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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:55 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Rati Rahasya शरीर चंद्रमा और कामुकता; चंद्रकला और कामुकता का अद्भुत विज्ञान. भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में, मानव शरीर को ब्रह्मांड का ही एक सूक्ष्म रूप माना गया है "यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे"(जो शरीर में है, वही ब्रह्मांड में है)। जिस प्रकार आकाश में स्थित चंद्रमा अपनी कलाओं से विशाल समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न करने की शक्ति रखता है,उसी प्रकार वह मानव शरीर के भीतर बहने वाले रसों और भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है। 11वीं शताब्दी रचित ग्रंथ रति रहस्य में पंडित कोक्कोक ने इस संबंध को और अधिक स्पष्टता से समझाया। इस ग्रंथ ने यौन संबंधों को केवल शारीरिक आवश्यकता से ऊपर उठाकर एक #मनोवैज्ञानिक_कला का दर्जा दिया। रति रहस्य का सबसे क्रांतिकारी सिद्धांत चंद्रकला_सिद्धांत है, जो यह बताता है कि स्त्री की कामुकता स्थिर नहीं होती, बल्कि चंद्रमा की गति के साथ शरीर के विभिन्न अंगों में भ्रमण करती है। आधुनिक दौर में, जहाँ रिश्ते अक्सर तनाव और यांत्रिक जीवनशैली का शिकार हो रहे हैं, यह प्राचीन विज्ञान हमें अपने साथी को बेहतर समझने और दांपत्य जीवन में नवीनता लाने का एक अद्भुत मार्ग दिखाता है। इस लेख में, हम रति रहस्य के उसी दुर्लभ ज्ञान, चंद्रकला और मर्मस्थानों(erotic zone) के रहस्य को विस्तार से जानेंगे। रति_रहस्य के अनुसार, कामदेव (कामुकता) का वास स्त्री के शरीर में एक जगह नहीं रहता। यह चंद्रमा की कलाओं (तिथियों) के अनुसार, शरीर के अंगों में ऊपर चढ़ता और नीचे उतरता है। इसे दो पक्षों में विभाजित किया गया है। शुक्ल_पक्ष जब चाँद बढ़ता है (अमावस्या से पूर्णिमा तक), तो कामुकता पैरों से शुरू होकर सिर की ओर चढ़ती है। कृष्ण_पक्ष जब चाँद घटता है (पूर्णिमा से अमावस्या तक), तो कामुकता सिर से शुरू होकर पैरों की ओर उतरती है। रति रहस्य में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किस तिथि को कामुकता (कास-वास) किस अंग में होती है। इसे जानकर आप रति-क्रीड़ा को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। शुक्ल_पक्ष(बढ़ता चाँद नीचे से ऊपर) प्रतिपदा पैर का अंगूठा शुरुआत यहाँ से होती है। द्वितीया तलवे/पंजे मालिश या गुदगुदी से आनंद मिलता है। तृतीया टखने (Ankles) यहाँ स्पर्श संवेदनशील होता है। चतुर्थी घुटने (Knees) घुटनों के पीछे का हिस्सा। पंचमी जांघें (Thighs) यह एक प्रमुख कामुक क्षेत्र है। षष्ठी नाभि (Navel) यहाँ चुंबन या स्पर्श गहरा असर करता है। सप्तमी कटि/कमर (Waist) आलिंगन का महत्व बढ़ जाता है। अष्टमी वक्षस्थल/छाती स्पर्श और मर्दन के लिए उपयुक्त। नवमी कक्षा/बगल (Armpits) यहाँ गुदगुदी या चुंबन उत्तेजक होता है। दशमी कंठ/गला (Throat) गले पर चुंबन (Love bites) का दिन। एकादशी गाल (Cheeks) कोमल स्पर्श और चुंबन। द्वादशी होंठ (Lips) गहरा चुंबन (Deep Kissing)। त्रयोदशी आँखें (Eyes) पलकों पर चुंबन। चतुर्दशी ललाट/माथा (Forehead) माथे को चूमना और सहलाना। पूर्णिमा सिर/केश (Head/Hair) इस दिन कामुकता पूरे शरीर में चरम पर होती है, जिसका केंद्र सिर होता है। बालों में उंगलियां फेरना बहुत सुखदायी होता है। कृष्ण_पक्ष (घटता चाँद ऊपर से नीचे) कृष्ण पक्ष में यह क्रम उल्टा हो जाता है। पूर्णिमा के बाद पहले दिन (प्रतिपदा) कामुकता वापस सिर/बालों में होती है और अमावस्या तक धीरे-धीरे पैरों के अंगूठे में वापस चली जाती है। चंद्रकला_के_विज्ञान_का_महत्व रति रहस्य का यह ज्ञान केवल शारीरिक सुख के लिए नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक जुड़ाव के लिए भी महत्वपूर्ण है। ▪️आधुनिक समय में रति-क्रिया अक्सर केवल जननांगों (Genitals) तक सीमित रह जाती है। चंद्रकला का सिद्धांत सिखाता है कि पूरा शरीर कामुक है। यह दृष्टिकोण साथी को यह महसूस कराता है कि आप उनके पूरे अस्तित्व को प्रेम करते हैं। ▪️यदि आप रोज एक ही तरह का व्यवहार करेंगे, तो संबंध नीरस हो जाएगा। चंद्रकला आपको हर दिन एक नया फोकस पॉइंट देती है। एक दिन पैरों की मालिश, तो दूसरे दिन गले पर ध्यान; यह विविधता (Variety) बनाए रखता है। यदि आप सही तिथि पर सही अंग को स्पर्श करते हैं, तो साथी बहुत कम समय में उत्तेजित हो जाता है और पूर्ण संतुष्टि प्राप्त करता है। व्यावहारिक_प्रयोग इस प्राचीन ज्ञान को आज के जीवन में लागू करने के लिए आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं... तिथि की जानकारी रखें... आपको ज्योतिषी बनने की जरूरत नहीं है। आजकल मोबाइल एप्स या कैलेंडर में आसानी से पता चल जाता है कि आज कौन सी तिथि (शुक्ल पक्ष की पंचमी है या कृष्ण पक्ष की दशमी) है। फोरप्ले (Foreplay) की योजना मुख्य रति-क्रिया से पहले, कम से कम 10-15 मिनट उस दिन के विशेष अंग को समर्पित करें। उदाहरण: यदि आज 'दशमी' है, तो रति रहस्य कहता है कि कामुकता 'गले' में है। आप गले को चूमने, सहलाने या हल्के दंत-प्रयोग पर ध्यान दें। आप देखेंगे कि साथी की प्रतिक्रिया सामान्य दिनों से अधिक तीव्र है। स्पर्श की कला..... रति रहस्य केवल छूने के लिए नहीं कहता, बल्कि भाव के साथ छूने को कहता है। शुक्ल पक्ष में (जब ऊर्जा ऊपर चढ़ रही हो) स्पर्श थोड़ा अधिक ऊर्जावान हो सकता है, जबकि कृष्ण पक्ष में (जब ऊर्जा नीचे उतर रही हो) स्पर्श अधिक कोमल और शांत होना चाहिए। सावधानी..... अमावस्या के दिन ऊर्जा सबसे निचले स्तर पर होती है। रति रहस्य और कामशास्त्र, दोनों ही इस दिन संभोग से बचने या बहुत संयमित रहने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर की ऊर्जा संचित रहे। रति रहस्य और इसके चंद्रकला सिद्धांत का अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि हमारे पूर्वज न केवल शरीर विज्ञान के ज्ञाता थे, बल्कि वे मानव मनोविज्ञान की भी गहरी समझ रखते थे। कोक्कोक का यह सिद्धांत हमें सिखाता है कि प्रेम और रति-क्रीड़ा कोई हड़बड़ी में किया जाने वाला कृत्य नहीं, बल्कि धैर्य और संवेदना का एक अनुष्ठान है। जब हम अपनी जीवनशैली और अंतरंगता को प्रकृति की लय के साथ जोड़ते हैं, तो रिश्ते में ऊर्जा का प्रवाह सहज और सुखद हो जाता है। इस प्राचीन ज्ञान को अंधविश्वास मानकर त्यागने के बजाय, इसे एक जीवन जीने की कला के रूप में अपनाना चाहिए। जब आप अपने साथी के शरीर और भावनाओं के इस चक्र को समझकर व्यवहार करते हैं, तो आपका रिश्ता केवल शारीरिक नहीं रह जाता, बल्कि वह आत्मिक गहराई और परम आनंद की ओर अग्रसर होता है। यही रति रहस्य का वास्तविक सार है। क्या आप अपनी दिनचर्या में तिथियों और चंद्रकलाओं पर ध्यान देते हैं? भारतीय ज्ञान परंपरा के इस अद्भुत विज्ञान को अपने जीवन में उतारें और बदलाव स्वयं महसूस करें।
8:50 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Koyaliya Pavan Sharma Sun 26 Apr, 09:09 मौसम की सहेली- कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। आठ मास की विरह कथा का भेद सभी खोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले, कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। चार मास आम्र डाली पर फुदक फुदक डोले । कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले, कोयलिया कुहू कुहू बोले।। प्रेम की रसमयी तान सुना,आमों में मिठास घोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। कोयलिया का कोई ना सानी,बाणी में अमृत शोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। बाणी,बुद्धि का संगम,संतान उत्पत्ति कौवे संग होले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।।
8:44 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
फेक मई का दिन मज़दूर दिवस है आज— फिर कवियों,नेताओं के मंच सजेंगे, विद्रोह के झंडे लहराएँगे, काग़ज़ी क्रांतियाँ होंगी। वे कहेंगे— “मज़दूर मेरा भाई है, उसका दर्द मेरी कविता है…” और तालियों की गूँज में उनकी संवेदना बिखर जाएगी। पर सच पूछो तो— किसी हथेली की फटी लकीरों को उन्होंने कब छुआ है? किसी पसीने की बूंद को कविता के बाहर कब जिया है? शब्दों में समाजवाद, पर जीवन में सुख का साम्राज्य, उनकी स्याही में क्रांति है, यही सबसे बड़ी भ्रांति है। मज़दूर तो अब भी कहीं इलाहबाद के पथ पर, तोड़ रहा है पत्थर भूख-प्यास, धूप से लड़ता — बिना किसी कविता के बल पर।
8:41 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
जो शख़्स मुद्दतों मिरे शैदाइयों में था आफ़त के वक़्त वो भी तमाशाइयों में था उस का इलाज कोई मसीहा न कर सका जो ज़ख़्म मेरी रूह की गहराइयों में था वो थे बहुत क़रीब तो थी गर्मी-ए-हयात शोला हुजूम-ए-शौक़ का पुरवाइयों में था कोई भी साज़ उन की तड़प को न पा सका वो सोज़ वो गुदाज़ जो शहनाइयों में था बज़्म-ए-तसव्वुरात में यादों की रौशनी आलम अजीब रात की तन्हाइयों में था
8:38 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
ग़ज़ल -------------------------- बाबा_मरे_तो_गाँव_से_रिश्ता_सिमट_गया मैं_धीरे_धीरे_अपने_ही_लोगों_से_कट_गया दोस्तो, फॅमिली डे के लिए विशेष रूप से अभी अभी लिखी गई मेरी ये त्वरित ग़ज़ल मेरे सभी अहबाब और मुझसे बिछड़ गए रिश्तेदारों की याद में पेश है, उम्मीद है पसंद आएगी। अर्ज़ किया है- बाबा मरे तो गाँव से रिश्ता सिमट गया मैं धीरे धीरे अपने ही लोगों से कट गया //१ بابا مرے تو گاؤں سے رشتہ سمٹ گیا میں دھیرے دھیرے اپنے ہی لوگوں سے کٹ گیا//۱ फ़सलें ही जब ख़ुलूस के रिश्ते की जल गईं बंटने लगा जो खेत तो मैं पीछे हट गया //२ فصلیں ہی جب خلوص کے رشتے کی جل گئی بنٹنے لگا جو کھیت تو میں پیچھے ہٹ گیا//۲ दुन्या का क्या करूँ गिला, इस दौरे ज़र में मैं भाई ही जब ज़बान से मेरा पलट गया //३ دنیا کا کیا کرو گلہ، اس دور زر میں میں بھائی ہی جب زبان سے میرا پلٹ گیا//۳ देखी हैं इसने पीढ़ियाँ, ऐसा मैं सोच कर आँगन के बूढ़े पेड़ से जाकर लिपट गया //४ دیکھی ہیں اسے پیٹھیاں، ایسا میں سوچ کر آنگن کے بوڑھے پیڑ سے جاکر لپٹ گیا//۴ तर्के नसब से इक तेरी इज़्ज़त नहीं गई क़द मेरा भी तो ग़ैर की नज़रों में घट गया //५ ترکِ نسب سے ایک تری عزت نہیں گئی قد میرا بھی تو غیر کی نظروں میں گھٹ گیا//۵ माँ कल दिखी थीं ख़्वाब में रोते हुए ऐ 'राज़' मेरा कलेजा देख के इक दम से फट गया //६ ماں کل دکھی تھیں خواب میں روتے ہوئے اے راز میرا کلیجہ دیکھ کے اک دم سے پھٹ گیا बाबा- पिता ख़ुलूस- सच्चाई, निष्कपटता, सिद्क़दिली दौरे ज़र- रुपये पैसे, धन दौलत का ज़माना तर्के नसब- ख़ानदान/कुल का परित्याग
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