skip to main |
skip to sidebar
RSS Feeds
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
![]() |
![]() |
8:56 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
Aurat Ka Aashkaar हिलाओं के कपड़ों पर ज्ञान देने से पहले, कभी अपने कपड़ों पर भी नजर डाल लिया करो•••• आजकल डांडिया की ड्रेस को लेकर बड़ी चर्चा हो रही है, लड़कियों ने बैकलेस ड्रेस क्या पहन ली,कुछ लोगों की जुबान ही गंदी हो गई तरह-तरह की भद्दी टिप्पणियाँ की जा रही हैं• और ऐसा नहीं है कि सिर्फ मर्द ही बोल रहे हैं, औरतें भी पीछे नहीं हैं यहाँ तक कहा जा रहा है कि ऐसी ड्रेस पहनेंगी तो रेप तो होंगे ही सच में रेप पहनावे की बजह से होते हैं क्या तो जरा अपने पहनावे पर भी नजर डाल लो• सड़क किनारे लगे नल पर सिर्फ 4 इंच का कच्छा पहनकर नहाना,बिना शर्ट के इधर-उधर घूमना,ऐसे टाइट लोअर पहनना कि शरीर का हर हिस्सा दिखाई दे रहा हो शॉर्ट्स पहन कर घूमना,शर्ट के बटन खोल कर घूमना अंडरवेयर के नाम पर फ्रेंची पहन कर बाल्कनी में खड़े होना बाॅडी फिटेड कपड़े क्या ये सब बहुत संस्कारी लगता है महिलाओं ने तो कभी तुम्हारे पहनावे को लेकर ऐसी गंदी टिप्पणियाँ नहीं कीं, फिर महिलाओं के लिए अलग नियम और पुरुषों के लिए अलग नियम क्यों••• जो लोग बार-बार पुराने जमाने की औरतों के पहनावे की मिसाल देते हैं, उनसे भी एक सवाल है पुरानी औरतें साड़ी पहनती थीं, सिर पर पल्लू रखती थीं, तो सुनो पुराने मर्द भी धोती-कुर्ता पहनते थे ,कुर्ता पाजामे पहनते थे अंडरवेयर ढीला -ढाला घुटने तक का होता था , वनियान की स्लीव्स कोहनी तक होती थी उनके अंडरआर्म्स भी नहीं दिखते थे उनके पहनावे में भी एक मर्यादा होती थी और आज के मर्द जिम जा रहे बाॅडी बना के नंगे घूम रहे है टाइट फिटिंग कपड़े पहन के घूम रहे है फिर तुलना करनी है, तो दोनों की करो ना• सिर्फ महिलाओं को ही पुराने जमाने की याद क्यों दिलाई जाती है, पुरुषों को क्यों नहीं कहा जाता कि अपने पहनावे और व्यवहार में भी वही मर्यादा रखें क्या संस्कारों की सारी जिम्मेदारी सिर्फ महिलाओं की है क्या पर्दा सिर्फ औरतों को करना चाहिए क्या पुरुषों को मर्यादा में रहने की जरूरत नहीं है और सबसे बड़ी बात, किसी लड़की ने बैकलेस ड्रेस पहन ली, तो इसका मतलब ये थोड़ी है कि अब कोई उसके बारे में कुछ भी बोलने लगेगा••• कपड़े उसकी पसंद हैं, लेकिन तुम्हारी जुबान और तुम्हारी सोच पर तो तुम्हारा अपना नियंत्रण होना चाहिए ना••• रे*प जैसी घिनौनी घटना को किसी महिला के कपड़ों से जोड़ना तो और भी शर्मनाक है, अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले की होती है, पीड़िता के कपड़ों की नही कोई महिला पूरे कपड़े पहने या अपनी पसंद के आधुनिक कपड़े, उसे गलत नजर से देखने या उसके साथ जबरदस्ती करने का अधिकार किसी को नहीं मिल जाता। और औरतों से भी एक बात कहना चाहूँगी, दूसरी औरत के कपड़े देखकर उसे नीचा मत दिखाओ आज तुम किसी और के पहनावे पर सवाल उठा रही हो, कल कोई तुम्हारी पसंद पर सवाल उठाएगा कपड़े छोटे होने से किसी का चरित्र छोटा नहीं हो जाता, और पूरे कपड़े पहन लेने से किसी की सोच बड़ी नहीं हो जाती मैं ये नहीं कहती कि हर किसी को एक जैसे कपड़े पहनने चाहिए हर इंसान की अपनी पसंद है लेकिन किसी के कपड़ों को देखकर उसके चरित्र का फैसला करना और किसी अपराध के लिए उसी को जिम्मेदार ठहरा देना बिल्कुल गलत है संस्कारों की बात करनी है, तो दोनों के लिए करो महिलाओं से मर्यादा की उम्मीद रखते हो, तो पुरुषों से भी रखो क्योंकि संस्कार का मतलब किसी महिला के कपड़ों पर पहरा लगाना नहीं, बल्कि अपनी सोच, अपनी जुबान और अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना है।
![]() |
Post a Comment