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साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना (Ghazal)

आफताब मुज़तर एहद ए हाजि़र के शायर साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना साहिल पर खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना! मैं डूब रहा हूं अभी डूबा ___तो नहीं हूं!! ساحل پہ کھڑے ہوں تمہیں کیا غم چلے جانا میں ڈوب رہا ہوں ابھی ڈوبا تو نہیں ہوں ऐ वादा फरामोश मैं तुझसे तो नहीं हूं! हर ज़ुल्म तेरा याद है __भुला तो नहीं हूं!! اے وعدہ فراموش میں تجھ سا تو نہیں ہوں ہر ظلم تیرا یاد ہے__ بھولا تو نہیں ہوں ऐ वक़्त मिटाना मुझे __आसां तो नहीं है! इंसान हूं मैं नक़्श ए कफ़ ए पा तो नहीं हूं !! اے وقت مٹانا مجھے آساں تو نہیں ہے انسان ہوں میں نقش کف پا تو نہیں ہوں चुपचाप सही मसलहतन ___वक़्त के हाथों! मजबूर सही वक़्त से हारा तो नहीं हूं!! چپ چاپ سہی مصلحتا وقت کے ہاتھوں مجبور ںسہی وقت سے__ ہارا تو نہیں ہوں दिल तोड़ा है अपनों ने तो शिकवा ना करेंगे! वह भूल गए मुझको मैं __भूला तो नहीं हूं!! دل توڑا ہے اپنوں نے تو شکوہ نہ کریں گے وہ بھول گئے مجھ کو میں بھولا تو نہیں ہوں मुज़तर मुझे क्यों देखता रहता है ज़माना! दीवाना सही उनका तमाशा तो नहीं हूं!! وہ بھول گئے مجھ کو مضطر مجھے کیوں دیکھتا رہتا ہے زمانہ دیوانہ سہی ان کا تماشہ تو نہیں ہوں

ghazal

🥀जब खि़ज़ां आए तो पत्ते ना शजर बचता है! 🥀जब खि़जां आए तो पेत्ते ना शजर बचता है! ख़ाली झोली लिए वीरान शजर बचता है!! جب خزاں ائے تو پتے نہ شجر بچتا ہے* خالی جھولی لیے ویران شجر بچتا ہے** 🥀नुक्ता चीं शौक़ से दिन रात मेरे ऐब निकाल! क्योंकि जब है ऐब निकल जाएं हुनर बचता है!! نکتہ چین شوق سے دن رات میرے عیب نکال* کیونکہ جب عیب نکل جائے ہنر بچتا ہے**

भृंगी ऋषि सबमें शक्ति है ऊर्जा है वो स्त्रियों से ही आता है इसीलिए स्त्रियां शक्ति का प्रतीक मानी गई है।

आपने भृंगी ऋषि के बारे में सुना होगा। भृंगी ऋषि जो थे वो केवल शिव को पूजना चाहते थे माता पार्वती को नही आपने यह भी पढ़ा होगा जब भृंगी ऋषि शिव की पूजा करने गए तो केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर रहे थे । हमारे ऋषि बताते है जब यह माता पार्वती देखती है कि भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की परिक्रमा कर है तो माता पार्वती भगवान शिव के थोड़ा करीब आकर बैठ जाती है उन दोनों के बीच मात्र थोड़ी सी जगह बचती है फिर जब भृंगी अपने आप आपको एक पतले सांप में बदल लेते है और शिव और पार्वती के बीच जो थोड़ी जगह बची होती है वो उसके बीच केवल शिव की परिक्रमा करने लगते है। जब यह माता पार्वती देखती है माता पार्वती भगवान शिव से मिल जाती है और आधा पुरुष और आधा नारी का रूप बन जाता है। फिर भी भृंगी अपने सरीर को एक सूक्ष्म जीव का आकार लेकर शिव के शरीर के आधे भाग के अंदर से घुसकर परिक्रमा करना चाहते है। तो यहाँ पर माता पार्वती कहती है जब ये मान नही रहा है तो इससे मैं वह सब वापिस ले लेती हूं जो इसके पास मेरी वजह से है और आप कथा में सुने होंगे जैसे माता पार्वती अपना सब कुछ भृंगी ऋषि के शरीर से लेती है भृंगी ऋषि के सरीर में केवल हड्डियों का ढांचा बचता है वो भी कुछ मात्रा में ही बाकी उनके सरीर के सभी मांस रक्त और सब कुछ गायब हो जाता है केवल सरीर का ढांचा ही बचता है। 1980 से 1990 तक वैज्ञानिकों ने यह पता कर लिया था कि शरीर में जीन होते हैं जेनेटिक होते हैं डीएनए होते हैं और एक बच्चे में उसके माँ और बाप दोनों के आधे आधे जीन आते हैं कहीं पे उसके माँ के जीन कहीं पे उसके पिता के जीन लेकिन 1980 में वैज्ञानिकों को एक हैरान कर देने वाली एक अजीब चीज पता चली कि हमारी जो पूरी बॉडी है ये छोटे छोटे सेल्स से बनी हुई है और अपने जीव विज्ञान में पढ़ा होगा कि उस छोटे सेल्स को जो ऊर्जा देता है वो होता है माइटोकॉन्ड्रिया जिसे पावर हाउस भी बोलते है। अब वो जो माइटोकॉन्ड्रिया हमारी बॉडी में होते है उनका जो 100% डीएनए आता है हमेशा वो आता है माँ से यानी फीमेल से। यानी हमारी बॉडी का जो पावर हाउस है जो हमारे सरीर के सेल्स को ऊर्जा देता है उसका डीएनए पिता से आता ही नही वह आता है केवल माता से। ये बेसिक लेवल पर है उसके बाद जो हम भोजन या प्रकृति से ऊर्जा लेते है वो तभी ले पाते है क्योंकि उसके पहले हमारे सरीर का पावरहाउस सेल्स को ऊर्जा देता है फिर वो सेल्स भोजन से ऊर्जा लेने लायक बन पाते है। अगर वो एनर्जी हमारे सरीर के सेल्स को ना मिले तो हमारे सरीर में जो खून मांस सब कुछ है वो सब नष्ट हो जाएगा जैसे इंसान के मरने के बाद केवल इंसान में केवल हड्डियों का ढांचा बच जाता है और सब कुछ गायब हो जाता है हड्डियाँ इसलिए भी बच जाती है क्योंकि वो मात्र ढांचा होता है। इसीलिए हमारे ऋषियों ने माता पार्वती को शक्ति या ऊर्जा बताया है पूरे ब्रह्मांड को और साथ मे सभी स्त्रियों को भी शक्ति या ऊर्जा बताया है इसीलिए आप सनातन धर्म मे तमाम देवियों के शक्तिपीठ भी देखते होंगे। क्योंकि हमारे ऋषियों मुनियों को वैज्ञानिकों और टेक्नोलॉजी से पहले पता था जो सबमें शक्ति है ऊर्जा है वो स्त्रियों से ही आता है इसीलिए स्त्रियां शक्ति का प्रतीक मानी गई है। अगर आपके ही सरीर से आपकी माँ के द्वारा गर्भ में मिला हुआ वो माइटोकॉन्ड्रिया यानी पावर हाउस आपके सरीर से किसी तरह निकाल दिया जाए तो आपके शरीर मे केवल हड्डियों का ढांचा मात्र बचेगा आपके सरीर से आपकी चमड़ी से लेकर मांस खून सब कुछ गायब हो जाएगा। ऋषि भृंगी की कहानी के माध्यम से हमारे ऋषियों ने हमे बहुत ही सूक्ष्म विज्ञान समझाया था। सनातन धर्म मे जो जो लाइन लिखी है वह सब एक रहस्य है यदि वो जिसको काल्पनिक लगती है इसका मतलब अभी उसके दिमाग का उतना विकास नही हो पाया है

सहूलियत(कवित)

सहूलियत नहीं होती क्रांति कविता से न ही दूर होता है कदाचार न ही थमती है निरंकुशता सरकार की न ही कमी आती है किंचित्‌ भी विशेषाधिकारियों के विशेषाधिकार में और आम आदमी की आम दिक़्क़त में. कुछ भी नहीं होता जो चाहती है कविता पाठक बस धन्य करता है पढ़कर कविता को और कवि को भी. कविता का पाठक बस पाठक होता है नहीं उतरता वह किसी दिव्य लोक से हो सकता है वह भी विशेषाधिकारों से लैस निरंकुश सरकार का निरंकुश कारिंदा आम आदमी की दिक़्क़तों का जनक शोषण और लफंगई में मुब्तला भी हो सकता है पाठक. लेकिन कुछ भी होने से पहले ‘दुनियादार’ होता है पाठक कवि से ज़्यादा होशियार होता है पाठक और लग जाता है ‘धंधे’ में तुरंत धन्य करने के बाद कवि और कविता को. पता नहीं, जिस आदमी की लड़ाई लड़ती है कविता पढ़ना मयस्सर भी है उसे कविता उसके लिए तो ज़ंग लगा औज़ार है कविता. उसका कर्ज़ अदा नहीं करती कविता उसकी बेटी की शादी नहीं कराती कविता बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च भी नहीं उठाती कविता बस क्रांति और आम आदमी की बात करती है कविता. कवि लिखता है फिर भी कविता कर लेता है क्रांति वह कविता में ही फिर रहता है मगन सफलता के नशे में क्रांति कर पाने की नहीं, कविता लिख पाने की. ख़ुश होता है लिखकर हर बार एक कविता और भी ख़ुश होता है पाकर सम्मान, पुरस्कार बढ़ जाती है हैसियत उसकी दुनिया में हो जाती है थोड़ी सहूलियत खड़े होने में ‘विशिष्ट’ लोगों की कतार में जिसके लिए दरअसल उसने लिखनी शुरू की थी कविता. ……………..

'ऑप्टोजेनेटिक्स'

चिकित्सा के लिए 2026 का नोबेल पुरस्कार कार्ल डाइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को "लाइट-गेटेड आयन चैनल और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी उनकी खोजों के लिए" दिया गया है। चिकित्सा में 2026 का नोबेल पुरस्कार 'ऑप्टोजेनेटिक्स' के लिए दिया गया है — यह एक ऐसी तकनीक है जिससे यह पता लगाना संभव हो गया है कि जीवित मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं (nerve cells) यादों, भावनाओं और व्यवहारों को कैसे आकार देती हैं। पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल ने एक कोशिकीय शैवाल (single-celled alga) में 'चैनलरोडोप्सिन' (channelrhodopsin) नामक एक अद्भुत प्रोटीन की खोज की। कार्ल डेइसेरोथ ने इस प्रोटीन को तंत्रिका कोशिकाओं के लिए प्रकाश-नियंत्रित स्विच में बदल दिया। इन पुरस्कार विजेताओं ने न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में एक नए युग की नींव रखी है। करोलिंस्का इंस्टीट्यूट में नोबेल असेंबली ने प्रकाश-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स से संबंधित उनकी खोजों के लिए कार्ल डिसेरोथ, पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल को फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2026 नोबेल पुरस्कार देने का फैसला किया है । ” ऑप्टोजेनेटिक्स के लिए प्रदान किया जाता है – एक ऐसी विधि जो यह दिखाना संभव बनाती है कि तंत्रिका कोशिकाएं जीवित मस्तिष्क में यादों, भावनाओं और व्यवहारों को कैसे आकार देती हैं । पीटर हेगमैन और जॉर्ज नागेल ने एक एकल कोशिका वाले शैवाल में एक उल्लेखनीय प्रोटीन, चैनलरोडोप्सिन की खोज की । कार्ल डिसेरोथ ने प्रोटीन को तंत्रिका कोशिकाओं के लिए एक प्रकाश-नियंत्रित स्विच में बदल दिया । लॉरेट्स ने तंत्रिका विज्ञान में एक नए युग की नींव रखी है । ऑप्टोजेनेटिक्स का उपयोग करते हुए, शोधकर्ता तंत्रिका संबंधी और मानसिक विकारों के लिए प्रासंगिक विशिष्ट यादों, भावनाओं और व्यवहारों को नियंत्रित करने वाले तंत्रिका सर्किट को प्रकट करने में सक्षम हैं । नैदानिक चिकित्सा में, शोधकर्ता दृश्य हानि वाले लोगों में दृष्टि को बहाल करने के प्रयासों में विधि का उपयोग कर रहे हैं । ऑप्टोजेनेटिक्स ने मस्तिष्क की हमारी समझ को मौलिक रूप से बदल दिया है । हर दिन नई खोज लाता है, मानवता के महान रहस्यों में से एक को हल करने में मदद करता है: हमारा अविश्वसनीय मस्तिष्क कैसे काम करता है ।

उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी

उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिरानेवाली है। मोर करेंगे नाच, गीत कोयल सुहाग के गायेगी ; लता विटप मंडप-वितान से वंदनवार सजायेगी! जीव-जन्तु भर गए खुशी से, वन की पाँत-पाँत डोली, इतने में जल के भीतर से एक वृद्ध मछली बोली :- ‘‘सावधान जलचरो, खुशी में सबके साथ नहीं फूलो, ब्याह सूर्य का ठीक, मगर, तुम इतनी बात नहीं भूलो :- "एक सूर्य के ही मारे हम विपद कौन कम सहते हैं, गर्मी भर सारे जलवासी छटपट करते रहते हैं ! "अगर सूर्य ने ब्याह किया, दस-पाँच पुत्र जन्मायेगा, सोचो, तब उतने सूर्यों का ताप कौन सह पाएगा ? "अच्छा है, सूरज क्वाँरा है, वंशविहीन, अकेला है, इस प्रचंड का ब्याह जगत की खातिर बड़ा झमेला है।’’

(Ghazal) साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना

आफताब मुज़तर एहद ए हाजि़र के शायर साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या ग़म चले जाना ाहिल पर खड़े सहो तुम्हें क्या ग़म चले जाना! मैं डूब रहा हूं अभी डूबा तो नहीं हूं!! ساحل پہ کھڑے ہوں تمہیں کیا غم چلے جانا میں ڈوب رہا ہوں ابھی ڈوبا تو نہیں ہوں ऐ वादा फरामोश मैं तुझसे तो नहीं हूं! हर ज़ुल्म तेरा याद है भुला तो नहीं हूं!! اے وعدہ فراموش میں تجھ سا تو نہیں ہوں ہر ظلم تیرا یاد ہ بھولا تو نہیں ہوں ऐ वक़्त मिटाना मुझे आसां तो नहीं है! इंसान हूं मैं नक़्श ए कफ़ ए पा तो नहीं हूं !! اے وقت مٹانا مجھے آساں تو نہیں ہے انسان ہوں میں نقش کف پا تو نہیں ہوں चुपचाप सही मसलहतन वक़्त के हाथों! मजबूर सही वक़्त से हारा तो नहीं हूं!! چپ چاپ سہی مصلحتا وقت کے ہاتھوں مجبور ںسہی وقت سا تو نہیں ہوں दिल तोड़ा है अपनों ने तो शिकवा ना करेंगे! वह भूल गए मुझको मैं हीं हूं!! دل توڑا ہے اپنوں نے تو شکوہ نہ کریں گے وہ بھول گئے مجھ کو میں بھولا تو نہیں ہوں मुज़तर मुझे क्यों देखता रहता है ज़माना! दीवाना सही उनका तमाशा तो नहीं हूं!! وہ بھول گئے مجھ کو مضطر مجھے کیوں دیکھتا رہتا ہے زمانہ دیوانہ سہی ان کا تماشہ تو نہیں ہوں

Rasleela Nathdwara Style | Twin Eternals - Matter & Energy

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