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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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9:24 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
अनासक्त स्वधर्म पालन क्रमशः श्लोक ११ यज्ञों से तुम करो प्रसन्न देव को देव करेंगे तुमको उन्नत । एक दूसरे को उन्नत कर सबका होगा कल्याण परम ॥११/अध्याय ३ ॥ स्वधर्म और देवताओं की सम्बन्ध श्रंखला : निष्काम भाव से स्वधर्म पालन के रूप में किये कर्म लोक-संग्रह का कारण बनते हैं । इस प्रकार देवताओं के रूप में न केवल प्रकृति के अंश पाँच महत् तत्व अपितु शरीर की सभी इन्द्रियों में भी देवताओं का वास सनातन हिंदू परंपरा को मान्य है और उन्हीं दैवी शक्तियों की उन्नति की बात श्लोक में कही गई है ॥ कर्मक्षेत्रे-रणक्षेत्रे : श्रीकृष्ण गीता से
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