मन की स्थिति और बार-बार होने वाली आर्थिक परेशानियां – 1. असली दौलत वह है जो दिखाई नहीं देती महंगी गाड़ियाँ या बड़े घर 'खर्च' का सबूत हैं, 'दौलत' का नहीं। असली दौलत वह पैसा है जो आपने बचाया है, जो आपको भविष्य में अपनी शर्तों पर जीने की आज़ादी देता है। दिखावे की होड़ में अपनी शांति न खोएं। 2. राशनल (Rational) नहीं, रीज़नेबल (Reasonable) बनें गणित के हिसाब से 'सबसे ज्यादा मुनाफा' कमाने के पीछे न भागें। वह फैसला लें जिससे आपको रात को चैन की नींद आए और परिवार सुरक्षित महसूस करे। मन की शांति मुनाफे से ज्यादा कीमती है। 3. 'बिना किसी वजह' के बचत करें (Save just for saving) जैसे हम गाड़ी में 'स्टेपनी' इसलिए रखते हैं ताकि पंचर होने पर रुकना न पड़े, वैसे ही नकद बचत (Savings) जिंदगी की स्टेपनी है। यह हमें बुरे वक्त में किसी के सामने झुकने से बचाती है। 4. एक विशेष सलाह: बार-बार होने वाली आर्थिक तंगी का 'मनोवैज्ञानिक' कारण (Psychiatric Perspective on Repeated Financial Issues) यह बिंदु सबसे महत्वपूर्ण है। मैंने अपने 35 सालों की प्रैक्टिस में देखा है कि कई बार जब कोई व्यक्ति जीवन में बार-बार (Repeatedly) आर्थिक संकट में फंसता है, तो यह सिर्फ 'किस्मत' या 'बुरी आदतों' का मामला नहीं होता। इसके पीछे कुछ छिपे हुए मनोरोग या मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है: * बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder): 'मेनिया' (तेज़ी) के दौर में व्यक्ति खुद को बहुत ताकतवर समझने लगता है और जोश में आकर बेहिसाब खर्च करता है या बहुत जोखिम भरे निवेश कर देता है। * बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Borderline Personality Disorder - BPD): इस समस्या में व्यक्ति अक्सर भावनाओं के तूफ़ान (Emotional instability) और खालीपन (Emptiness) से गुजरता है। उस खालीपन को भरने या मूड को ठीक करने के लिए वे अक्सर आवेग में आकर फिजूलखर्ची (Impulsive Spending) करते हैं। * आवेगशीलता (Impulsivity/ADHD): कई ल दिमाग में आए विचार को तुरंत पूरा करने की चाहत को रोक नहीं पाते। वे बिना सोचे-समझे खरीदारी करते हैं और बाद में पछताते हैं। * लत और जुआ (Addiction & Gambling): शराब, सट्टा या जुए की लत इंसान की सोचने-समझने की शक्ति को खत्म कर देती है, जिससे जमा-पूंजी भी नष्ट हो जाती है। * योजना बनाने में असमर्थता (Lack of Executive Function): कुछ मानसिक स्थितियों में व्यक्ति भविष्य की स्पष्ट योजना नहीं बना पाता और न ही पैसों का हिसाब रख पाता है। मेरी सलाह: अगर आप या आपका कोई अपना बार-बार आर्थिक भंवर में फंस रहा है, कर्ज ले रहा है, या बिना सोचे-समझे पैसे उड़ा रहा है, तो उसे डांटने या सिर्फ समझाने के बजाय, इसे एक मेडिकल समस्या के रूप में देखें। ऐसे में एक उचित मनोरोग मूल्यांकन (Psychiatric Evaluation) करवाना जीवन बदल सकता है। सही इलाज से न केवल मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है, बल्कि आर्थिक स्थिरता भी वापस आ सकती है। पैसा सिर्फ बैंक अकाउंट का खेल नहीं है, यह हमारे दिमाग के संतुलन का भी खेल है।