अभ्यास के लिए तरही मिसरा/शेर --------------------------------- है 'ग़ालिब' की ये बज़्म-ए-नज़्म-गोई यहाँ मो'जिज़-बयानी चल रही है //4 तक़ती'अ- है 'ग़ालिब' की/ ये बज़्म-ए-नज़्/म-गोई यहाँ मो'जिज़/-बयानी चल/ रही है //4 मापनी- 1222-1222-122 अरकान- मुफ़ाईलुन-मुफ़ाईलुन-फ़ऊलुन बह्र- बह्र-ए-हज़ज मुसद्दस महजूफ़ क़ाफ़िया की तुक- 'आनी' रदीफ़- 'चल रही है' ग़ज़लغزل: ९९९ ------------------------ 1222-1222-122 मोहब्बत की कहानी चल रही है वही बस सरगिरानी चल रही है //1 गुज़ारा हो रहा है जैसे तैसे ख़ुदा की मेहरबानी चल रही है //2 अयाँ हिर्स-ओ-हवस होती है हर सू ये कैसी कुन-फ़कानी चल रही है //3 है 'ग़ालिब' की ये बज़्म-ए-नज़्म-गोई यहाँ मो'जिज़-बयानी चल रही है //4 कोई मिसरा' समझ पाया न अब तक ग़ज़ब की शे'र-ख़्वानी चल रही है //5 मोहब्बत से भरोसा उठ गया है वही झूठी कहानी चल रही है //6 लगा ऐ 'राज़' कल शब मेरे पीछे दिलावर की ज़नानी चल रही है //7 محبت کی کہانی چل رہی ہے وحی بس سرگرانی چل رہی ہے //1 گزارا ہو رہا ہے جیسے تیسے خدا کی میہیربانی چل رہی ہے //2 عیاں حرص وہوس ہوتی ہے ہر سو یہ کیسی کنفکانی چل رہی ہے //3 ہے 'غالب' کی یہ بزم نظم گوئی یہاں مو'جز بیانی چل رہی ہے //4 کوئی مصرع' سمجھ پایا نہ اب تک غضب کی شے'ر خوانی چل رہی ہے //5 محبت سے بھروسہ اٹھ گیا ہے وہی جھوٹھی کہانی چل رہی ہے //6 لگا اے 'راز' کل شب میرے پیچھے دلاور کی زنانی چل رہ(ایک انجان شاعر) शब्दार्थ- --------- सरगिरानी- रोष, अप्रसन्नता, खफ़गी अयाँ- (लाक्षणिक) स्पष्ट, खुला हुआ, प्रकट हिर्स-ओ-हवस- लालच और इर्ष्या सू- दिशा، ओर, तरफ़ कुन-फ़कानी- (God says) Be, and it इस बज़्म- महफ़िल, सभा नज़्म-गोई-शायरी, कविता लिखना मो'जिज़-बयानी- बहुत अच्छी तक़रीर या भाषण, अद्भुत वाग्मिता मिसरा'- मिश्रा जो इस का असल इमला है, आधा शेर, पद, बैत या फ़र्द का आधा हिस्सा शे'र-ख़्वानी- शेर पढ़ना, एक जगह बैठकर परस्पर शेर सुनना-सुनाना दिलावर- एक नाम ; वीर, साहसी, दिलेर, हौसले वाला ज़नानी- स्त्री, औरत, पत्नी, बीवी इसी बह्र पर लिखे गये कुछ फ़िल्मी गीत/ ग़ज़ल ***************************** 🎻मुक़द्दर आज़माना चाहता हूँ 🎻मुहब्बत करने वाले कम न होंगे 🎻मेरे हाथों में नौ नौ चूडियाँ हैं 🎻मुहब्बत अब तिजारत बन गयी है 🎻मै तन्हा था मगर इतना नही था 🎻अकेले हैं चले आओ जहाँ हो 🎻हमें तुमसे मुहब्बत हो गयी है 🎻दरीचा बेसदा कोई नहीं है 🎻हवा के साथ उड़ कर भी मिला भी क्या 🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁 ध्यान देने योग्य बातें- ----------------------- 1. सबसे ऊपर बह्र का नाम लिखें 2. उसके नीचे अरकान के नाम लिखें 3. उसके नीचे मापनी लिखें 4. फिर रदीफ़ और क़ाफ़िया लिखें 5. मतला एवं मक़ता समेत कुल 6 अशआर लिखें 6. अपने प्रत्येक शेर का क्रमांक //1, //2, //3... इस फॉर्मेट में लिखें 7. ग़ज़ल के नीचे अपना नाम लिखें 8. और अंत में, कठिन शब्दों के अर्थ लिखें 9. अंत में अपनी ग़ज़ल की तक़ती'अ करें 10. ख़्याल रहे कि विचार आपके अपने हों, किसी और के नहीं😃