदारी से बचाने का एक आसान लेकिन बहुत हानिकारक रास्ता है। 2. सामना करना और सुधार करना (Healing & Repairing): यही असली मानसिक स्वास्थ्य और आत्म-सुधार का मार्ग है। 3. गलती सुधारने (Repairing) के 6 मुख्य कदम: अगर आपसे कोई गलती हुई है, तो केवल पछताने के बजाय इन 6 चरणों को अपनाएं: 1. जवाबदेही (Accountability): बिना बहाने बनाए ईमानदारी से स्वीकार करें कि "हाँ, मुझसे गलती हुई है।" 2. सहानुभूति (Empathy): यह महसूस करने की कोशिश करें कि आपके व्यवहार से सामने वाले पर क्या असर पड़ा और उसे कितना दुख पहुँचा। 3. सुनना (Listen): सामने वाले के दर्द और उसकी भावनाओं को बिना अपनी सफाई दिए ध्यान से सुनें। 4. हर्जाना/सुधार करना (Make Repairs): स्थिति को ठीक करने के लिए जो संभव हो, वह व्यावहारिक कदम उठाएं। 5. सीखना (Learn): विचार करें कि आपसे कहाँ चूक हुई और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको कौन से जीवन-कौशल (Life Skills) सीखने की ज़रूरत है। 6. दोहराने से बचना (Prevent Repetition): केवल मन में संकल्प न लें, बल्कि अभ्यास और समझ से अपने व्यवहार में बदलाव लाएं। 4. पुराने पछतावे (Regret) को वर्तमान की ताकत बनाएं अतीत की बातों को मन में बार-बार दोहराने से कुछ नहीं बदलता। यदि कोई बात बहुत पुरानी हो चुकी है या आप सीधे उस व्यक्ति से सुधार नहीं कर सकते, तो आज वर्तमान में अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं: अपने आज के व्यवहार को बेहतर बनाएं। यदि अपनों का दिल दुखाया है, तो बहाने बनाने की जगह ईमानदारी से माफी मांगें और आज उनके साथ प्रेम व सहानुभूति का व्यवहार करें। स्वयं को बदलने के लिए थेरेपी या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ का सहारा लें। 5. शर्म अँधेरे में पनपती है, उजाले में मिट जाती है शर्म (Shame) काली फफूंद की तरह होती है जो अँधेरे और अलगाव में बढ़ती है। जितना आप अपनी कमियों और गलतियों को छुपाएंगे, उतना ही यह आपको अंदर से खोखला करेगी। लेकिन जब आप किसी विश्वसनीय व्यक्ति, थेरेपिस्ट या प्रियजन के सामने ईमानदारी से अपनी बात रखते हैं और सुधार का प्रयास करते हैं, तो शर्म का असर खत्म हो जाता है। इंसान का स्वभाव ईमानदारी और सच्चे प्रायश्चित के प्रति बहुत दयालु होता है। अंतिम संदेश: इंसान होने के नाते हम सभी से गलतियाँ होती हैं। कोई भी इंसान परिपूर्ण नहीं है। लेकिन अपनी गलतियों को अपनी पहचान (Identity) मत बनने दीजिए। गलतियों को सुधारने का प्रयास करें, ज़िम्मेदारी लें और खुद को तथा दूसरों को ठीक होने का समय दें। यदि आप या आपका कोई प्रियजन अतीत के तनाव, शर्मिंदगी या अपराध बोध से बाहर नहीं निकल पा रहा है, तो किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर से परामर्श लेने में संकोच न करें। स्वास्थ्य और मानसिक शांति की शुभकामनाओं के साथ,
8:36 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
एक स्त्री वह औरत है जिसे बाकायदा हर महीने माहवारी आती है। वहीं माहवारी जिसको स्त्री अपने 14 साल के उम्र से हर महीने बर्दाश्त करती है। यह माहवारी उनका चॉइस नहीं होता। यह तो कुदरत का दिया हुआ एक वरदान होता है। वहीं माहवारी जिसमे पूरा शरीर अकड़ जाता है। कमर टूटने लगती है। पेट का दर्द असहनीय होता है। और मानसिक तनाव इतना की सामान्य दिनों में सिर्फ सोच कर ही सिहरन पैदा हो जाती है। हर महीने के माहवारी के दर्द को बर्दाश्त कर अपने आप को अगले महीने के लिए फिर से दर्द सहने के लिए तैयार कर लेना किसी जंग जितने से कम नहीं। हर महीने ना जाने कितने वर्षों तक ये जंग हर महीने जीतती है स्त्री। तब जाके किसी पुरुष के चेहरे की लालिमा बढ़ती है, तब जाके कोई परिवार चहकता है। और तब किसी के वंश की वृद्धि होती है। अरे एक लड़की तो अपने 14 वर्ष की उम्र से ही किसी की बहू किसी की पत्नी बनने कि मोल चुकाती है, हर महीने दर्द सहकर, ताकि किसी दिन वो वंश की वृद्धि की गौरव बन सके। गर्भधारण के बाद 3-4 महीने तो अपने आप से ही परेशान। मूड स्विंग, उल्टी, थकान, मानसिक तनाव, और कमर दर्द तो हिस्सा बनने लगता है जिंदगी का। बढ़ते महीने के साथ उस खुद को उस इंजेक्शन के लिए भी तैयार करना पड़ता है जिसे देखकर ही कभी घर में छुप जाया करती थी। और जब बारी आती है बच्चे को जन्म देने की तो वाहा भी असहनीय दर्द से होकर गुजरती है। 9 महीने तक शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती है खुद को, परम्परा को आगे बढाने के लिए। प्रसव पीड़ा 6-8 घंटे। और कभी कभी तो 2- 3 दिन तक। अगर फिर भी नॉर्मल डिलीवरी संभव ना हो तो गर्भ चिर के भी बच्चे को बाहर लाने कि हिम्मत रखती है। शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स और ऑपरेशन के निशान तक ताउम्र ढोने को तैयार हो जाती है। जो चेहरे पर एक पिंपल आ जाने से पूरा घर सिर पर उठा लेती थी। एक स्त्री की मनोदशा एक पुरुष कभी नहीं समझ सकता। और जो अपनी पत्नी की ये मनोदशा भर बस समझ ले तो वो भगवान का ही रूप होता है। लड़कों के कंधा से कंधा मिलाकर चलना बहुत आसान है। पर लड़कियों की बराबरी कर पाना उतना ही मुश्किल। हर महीने खून पानी की तरह बहाना पड़ता है एक स्त्री होने के लिए। हर दर्द को हस्ते हुए सहना पड़ता है एक स्त्री होने के लिए।
7:18 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Ghazal by Rahat Indori महान शायर और कवि राहत इंदौरी साहब को उनकी DEATH- ANNIVERSARY पर दिली खिराज़ -ए -अक़ीदत और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं 💐पेश है उनकी एक खूबसूरत ग़ज़ल... 🥀🥀 🥀हाथ ख़ाली हैं तिरे शहर से जाते जाते जान होती तो मिरी जान लुटाते जाते 🥀अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते 🥀अब के मायूस हुआ यारों को रुख़्सत कर के जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते 🥀रेंगने की भी इजाज़त नहीं हम को वर्ना हम जिधर जाते नए फूल खिलाते जाते 🥀मैं तो जलते हुए सहराओं का इक पत्थर था तुम तो दरिया थे मिरी प्यास बुझाते जाते 🥀मुझ को रोने का सलीक़ा भी नहीं है शायद लोग हँसते हैं मुझे देख के आते जाते 🥀हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते..!!🌹🌹 -राहत इंदौरी साहब 💐
7:17 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Rahat Indori Sahab (wo shayar....)
Pavan Kumar Sharma
8:44 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
!! 8 से 11 ब्रिगेड !! आपके बीच समझदार ने एक जिज्ञासु घटना देखी होगी । हर सुबह, लगभग 8 से 11 बजे के बीच, सेवानिवृत्त कर्मियों का हर व्हाट्सएप ग्रुप अचानक जीवन के लिए स्प्रिंग्स । संदेश तोपखाने के गोले से अधिक मोटे उड़ते हैं । गुड मॉर्निंग, राय, ब्रेकिंग न्यूज, चुटकुले, सैन्य विश्लेषण, राजनीतिक समाधान, स्वास्थ्य सलाह, निवेश युक्तियाँ, क्रिकेट चयन, व्यंजनों । .. कुछ भी नहीं बख्शा है । महीनों के गहन शोध के बाद, मेरा मानना है कि मैंने इस अनूठी घटना के कारण की खोज की है - यह ठीक वह समय है जब नौकरानियां हर घर में पहुंचती हैं । पत्नियां तुरंत नौकरानियों की देखरेख करने और तेजी से आग लगाने के निर्देश जारी करने पर कब्जा कर लेती हैं । सेवानिवृत्त पति, जिसका उस समय सबसे बड़ा योगदान हर किसी के रास्ते में हो रहा है, चतुराई से लेकिन दृढ़ता से बरामदे, बालकनी, बगीचे या घर के किसी दूरस्थ अस्पष्ट कोने में स्थानांतरित हो जाता है । उसके लिए अनिर्दिष्ट निर्देश स्पष्ट हैं, " रास्ते से बाहर रहें और हस्तक्षेप न करें । " इस प्रकार सेवानिवृत्त व्हाट्सएप योद्धा की दैनिक तैनाती शुरू होती है । एक स्मार्टफोन के साथ सशस्त्र, चश्मा पढ़ना और असीमित आत्मविश्वास, वह नाश्ते से पहले देश की समस्याओं को हल करने के लिए आगे बढ़ता है । हर विषय उनकी विशेषज्ञ राय की मांग करता है, चाहे वह भू-राजनीति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शेयर बाजार, जलवायु परिवर्तन, सैन्य रणनीति, क्रिकेट, पोषण या पेंगुइन की संभोग की आदतें हों । विशेषज्ञता पूरी तरह से वैकल्पिक है; आत्मविश्वास अनिवार्य है । कुछ योद्धा एक समूह के अंदर लंबे समय तक एक-से-एक बातचीत करते हैं, इस बात से अनजान हैं कि अन्य 200 सदस्य अनिच्छुक दर्शक हैं । अन्य लुभावनी गति के साथ संदेश अग्रेषित करते हैं । सत्यापन को एक अनावश्यक मयूर विलासिता माना जाता है । यदि यह "बहुत विश्वसनीय स्रोत से प्राप्त" से शुरू होता है । .."यह स्पष्ट रूप से सच होना चाहिए । इस मौके पर स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. और स्वर्ग समूह की मदद करता है अगर कोई विवादास्पद विषय पोस्ट करता है । कुछ ही मिनटों में सेवानिवृत्त बिरादरी संवैधानिक विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों, राजनयिकों और रणनीतिक विचारकों में बदल जाती है । फिर, लगभग जादुई रूप से, लगभग 11 बजे, मौन उतरता है । नौकरानी चली गई है । पत्
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