ग़ज़ल की साधना कृपया ध्यान दें इस बार आपका टास्क थोड़ा अलग है. इस बार अपने टास्क को तीन भागों में पूरा करेंगे. 1. सबसे पहले दी गई ज़मीन में ग़ज़ल लिखने के लिए आप अपने क़ाफ़िया शब्दों का चुनाव करेंगे और उसे ग्रुप में मुझे भेजेंगे, 2. उसके बाद आप 6-7 सानी मिसरे लिखकर भेजेंगे, 3. और फिर अंत में, सभी सानी मिसरों के ऊला मिसरों को लिखकर अपनी ग़ज़ल मुकम्मल करेंगे और भेजेंगे. ऐसा शब्दों के सही चुनाव एवं उचित वाक्य विन्यास को ध्यान में रखकर किसी भी शेर को कहने की आदत को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है; साथ में इस बात के महत्व को समझने के लिए भी कि किसी भी शेर में दो मिसरों के बीच के रब्त का अत्यधिक महत्त्व है, जिसे नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता है. अभ्यास के लिए तरही मिसरा/ शेर अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 ी तक़ती'अ- अपना जो कुछ/था मेरा ज़ीस्त में,सारा/तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा/हुआ तारा/तुम हो //1 मापनी- 2122-1122-1122-22 रकान- फ़ाइलातुन-फ़इलातुन-फ़इलातुन-फ़ेलुन बह्र- बह्र-ए-रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ क़ाफ़िया की तुक-'आरा' रदीफ़-'तुम हो' ग़ज़लغزل: 2122-1122-1122-22 दोस्तो, ये ग़ज़ल अब तक मेरी क्रमांकित ग़ज़लों में नहीं शामिल थी. आज मुझे इसी बह्र में का नया अभ्यास क्रमांक 67 देना था. जब अपने आर्काइव में ढूंढा तो मुझे राज़ की रोज़ाबेल कैथरीन के लिए लिखे दो अशआर लिखे मिले.आनन फानन में मैंने 5 और अशआर लिखकर यह ग़ज़ल पूरी कर दी. सोचा आप लोगों को पेश भी कर दूं . अर्ज़ किया है - अपना जो कुछ था मेरा ज़ीस्त में,सारा तुम हो मेरी तक़दीर का टूटा हुआ तारा तुम हो //1 सालों से ढूंढ रहा हूं जिसे मिलता ही नहीं जबकि बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा तुम हो //2 मेरी हस्ती का कोई और नहीं सय्यारा मेरे चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा तुम हो //3 छोड़कर जाओ न इस हाल में तन्हा हमको बूढ़े मां-बाप के जीवन का सहारा तुम हो //4 किसलिए जाऊं मैं दिखलाने शिफ़ागर के पास मेरे हर ग़म का मुदावा मेरे यारा तुम हो //5 आग ने यूँ नहीं लिक्खी है कहानी मेरी मेरी हस्ती के तसव्वुर का शरारा तुम हो //6 तुम हरी सब्ज़ी नहीं हूं जिसे खाऊं हर रोज़ मेरे बाग़-ए-वफ़ा का आलू-बुख़ारा तुम हो //7 'राज़'वो भी नहीं मिलता जो कभी कहता था मेरे हर दुख,मेरे हर दर्द का चारा तुम हो //8 ग़ज़ल के कठिन शब्द एवं शब्दार्थ 1. ज़ीस्त — जीवन, ज़िंदगी 2. तक़दीर — भाग्य, नियति 3. बह्र — समुद्र, सागर 4. बह्र-ए-वफ़ा — वफ़ा का सागर / निष्ठा का समुद्र 5. हस्ती — अस्तित्व, वजूद 6. सय्यारा — ग्रह, आकाश में भ्रमण करने वाला खगोलीय पिंड 7. चर्ख़ — आकाश, आसमान; चक्र 8. चर्ख़-ए-वफ़ा — वफ़ा का आकाश / प्रेम एवं निष्ठा का संसार 9. तन्हा — अकेला, अकेले 10. शिफ़ागर — घाव भरने वाला, उपचारक, चिकित्सक 11. ग़म — दुःख, शोक 12. मुदावा — उपचार, इलाज, निवारण 13. यारा — प्रिय मित्र, प्यारा साथी, प्रेमी 14. तसव्वुर — कल्पना, विचार, चिंतन 15. शरारा — चिंगारी 16. बाग़ — बागीचा, उपवन 17. आलू-बुख़ारा — एक प्रकार का फल; अंग्रेज़ी में Plum कहा जाता है 18. चारा — उपाय, इलाज, समाधान 19. राज़ — रहस्य, भेद; यहाँ शायर का तख़ल्लुस भी है 🌹 संयुक्त पदों के भावार्थ 🔹 बह्र-ए-वफ़ा का दोनों किनारा — वफ़ा रूपी विशाल सागर के दोनों किनारे अर्थात वफ़ा की पूर्णता एवं उसका समग्र विस्तार। 🔹 मेरी हस्ती का सय्यारा — मेरे अस्तित्व के आकाश का ग्रह अथवा मेरे जीवन-जगत का महत्वपूर्ण केंद्र। 🔹 चर्ख़-ए-वफ़ा का चाँद-सितारा — प्रेम एवं निष्ठा के आकाश को प्रकाशित करने वाला प्रिय व्यक्ति। 🔹 हस्ती के तसव्वुर का शरारा — मेरे अस्तित्व की कल्पना अथवा चेतना को जन्म देने वाली चिंगारी। 🔹 हर ग़म का मुदावा — प्रत्येक दुःख का उपचार अथवा निवारण। 🔹बाग़-ए-वफ़ा का आलू बुख़ारा तुम हो — वफ़ा अथवा प्रेम और निष्ठा के बगीचा का खट्टा मीठा फल आलू बुख़ारा तुम हो ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ इसी बह्र पर लिखे गये कुछ फ़िल्मी गीत/ग़ज़ल ***************************** रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है पकी मद भरी आँखों को कँवल कहते हैं दिल की आवाज भी सुन मेरे फ़साने पे न जा वो मेरी नींद मेरा चैन मुझे लौटा दो ऐ सनम जिसने तुझे चाँद सी सूरत दी है तेरी ज़ुल्फ़ों से जुदाई तो नहीं माँगी थी जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी कोई फरियाद तेरे दिल में छुपी हो जैसे ध्यान देने योग्य बातें- ----------------------- 1. सबसे ऊपर बह्र का नाम लिखें 2. उसके नीचे अरकान के नाम लिखें 3. उसके नीचे मापनी लिखें 4. फिर रदीफ़ और क़ाफ़िया लिखें 5. मतला एवं मक़ता समेत कुल 6 अशआर लिखें 6. अपने प्रत्येक शेर का क्रमांक //1, //2, //3... इस फॉर्मेट में लिखें 7. ग़ज़ल के नीचे अपना नाम लिखें 8. और अंत में, कठिन शब्दों के अर्थ लिखें 9. अंत में अपनी ग़ज़ल की तक़ती'अ करें 10. ख़्याल रहे कि विचार आपके अपने हों, किसी और के नहीं