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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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8:53 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिरानेवाली है। मोर करेंगे नाच, गीत कोयल सुहाग के गायेगी ; लता विटप मंडप-वितान से वंदनवार सजायेगी! जीव-जन्तु भर गए खुशी से, वन की पाँत-पाँत डोली, इतने में जल के भीतर से एक वृद्ध मछली बोली :- ‘‘सावधान जलचरो, खुशी में सबके साथ नहीं फूलो, ब्याह सूर्य का ठीक, मगर, तुम इतनी बात नहीं भूलो :- "एक सूर्य के ही मारे हम विपद कौन कम सहते हैं, गर्मी भर सारे जलवासी छटपट करते रहते हैं ! "अगर सूर्य ने ब्याह किया, दस-पाँच पुत्र जन्मायेगा, सोचो, तब उतने सूर्यों का ताप कौन सह पाएगा ? "अच्छा है, सूरज क्वाँरा है, वंशविहीन, अकेला है, इस प्रचंड का ब्याह जगत की खातिर बड़ा झमेला है।’’
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