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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:33 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Shakeel Badayuni( Ghazal) ला रहा है मय कोई शीशे में भर के सामने किस कदर पुर कैफ है मंजर नज़र के सामने। मैं तो इस आलम को क्या से क्या बना देता मगर किसी की चलती है हयात ए मुक्तसर के सामने। फिर न देना ता'ना ए नाकामी ए जौक ए नज़र हौसला है कुछ त आ जाओ नज़र के सामने। आह ये रूदाद ए हंगामा ए तरब ऐ गम गुसार जिक्र ए गुलशन जैसे इक बे बात ओ पर के सामने। हो चुका है जब खात्मा सारी उम्मीदों का तो फिर जा रहे ही क्यूँ ' शकील ' उस फ़ितनागर के सामने। पुर कैफ = भरपूर ता' ना ए नाकामी ए जौक ए नज़र = निंदा, असफलता रूदाद ए हंगामा ए तरब = किसी घटना पर हलचल पर प्रसन्नता फितना गर = उपद्रवी। शकील बदायूंनी
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