Ghazal (Kateel Shifaai) It looks like this message is in Hindi तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं। किसको खबर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैँ सावन आया लेकिन अपनी किस्मत में बरसात नहीं। टूट गया ये दिल तो फिर ये साँस के क्या मा'नी गूंज रही है क्यूँ शहनाई ज़ब कोई बारात नहीं। गाम के अंधियारे में तुझको अपना साथी क्यूँ समझूँ तू फिर भी तू है मेरा तो साया भी मेरे साथ नहीं। माना जीवन में औरत इक बार मोहब्बत करती है लेकिन मुझको ये तो बता दे क्या तू औरत जात नहीं। ख़त्म हुआ मेरा फ़साना अब ये आँसू पौंछ भी तो जिस में कोई तारा चमके आज की रात वो रात नहीं। मेरे गमगीँ होने पर अहबाब है यूँ हैरान " कतील " जैसे मैं पत्थर हूँ मेरे सीने में जज़्बात नहीं। अहबाब = मित्र, दोस्त। " कतील शिफाई "