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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:04 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
ग़ज़ल_غزل: --------------------------- दोस्तो, पेशे ख़िदमत है मेरी नई ग़ज़ल, आख़िरी के तीन अशआर पिछले पोस्ट से ही हैं किंतु थोड़े बदले रूप में शामिल किये गये हैं क्योंकि कुछ सुझावों के बाद पिछली ग़ज़ल के एक्सटेंशन के रूप में ये ग़ज़ल लिखी गई है। मुलाहिज़ा फ़रमाएँ, अर्ज़ किया,- वो सच है, क्यों उसे लफ़्ज़े अदाई देता है ग़लत जो करता है,इतनी सफ़ाई देता है //१ وہ سچ ہے، کیوں اُسے لفظ ادائی دیتا ہے غلط جو کرتا ہے، اتنی صفائی دیتا ہے//۱ वो अपने ख़ून से रंगे हिनाई देता है कि उसमें यूँ नहीं मजनूँ दिखाई देता है //२ وہ اپنے خون سے رنگ بنائی دیتا ہے کِ اُسمیں یوں نہیں مجنوں دکھائی دیتا ہے//۲ ज़नाँ पसंद नहीं करतीं ऐसे शौहर को जो माँ के हाथ में सारी कमाई देता है //३ زناں پسند نہیں کرتیں ایسے شوہر کو جو ماں کے ہاتھ میں ساری کمائی دیتا ہے//۳ क़फ़स में किसलिए यारो ख़ुदा ख़ुदा करना ख़ुदा ख़ुदा है,ख़ुद आ के रिहाई देता है //४ قفس میں کس لیے یارو خُدا خُدا کرنا خُدا خُدا ہے، خود آ کے صفائی دیتا ہے//۴ नहीं है आरज़ू फ़ुरक़त की बेसबब मेरी कि वस्ल माँगने पर वो जुदाई देता है //५ نہیں ہے آرزو فرقت کی بےسبب میری کِ وصل مانگنے پر وہ جدائی دیتا ہے//۵ लगाओ ज़ोर से नारा ऐ लोगो सब मिलके कि अहले ताज को ऊँचा सुनाई देता है //६ لگاؤ زور سے نعرہ اے لوگو سب مِل کے کِ اہلِ تاج کو اونچا سنائی دیتا ہے//۶ ग़लत है दावा तेरा है ख़ुदा के जैसा वो ख़ुदा तो मख़फ़ी है,किसको दिखाई देता है //७ غلط ہے دعویٰ تیرا ہے خُدا کے جیسا وہ خُدا تو مخفی ہے، کس کو دکھائی دیتا ہے//۷ ज़मन अमल का फ़रिश्ता है वक़्त आने पर हिसाब हर किसी को पाई पाई देता है //८ زمن عمل کا فرشتہ ہے وقت آنے پر حساب ہر کِسی کو پائی پائی دیتا ہے//۶ वो तोड़ लेता है वैसे गुलों को पहले ही जिन्हें वो अपने चमन की रसाई देता है //९ وہ توڑ لیتا ہے ویسے گلوں کو پہلے ہی جنہیں وہ اپنے چمن کی رسائی دیتا ہے //۷ ये वक़्त मारता है'राज़'सालों रख के हमें कि ऐसी मौत तो कोई क़साई देता है //१० یہ وقت مارتا ہے راز سالوں رکھ کے ہمیں کِ ایسی موت تو کوئی قسائی دیتا ہے//۹ रंगे हिनाई- हिना/मेंहदी का रंग लफ़्ज़े अदाई- बेहतर दिखाने के लिए अतिरिक्त शब्द ज़नाँ- औरतें शौहर- पति क़फ़स- पिंजरा,कारा,जेल आरज़ू- इच्छा फ़ुरक़त- वियोग बेसबब- अकारण वस्ल- मिलन अहले ताज- शाही टोपी पहने लोग, अर्थात सत्ताधारी लोग अमल- कर्म नीयत- मंशा रसाई- पहुँच
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