Koyaliya Pavan Sharma Sun 26 Apr, 09:09 मौसम की सहेली- कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। आठ मास की विरह कथा का भेद सभी खोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले, कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। चार मास आम्र डाली पर फुदक फुदक डोले । कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले, कोयलिया कुहू कुहू बोले।। प्रेम की रसमयी तान सुना,आमों में मिठास घोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। कोयलिया का कोई ना सानी,बाणी में अमृत शोले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।। बाणी,बुद्धि का संगम,संतान उत्पत्ति कौवे संग होले। कोयलिया कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले। कुहू कुहू बोले,कोयलिया कुहू कुहू बोले।।