Ghazal;- Nasir kazmi (dil mein eak leher si uthi hei abhi) दिल में एक लहर सी उठी है अभी! कोई ताज़ा हवा चली है अभी!! دل میں ایک لہر سی اٹھی ہے اب کوئی تازہ ہوا چلی ہے ابھی کوئی कुछ तो नाजुक मिज़ाज हैं हम भी ! और यह चोट भी नई है अभी!! کچھ تو نازک مزاج ہیں ہم بھی اور یہ چوٹ بھی نئی ہے ابھی शोर बरपा है खा़ना-ए-दिल में! कोई दीवार सी गिरी है अभी!! شور برپا ہے خانہء دل میں کوئی دیوار سی گری ہے ابھی याद के बे निशां जजी़रों से! तेरी आवाज़ आ रही है अभी!! یاد کے بے نشان جزیروں میں تیری تیری آواز آرہی ہے ابھی सो गए लोग उसे हवेली के! कोई खिड़की मगर खुली है अभी!! سو گئے لوگ اس-- حویلی کے کوئی کھڑکی مگر کھلی ہے ابھی भरी दुनिया में जी नहीं लगता ! जाने किस चीज़ की कमी है अभी!! بھری دنیا میں جی-- نہیں لگت جانے کس چیز کی کمی ہے ابھی वक्त़ अच्छा भी आएगा नासिर! ग़म ना कर ज़िन्दगी पड़ी है अभी!! وقت اچھا بھی-- ائے گا ناصر غم نہ کر زندگی پڑی ہے ابھی