Rahat Indori Sahab (wo shayar....) Pavan Kumar Sharma 14:13 (5 hours ago) to Pavan Urdu Adab Ke Mumtaz shayar Rahat indori. ❣️ अब ना मैं हूं ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे! फिर भी मशहूर है शहरों में फ़साने मेरे!! 🌿🌿🌿🥀❣️🥀❣️🥀💦💦 उर्दू आदाब के माया ए नाज़ शायर राहत इंदौरी जी की डेथ एनिवर्सरी पर हम उन्हें दिली ख़िराज-ए-अक़ीदत और विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं_ 🌿🌿🥀❣️🥀💦राहत इंदौरी उर्दू अदब के उन बुलंद-आवाज़ शायरों में शुमार किए जाते हैं जिन्होंने मुशायरों को नई रौनक़, नई ऊर्जा और नई पहचान दी। ❣️💦❣️उनका असली नाम राहत क़ुरैशी था। उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ। वे शायर होने के साथ-साथ चित्रकार, प्रोफेसर और फ़िल्मी गीतकार भी थे! राहत इंदौरी ने इंदौर से अपनी तालीम पूरी की और उर्दू अदब में पीएच.डी. की। उन्होंने लंबे समय तक अध्यापन किया, फिर पूरी तरह शायरी और मुशायरों को अपना लिया। उनकी बेबाक़ आवाज़, दमदार अंदाज़-ए-बयान और समाजी-ओ-सियासी शऊर ने उन्हें दुनिया भर में मक़बूल बनाया। ❣️आंख में पानी रखो होठों पर चिंगारी रखो! जिंदा रहना है तो तरकीबें में बहुत सारी रखो!! ❣️💦❣️शायरी की ख़ुसूसियात उनकी ग़ज़लों और नज़्मों में इश्क़, इंसानियत, ख़ुद्दारी, वतनपरस्ती, सामाजिक चेतना और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ बुलंद आवाज़ साफ़ दिखाई देती है। उनका कलाम आम आदमी की ज़बान में गहरी बात कहने की मिसाल है! ❣️💦❣️'मजमूआ-ए-कलाम' उनके प्रमुख शायरी-संग्रहों में शामिल हैं 'धूप धूप' 'नाराज़' 'मेरे बाद''पाँचवाँ दरवेश' (चयनित कलाम) फ़िल्मी सफ़र_राहत इंदौरी ने हिंदी सिनेमा के लिए भी कई यादगार गीत लिखे और अपनी शायरी के ज़रिए अदब और फ़िल्मी दुनिया के बीच एक ख़ूबसूरत पुल बनाया। ❣️💦❣️पुरस्कार एवं सम्मान__मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी सम्मान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मुशायरों में विशेष सम्मान 💦💦निधन 11 अगस्त 2020 को उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया अपने वतन से बेइंतहा प्यार करने वाले राहत इंदौरी जी का यह शेर उनकी वतन परस्ती की मिसाल है ❣️ ए ज़मीं एक रोज़ तेरी खाक में मिल जाएंगे सो जाएंगे! मर के भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से ईमान से!! ❣️❣️ख़िराज-ए-अक़ीदत___राहत इंदौरी केवल एक शायर नहीं, बल्कि जज़्बात, हौसले और सच्चाई की बुलंद आवाज़ थे। उनकी शायरी आने वाली नस्लों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगी। "अल्फ़ाज़ तो ख़ामोश हो सकते हैं, मगर राहत इंदौरी की आवाज़ और उनका फ़न कभी ख़ामोश नहीं होगा। उनकी याद और उनका कलाम हमेशा ज़िंदा रहेगा।" ❣️ किसने दस्तक दी यह दिल पर कौन है आप तो अंदर हैं,बाहर कौन है!! 🌿🥀❣️🥀💦 राहत इंदौरी जी को उनकी डेथ एनिवर्सरी पर खिराज ए अकी़दत पेश करते हुए उनका बेहतरीन कलाम आपके लिए 🥀रोज़ तारों की नुमाइश में ख़ल़ल पड़ता है चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है 🥀एक दीवाना मुसाफ़िर है मेरी आंखों में! वक्त़ बे वक़्त ठहर जाता है चल पड़ता है! 🥀 अपनी ताबीर के चक्कर में मेरा जागता ख़्वाब! रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है!! 💦🥀रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं। रोज शीशे से कोई काम निकल पड़ता है!! **** ❣️हाथ ख़ाली है तेरे शहर से जाते-जाते! जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते!! ❣️अब तो हर हाथ का पत्थर हमेशा जानता है! उम्र गुज़री है तेरी शहर में आते जाते!! ❣️ अब के मायूस हुआ यारों को रुख़सत करके! जा रहे थे तो कोई ज़ख़्म लगाते जाते!! ❣️मुझको रोने का सलीका़ भी नहीं है शायद लोग हंसते हैं मुझे देख के आते जाते ❣️हमसे पहले भी मुसाफि़र कई गुज़रें होंगे कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते!! 🌿🌿🌿🥀❣️🥀❣️🥀💦💦💦