मात्रा गिराने की छूट एवं दिशा निर्देश मात्रा गिराने की छूट को किसी दिशा निर्देश के तहत परिभाषित और सीमांकित करना ज़रूरी था अन्यथा इसको लेकर भी अराजकता फैल जाती। इसलिए इसे छूट के दिशा निर्देश कहा गया है जो एक लिहाज से उचित भी है। ख़ैर, छूट चाहे जो भी हो, बेहतर यही है कि जहाँ तक संभव हो, मात्रा न गिराई जाए, हालांकि बहुधा ये हो नहीं पाता। आइए अब हम छूट के कुछ तय दिशा निर्देशों की बात करते हैं। मेरा यह मानना है कि मात्रा गिराने की छूट के दिशा निर्देशों को लोगों ने बहुत जटिल बना कर पेश किया है, जबकि यथार्थ में यह बहुत सरल है। मेरे ख़्याल से #इसे_सिर्फ़_एक_वाक्य_में_बतलाया_जा_सकता_है_कि मात्रा गिराने की छूट के दिशा निर्देश के तहत आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, और, अं स्वरों में से सिर्फ़आ_ई_ऊ_ए_और_ओ_स्वरों तथा इनके सहयोग से बने और शब्द_के अंत में आए व्यंजनों के भार को दो मात्रिक से गिराकर एक मात्रिक किया जा सकता है। इसका अर्थ हुआ कि शब्द के अंत में आए आ (2) को गिराकर अ (1) ई (2) को गिराकर इ (1) ऊ (2) को गिराकर उ (1) ए (2) और ओ (2) को गिराकर (कोई अन्य ध्वनि नहीं बस मात्रा गिराकर) (1) किया जा सकता है। व्यंजन का उदाहरण लें तो, दर्या (22) को गिराकर दर्य (21) पानी (22) को गिराकर पानि (21) बाजू (22) को गिराकर बाजु (21) जैसे (22) को गिराकर जैसे (21) एवं मुझको (22) को गिराकर मुझको (21) किया जा सकता है। बाक़ी तीन स्वरों ऐ_औ_और_अं एवं #इनके_संयोग_से_बने_व्यजनों को शब्द के अंत में होने की स्थिति में भी #नहीं_गिराया_जा_सकता_है। इसका अर्थ हुआ कि ऐ(2) को गिराकर (1) औ (2) को गिराकर (1), एवं अं (2) को गिरकर (1) नहीं_किया_जा_सकता_है। व्यंजन का उदाहरण लें तो लै, मै, इत्यादि (2) को गिराकर (1) सौ, नौ, रौ, जौ, ज़ौ, पौ (2) को गिराकर (1), एवं दोनों (22), वीराँ(22), अरमाँ (22), दास्ताँ (212) को क्रमशः गिराकर (21), (21), (21), एवं (211) #ननहीं_किया_जा_सकता_है। ये तो दिशा निर्देश की बात हो गई कि (१) कुछ दीर्घ स्वरों एवं उनके योग से बने व्यंजनों की मात्रा को गिराया जा सकता है, एवं (२) मात्राओं को शब्द के प्रारंभ या मध्य में नहीं बल्कि सिर्फ़ शब्द के अंत में गिराया जा सकता है। मगर महत्वपूर्ण बात ये है कि इन दिशा निर्देशों के अपवाद भी पहले से निर्दिष्ट हैं। यानी निषिद्ध स्वरों एवं उनके योग से बने व्यंजनों को भी गिराया जा सकता है एवं शब्द के प्रारम्भ एवं मध्य में भी गिराया जा सकता है, जिनके गिने चुने अपवाद पहले से ही चिन्हित हैं जो नीचे दिए गए हैं- अपवाद 1. कोई- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 2. मेरा/मेरी/तेरा/तेरी- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 3. मैं/में- २ से गिरा कर केवल १ हो सकता है 4. यूँही- २२ से गिरा कर केवल २१ और १२ और ११ कर सकते हैं पर यह २ नहीं हो सकता है 5. जिन्हें/उन्हें/किन्हीं/उन्हीं/नहीं- १२ से गिराकर ११ कर सकते हैं पर २ कभी नहीं 6. कहाँ/वहाँ/जहाँ/यहाँ- १२ से गिराकर ११ कर सकते हैं पर २ कभी नहीं 7. लगाएँगे/बनाएँगे/पिलाएँगे/सुलाएँगे/खाएँगे/रोएँगे इत्यादि में बीच में आने वाली एँ की मात्रा को गिराकर २ से १ किया जा सकता है। अपवाद की यह सूची और लंबी हो सकती है, पाठकगण/विशेषज्ञ इसे मंच के संज्ञान में ला सकते हैं।