अक्सर हम देखते हैं कि परिवार का कोई सदस्य "थोड़ा अलग" व्यवहार कर रहा है। हम उसे "जिद्दी", "बदतमीज", "शक्की" या "कमजोर" का लेबल लगा देते हैं। हम उसे सुधारने के लिए डांटते हैं, समझाते हैं, और जब वह नहीं सुधरता, तो हम हार मान लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिसे आप "स्वभाव की खराबी" समझ रहे हैं, वह शायद मस्तिष्क के रसायनों (Chemicals) की उथल-पुथल हो? क्या यह संभव है कि आपका अपना सगा भाई, बेटा या जीवनसाथी किसी ऐसी जंग से जूझ रहा हो जिसका नाम उसे खुद भी नहीं पता? आज मैं आपको कुछ "बड़ी" मानसिक स्थितियों के बारे में बताना चाहता हूँ, जो हमारे घरों में दबे पांव आती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम उन्हें पहचान नहीं पाते। मेरा उद्देश्य आपको डराना नहीं, बल्कि आपको इतना सक्षम बनाना है कि आप खुद अपने परिवार के 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' बन सकें। भाग १: क्या यह सिर्फ 'स्वभाव' है या कुछ और? (समझ और स्वीकार्यता) हल्का तनाव या उदासी जीवन का हिस्सा है। लेकिन जब व्यवहार में बदलाव इतना गहरा हो जाए कि रिश्तों की डोर टूटने लगे, तो हमें रुककर सोचने की जरूरत है। आइए, तीन-चार ऐसी स्थितियों को गहराई से समझें जिन्हें अक्सर गलत समझा जाता है। १.वहम-और-शक-क-ीदीवारें (Paranoid Schizophrenia) क्या आपने कभी महसूस किया है कि परिवार का कोई सदस्य बिना किसी ठोस वजह के शक करने लगा है? • "पड़ोसी मेरे खिलाफ साजिश कर रहे हैं।" • "खाने में कुछ मिला दिया गया है।" • "लोग मेरे बारे में बातें कर रहे हैं।"