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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:18 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
व्यक्तित्व (Personality) और पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) को आसान भाषा में समझें डॉ. अनिल तांबी (वरिष्ठ मनोचिकित्सक) हमारे दैनिक जीवन में हम अक्सर सुनते हैं— "अरे, उस व्यक्ति की पर्सनैलिटी कितनी अच्छी है!" या "वह बहुत चिड़चिड़े स्वभाव का है।" लेकिन एक मनोचिकित्सक के रूप में, जब मैं 'पर्सनैलिटी' की बात करता हूँ, तो इसका मतलब केवल बाहरी दिखावा या बातचीत का तरीका नहीं होता। आज हम बहुत ही सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे कि 'व्यक्तित्व' (Personality) क्या है, 'पर्सनैलिटी डिसऑर्डर' (Personality Disorder) क्या होता है, और हम खुद को व अपने आसपास के लोगों को कैसे बेहतर समझ सकते हैं। 1. व्यक्तित्व (Personality) क्या है? व्यक्तित्व हमारी "मनोवैज्ञानिक त्वचा" (Psychological Skin) की तरह है। जिस तरह हमारी शारीरिक त्वचा हमारे आंतरिक अंगों की रक्षा करती है और हमें बाहरी दुनिया से जोड़ती है, ठीक उसी तरह हमारी पर्सनैलिटी हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार का वह संयोजन है जो हमें दूसरों से अलग बनाता है। सरल शब्दों में, पर्सनैलिटी में तीन मुख्य बातें शामिल होती हैं: 1. हम कैसे सोचते हैं (हमारे विचार और खुद व दूसरों के प्रति धारणाएं) 2. हम कैसे महसूस करते हैं (हमारी भावनाएं और मूड) 3. हम कैसा व्यवहार करते हैं (तनाव और परिस्थितियों में हमारी प्रतिक्रिया) उदाहरण: जब दो लोग सड़क पर अचानक लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम में फंसते हैं: व्यक्ति A (लचीला व्यक्तित्व): सोचता है— "अब फंस ही गए हैं तो थोड़ा संगीत सुन लेते हैं या किसी मित्र से बात कर लेते हैं।"व्यक्ति B (अत्यधिक तनावग्रस्त व्यक्तित्व): स्टीयरिंग व्हील पर हाथ मारता है, दूसरों पर चिल्लाता है और पूरे दिन का मूड खराब कर लेता है। 2. पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) क्या है? हर व्यक्ति में कुछ कमियां या अनोखे स्वभाव होते हैं। लेकिन जब किसी व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने का तरीका अत्यधिक कठोर (Rigid), अस्वास्थ्यकर और असामान्य हो जाए, तो इसे पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कहा जाता है। जब व्यक्ति का स्वभाव ऐसा हो जाए कि: वह बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल न पाए (Inflexible)। उसके रिश्तों में लगातार कड़वाहट और उथल-पुथल बनी रहे। वह अपने काम, पढ़ाई या सामाजिक जीवन में सामान्य रूप से कार्य न कर पाए। उसे खुद यह अहसास न हो कि समस्या उसके अपने व्यवहार में है, बल्कि वह हमेशा दूसरों को दोष दे। 3. आम जीवन के उदाहरणों से समझें पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के प्रकार आम भाषा में समझने के लिए इन्हें तीन मुख्य श्रेणियों (Clusters) में देखा जा सकता है: क) अत्यधिक शक्की या अलग-थलग रहने वाला स्वभाव (Odd/Eccentric Pattern) पैरानॉयड पर्सनैलिटी (Paranoid): ऐसे व्यक्ति को बिना किसी ठोस वजह के हमेशा लगता है कि लोग उसके खिलाफ साजिश रच रहे हैं या उसे नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। उदाहरण: एक सहकर्मी जो यह सोचकर परेशान रहता है कि चाय के ब्रेक में सहकर्मी उसी का मज़ाक उड़ा रहे थे, भले ही वे सामान्य बात कर रहे हों। ख) अत्यधिक भावनात्मक, ड्रामेटिक या आवेगपूर्ण स्वभाव (Dramatic/Emotional Pattern) बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी (Borderline Personality Disorder - BPD): इसमें व्यक्ति के मूड, आत्म-सम्मान और रिश्तों में तीव्र उथल-पुथल होती है। इन्हें अकेलेपन से बहुत डर लगता है। रिश्तों में ये या तो किसी को भगवान मान लेते हैं या तुरंत उसे अपना सबसे बड़ा दुश्मन। उदाहरण: छोटी-सी बात या देर से जवाब मिलने पर यह महसूस करना कि सामने वाला उन्हें छोड़ रहा है, अत्यधिक गुस्सा करना या खुद को नुकसान पहुँचाने की धमकी देना। नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी (Narcissistic): इसमें व्यक्ति स्वयं को दूसरों से बहुत श्रेष्ठ समझता है, लगातार प्रशंसा की मांग करता है और दूसरों की भावनाओं के प्रति सहानुभूति (Empathy) की कमी रखता है। ग) अत्यधिक डर, चिंता या पूर्णता (Perfectionism) का स्वभाव (Anxious/Fearful Pattern) ऑब्सेसिव-कंपल्सिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (OCPD): ऐसे लोग नियमों, व्यवस्था और पूर्णता (Perfection) को लेकर इतने कठोर होते हैं कि वे काम पूरा ही नहीं कर पाते और दूसरों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। (ध्यान दें: यह OCD बीमारी से अलग स्वभावगत कठोरता है)। डिपेंडेंट पर्सनैलिटी (Dependent): ऐसे व्यक्ति छोटे-छोटे फैसलों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहते हैं और अकेले रहने के डर से अनुचित बातें भी मान लेते हैं। 4. खुद को और दूसरों को समझने के लिए व्यावहारिक सुझाव 1. स्व-जागरूकता (Self-Awareness) विकसित करें: जब भी किसी स्थिति में तनाव बढ़े, तो रुककर सोचें: "क्या मेरी प्रतिक्रिया स्थिति के हिसाब से सही है, या यह मेरा पुराना व्यवहारिक ढर्रा है?" अपनी भावनाओं को पहचानना और उन पर विचार करना (Mentalizing) मानसिक स्थिरता की पहली सीढ़ी है। 2. दूसरों के प्रति दृष्टिकोण बदलें: यदि कोई व्यक्ति बार-बार अपने रिश्तों में उलझ रहा है या अत्यधिक प्रतिक्रिया दे रहा है, तो केवल यह कहकर उसे खारिज न करें कि वह "बुरा" या "ड्रामा करने वाला" है। कई बार यह उनके व्यक्तित्व की किसी गहरी असंतुलित ग्रंथि (Personality vulnerability) का परिणाम होता है। 3. काम और प्रेम (Love & Work) में संतुलन: एक स्वस्थ व्यक्तित्व वह है जो सार्थक संबंध (Love) बना सके और अपने जीवन में उत्पादक कार्य (Work) कर सके। यदि आपका स्वभाव इन दोनों चीजों में बाधा डाल रहा है, तो मदद मांगने में संकोच न करें। निष्कर्ष और संदेश पर्सनैलिटी डिसऑर्डर कोई 'चरित्र की कमी' या 'पाप' नहीं है। यह आनुवंशिक (Genetics) और बचपन के माहौल/अनुभवों के मेल से विकसित होने वाली एक मानसिक स्थिति है। अच्छी बात यह है कि सही साइकोथेरेपी (Psychotherapy), काउंसिलिंग और आत्म-जागरूकता के माध्यम से व्यक्ति अपने व्यवहारिक ढर्रे को बदल सकता है और एक संतुलित व खुशहाल जीवन जी सकता है। यदि आप या आपका कोई प्रियजन लगातार भावनात्मक या सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, तो किसी विशेषज्ञ मनोचिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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