Pavan Kumar Paavan Personal Blog Pavan Kumar Paavan Personal Blog Pavan Kumar Paavan Personal Blog
Pavan Kumar Paavan Personal Blog Pavan Kumar Paavan Personal Blog

अमर शहीद मंगल पाण्डे

19 जुलाई / जन्मदिवस अमर शहीद मंगल पाण्डे अंग्रेजी शासन के विरुद्ध चले लम्बे संग्राम का बिगुल बजाने वाले पहले क्रान्तिवीर मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 ग्राम नगवा (बलिया, उत्तर प्रदेश) में हुआ था। युवावस्था में ही वे सेना में भर्ती हो गये थे। उन दिनों सैनिक छावनियों में गुलामी के विरुद्ध आग सुलग रही थी। अंग्रेज जानते थे कि हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं, जबकि मुसलमान सूअर से घृणा करते हैं। फिर भी वे सैनिकों को जो कारतूस देते थे, उनमें गाय और सूअर की चर्बी मिली होती थी। इन्हें सैनिक अपने मुँह से खोलते थे। ऐसा बहुत समय से चल रहा था; पर सैनिकों को इनका सच मालूम नहीं था। मंगल पांडे उस समय बैरकपुर में 34 वीं हिन्दुस्तानी बटालियन में तैनात थे। वहाँ पानी पिलाने वाले एक हिन्दू ने इसकी जानकारी सैनिकों को दी। इससे सैनिकों में आक्रोश फैल गया। मंगल पांडे से रहा नहीं गया। 29 मार्च, 1857 को उन्होंने विद्रोह कर दिया। एक भारतीय हवलदार मेजर ने जाकर सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन को यह सब बताया। इस पर मेजर घोड़े पर बैठकर छावनी की ओर चल दिया। वहां मंगल पांडे सैनिकों से कह रहे थे कि अंग्रेज हमारे धर्म को भ्रष्ट कर रहे हैं। हमें उसकी नौकरी छोड़ देनी चाहिए। मैंने प्रतिज्ञा की है कि जो भी अंग्रेज मेरे सामने आयेगा, मैं उसे मार दूँगा। सार्जेण्ट मेजर ह्यूसन ने सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने को कहा; पर तब तक मंगल पांडे की गोली ने उसका सीना छलनी कर दिया। उसकी लाश घोड़े से नीचे आ गिरी। गोली की आवाज सुनकर एक अंग्रेज लेफ्टिनेण्ट वहाँ आ पहुँचा। मंगल पांडे ने उस पर भी गोली चलाई; पर वह बचकर घोड़े से कूद गया। इस पर मंगल पांडे उस पर झपट पड़े और तलवार से उसका काम तमाम कर दिया। लेफ्टिनेण्ट की सहायता के लिए एक अन्य सार्जेण्ट मेजर आया; पर वह भी मंगल पांडे के हाथों मारा गया। तब तक चारों ओर शोर मच गया। 34 वीं पल्टन के कर्नल हीलट ने भारतीय सैनिकों को मंगल पांडे को पकड़ने का आदेश दिया; पर वे इसके लिए तैयार नहीं हुए। इस पर अंग्रेज सैनिकों को बुलाया गया। अब मंगल पांडे चारों ओर से घिर गये। वे समझ गये कि अब बचना असम्भव है। अतः उन्होंने अपनी बन्दूक से स्वयं को ही गोली मार ली; पर उससे वे मरे नहीं, अपितु घायल होकर गिर पड़े। इस पर अंग्रेज सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया। अब मंगल पांडे पर सैनिक न्यायालय में मुकदमा चलाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अंग्रेजों को अपने देश का भाग्यविधाता नहीं मानता। देश को आजाद कराना यदि अपराध है, तो मैं हर दण्ड भुगतने को तैयार हूँ।’’ न्यायाधीश ने उन्हें फाँसी की सजा दी और इसके लिए 18 अप्रैल का दिन निर्धारित किया; पर अंग्रेजों ने देश भर में विद्रोह फैलने के डर से घायल अवस्था में ही 8 अप्रैल, 1857 को उन्हें फाँसी दे दी। बैरकपुर छावनी में कोई उन्हं फाँसी देने को तैयार नहीं हुआ। अतः कोलकाता से चार जल्लाद जबरन बुलाने पड़े। मंगल पांडे ने क्रान्ति की जो मशाल जलाई, उसने आगे चलकर 1857 के व्यापक स्वाधीनता संग्राम का रूप लिया। यद्यपि भारत 1947 में स्वतन्त्र हुआ; पर उस प्रथम क्रान्तिकारी मंगल पांडे के बलिदान को सदा श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है।

कुत्ते पाले हैं मैंने।

कुत्ते पाले हैं मैंने। बारी बारी लगभग दस दस साल एक फीमेल डाबरमेन और एक पामेरियन डॉग घर मे रहे और फिर कुछ महीनों तक एक बच्चा बीगल साथ में रहा। कुत्तों की इतने दिन की संगत के बाद मेरी राय यह कि आदमी को कुत्ते पालने से परहेज करना चाहिए। इस बात से इनकार नही कि वो आपसे प्यार करते है पर इनका प्यार अग्निसाक्षी के नाना पाटेकर टाईप का होता है। तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगा जैसा। आप किसी और से प्यार जताएँगे तो ये गुर्राएँगे ।कोई आप के नज़दीक आना चाहेगा तो ये नाराज़ होंगे। ये हों तो आपका कहीं आना जाना मुश्किल। आप कहीं गए तो ये देवदास के रोल मे घुस जाएँगे। खाना पीना छोड़ देगें। टसुए बहाएँगे। आप जिनके भरोसे छोड़ आएँ है उसे,उसका खाना खराब कर देगें। और कुत्ते से दूर रहकर आपके हाल भी बेहाल होंगे,चाहे आप रामेश्वर मे मोक्ष की कामना कर रहे हों या गोवा मे सुंदरियाँ ताड़ रहे हों ,कुत्ता आपके मन मे घुसा रहेगा और आप कुछ नही कर पाएंगे। और आप इस गलतफहमी मे मत रहिए कि आपने कुत्ता पाला है। दरअसल उसने आपको पाला हुआ होता है। सुबह शाम टहलना होता है उसे। सुबह तेज बारिश हो रही है। खतरनाक किस्म की ठंड है। कोहरा छाया हुआ है।आप रात को देर से सोए हैं। तबीयत ठीक नही लग रही आपको ,आप बिस्तर मे घुसे रहना चाहते है। पर आपका कुत्ता सुबह छह बजते ही आपकी छाती पर चढ़ बैठेगा। आप चाहे या न चाहे आपको उसकी बेल्ट पकड़कर कॉलोनी पार्क सड़कों पर टहलना ही पड़ेगा। आप नही टहलाते कुत्ते को फिर,वो आपको टहलता है ,वो जिधर जाना चाहे जाता है और आप उसके पीछे पीछे घिसटते है।फिर कुत्ते को नहलाना धुलाना,मना मना कर खाना खिलाना ऐसे काम जैसे आपने एक और बच्चा पैदा कर लिया हो और मुश्किल यह भी कि यह बच्चा कभी बड़ा नहीं होता। और फीमेल डॉग पालना तो और बवाल ए जान। उसके बड़े होते ही मोहल्ले शहर के तमाम कुत्ते, लार टपकाते हुए आपके घर के आसपास मंडराने लगते है। फीमेल डॉग को हर कुत्ता पसंद आ जाता है और उसकी चरित्र रक्षा के प्रबंध करने मे आपकी नींदे हराम हो जाती है।आप झुंझलाते है। नाराज़ होते है ,पैर पटकते है और फिर हार जाते है।आपकी डॉगी आपके हर पहरेदार को मात दे देती है। हर चारदीवारी फलांग जाती है। माँ बनती है। दस बारह छोटे छोटे पिल्लों के नाना बनते है आप और उन्हें ठिकाने लगाने में आपकी अपनी नानी मर जाती है। और फिर कुत्ता किसी को न काटे तो वो काहे का कुत्ता। आपका कुत्ता किसी को काट ले। खरोंच दे तो इससे बडी आफत कोई दूसरी नही। जिसे काटा खरोंचा हो आपके कुत्ते ने उससे विनती कीजिए आप। लड़िये झगड़िए मनाइए उसे। उसका इलाज करवाइए। और जब ये सब करते है आप तो और कुछ करने लायक़ नही रह जाते। कुत्ता यदि पड़ोसी के लॉन में पेशाब न करे तो उसका कुत्ता होना गिना नहीं जाता। ऐसे में कुत्ते पालने वाले को पड़ोसी गालियाँ देते ही है चाहे वो मन ही मन दी गई हो। कुत्ता पालने वाला आदमी कुत्ते का बंधक होता है ,कुत्ता उसकी दिनचर्या निर्धारित करता है और जब तक जिंदा रहता है आदमी को उसका गुलाम होकर रहना पड़ता है। उससे कुत्तों की गंध आने लगती है ,दूसरों के कुत्ते भी उसे देख पूंछ हिलाने लगते है। वो फिर कुत्तो की ही दुनिया मे रहता है और दूसरे लोग उससे मिलने मे कतराते है। और फिर जब कुत्ता मरता है तो ऐसा लगता है कि घर का कोई मेंबर मर गया हो। सन्नाटा छा जाता है घर मे। आप उदास होते है,मातम मनाते है और फिर खुद से ,अपनी बीबी से,बच्चों से,आने जाने वालो से बस कुत्ते की बात करते है।कसम खाते है कि अब कभी कुत्ता नही पालेंगे और फिर कुछ दिनों महीनों बाद एक दूसरा कुत्ता आपके घर मे होता है। कुत्ता पालना आफत है। जी का जंजाल है।कुत्ते पालने से बचना चाहिए आदमी को। कुत्तों से प्यार करना अपने अपहरणकर्ता के प्रेम में पड़ जाने जैसा है। कुत्तों से प्यार करने का बहुत मन हो तो पड़ोसी या किसी दोस्त के कुत्ते से बतिया कर,सहला कर संतोष कर लेना चाहिए। यह सलाह इसलिए क्योंकि हम कुत्ता पाल चुके और अब कुत्तों से दूर रहते है। 'Paavan Teerth'

लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

1 अगस्त/पुण्यतिथि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक का जन्म महाराष्ट्र के कोंकण प्रदेश (रत्नागिरि) के चिक्कन गांव में 23 जुलाई 1856 को हुआ था। इनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। अपने परिश्रम के बल पर शाला के मेधावी छात्रों में बाल गंगाधर तिलक की गिनती होती थी। वे पढ़ने के साथ-साथ प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम भी करते थे, अतः उनका शरीर स्वस्थ और पुष्ट था। 1879 में उन्होंने बी.ए. तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। घरवाले और उनके मित्र संबंधी यह आशा कर रहे थे कि तिलक वकालत कर धन कमाएंगे और वंश के गौरव को बढ़ाएंगे, परंतु तिलक ने प्रारंभ से ही जनता की सेवा का व्रत धारण कर लिया था। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने अपनी सेवाएं पूर्ण रूप से एक शिक्षण संस्था के निर्माण को दे दीं। सन्‌ 1880 में न्यू इंग्लिश स्कूल और कुछ साल बाद फर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना की। तिलक का यह कथन कि 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' बहुत प्रसिद्ध हुआ। लोग उन्हें आदर से 'लोकमान्य' नाम से पुकार कर सम्मानित करते थे। उन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है। लोकमान्य तिलक ने जनजागृति का कार्यक्रम पूरा करने के लिए महाराष्ट्र में गणेश उत्सव तथा शिवाजी उत्सव सप्ताह भर मनाना प्रारंभ किया। इन त्योहारों के माध्यम से जनता में देशप्रेम और अंगरेजों के अन्यायों के विरुद्ध संघर्ष का साहस भरा गया। तिलक के क्रांतिकारी कदमों से अंगरेज बौखला गए और उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाकर छ: साल के लिए 'देश निकाला' का दंड दिया और बर्मा की मांडले जेल भेज दिया गया। इस अवधि में तिलक ने गीता का अध्ययन किया और गीता रहस्य नामक भाष्य भी लिखा। तिलक के जेल से छूटने के बाद जब उनका गीता रहस्य प्रकाशित हुआ तो उसका प्रचार-प्रसार आंधी-तूफान की तरह बढ़ा और जनमानस उससे अत्यधिक आंदोलित हुआ। तिलक ने मराठी में 'मराठा दर्पण व केसरी' नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किए जो जनता में काफी लोकप्रिय हुए। जिसमें तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीनभावना की बहुत आलोचना की। उन्होंने ब्रिटिश सरकार को भारतीयों को तुरंत पूर्ण स्वराज देने की मांग की, जिसके फलस्वरूप और केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया। तिलक अपने क्रांतिकारी विचारों के लिए भी जाने जाते थे। ऐसे भारत के वीर स्वतंत्रता सेनानी का निधन 1 अगस्त 1920 को मुंबई में हुआ।

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा

29 जुलाई/जन्मदिन जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा जे॰आर॰डी॰ टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 पेरिस, फ्रांस मे हुआ। वे रतनजी दादाभाई टाटा और उनकी फ्रांसीसी पत्नी सुज़ेन्न ब्रीरे (en:Suzanne Briere) के पांच संतानो मे से दुसरे थे। जेआरडी टाटा वायुयान उद्योग और अन्य उद्योगो के अग्रणी थे। 10 फरवरी 1929 को टाटा ने भारत में जारी किया गया पहला पायलट लाइसेंस प्राप्त किया। सन् 1932 में उन्होंने भारत की पहली वाणिज्यिक एयरलाइन, टाटा एयरलाइंस की स्थापना की जो बाद में वर्ष 1946 में भारत की राष्ट्रीय एयरलाइन , एयर इंडिया बनी। बाद में उन्हें भारतीय नागर विमानन के पिता के रूप में जाना जाने लगा। सन् 1925 में वे एक अवैतनिक प्रशिक्षु के रूप में टाटा एंड संस में शामिल हो गए।वर्ष 1938 में उन्हें भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा एंड संस का अध्यक्ष चुना गया। दशकों तक उन्होंने स्टील, इंजीनियरिंग, ऊर्जा, रसायन और आतिथ्य के क्षेत्र में कार्यरत विशाल टाटा समूह की कंपनियों का निर्देशन किया। वह अपने व्यापारिक क्षेत्र में सफलता और उच्च नैतिक मानकों के लिए बहुत प्रसिद्ध थे। उनकी अध्यक्षता में टाटा समूह की संपत्ति $ 1000 लाख से बढ़कर 5 अरब अमरीकी डालर हो गयी। उन्होंने अपने नेतृत्व में 14 उद्यमों के साथ शुरूआत की थी ,जो 26 जुलाई 1988 को उनके पद छोड़ने के समय,बढ़कर 95 उद्यमों का एक विशाल समूह बन गया।उन्होंने वर्ष 1968 में टाटा कंप्यूटर सेंटर(अब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) और सन् 1979 में टाटा स्टील की स्थापना की। वे 50 वर्ष से अधिक समय तक , सन् 1932 में स्थापित सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। उनके मार्गदर्शन में इस ट्रस्ट ने राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थनों की स्थापना की , जैसे टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस, 1936),टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान( टीआईएफआर, 1945), एशिया का पहला कैंसर अस्पताल, टाटा मेमोरियल सेंटर और प्रदर्शन कला के लिए राष्ट्रीय केंद्र। सन् 1945 में उन्होंने टाटा मोटर्स की स्थापना की। जेआरडी टाटा ने सन् 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में एयर इंडिया इंटरनेशनल का शुभारंभ किया। सन् 1953 में भारत सरकार ने उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष और इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया। वे इस पद पर 25 साल तक बने रहे। जेआरडी टाटा ने अपने कम्पनी के कर्मचारियों के हित के लिए कई नीतियाँ अपनाई। सन् 1956 में, उन्होंने कंपनी के मामलों में श्रमिकों को एक मजबूत आवाज देने के लिए 'प्रबंधन के साथ कर्मचारी एसोसिएशन' कार्यक्रम की शुरूआत की।उन्होंने प्रति दिन आठ घंटे काम , नि: शुल्क चिकित्सा सहायता, कामगार दुर्घटना क्षतिपूर्ति जैसी योजनाओं को अपनाया। जेआरडी टाटा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। भारतीय वायु सेना ने उन्हें ग्रुप कैप्टन की मानद पद से सम्मानित किया था और बाद में उन्हें एयर कमोडोर पद पर पदोन्नत किया गया और फिर 1 अप्रैल 1974 को एयर वाइस मार्शल पद दिया गया। विमानन के लिए उनको कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया -मार्च 1979 में टोनी जेनस पुरस्कार ,सन् 1995 में फेडरेशन ऐरोनॉटिक इंटरनेशनेल द्वारा गोल्ड एयर पदक,सन् 1986 में कनाडा स्थित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन द्वारा एडवर्ड वार्नर पुरस्कार और सन् 1988 में डैनियल गुग्नेइनिम अवार्ड। सन् 1955 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनके नि: स्वार्थ मानवीय प्रयासों के लिए ,सन् 1992 में जेआरडी टाटा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 29 नवंबर 1993 को गुर्दे में संक्रमण के कारण जिनेवा में 89 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु पर भारतीय संसद उनकी स्मृति में स्थगित कर दी गई थी।

GENETIC CURE OF DIABETES

डायबिटीज वाले , जल्दी ही चाहिए यही कमाल। प्री-प्रिनसुलिन से इंसुलिन तक?️ आईएनएस इंसुलिन जीन का अनुवाद राइबोसोम पर अग्न्याशय के लैंगरहैंस के आइलेट्स के बीटा कोशिकाओं में किया जाता है । अनुवाद का उत्पाद एक निष्क्रिय पॉलीपेप्टाइड है जिसमें 106 अमीनो एसिड होते हैं जिन्हें प्री-प्रोन्सुलिन के रूप में जाना जाता है । प्री-प्रिनसुलिन राइबोसोम से रफ एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम के चैनलों में चला जाता है जहां यह एक प्रोटीज एंजाइम द्वारा कार्य किया जाता है जो इस अणु के प्रमुख 24 अमीनो एसिड को हटा देता है, एक संकेत अनुक्रम । यह 82 अमीनो एसिड के एक निष्क्रिय अग्रदूत अणु को छोड़ देता है जिसे प्रिनसुलिन कहा जाता है । प्रोन्सुलिन को गोल्गी कॉम्प्लेक्स में ले जाया जाता है जहां यह आगे संशोधन से गुजरता है । गोल्गी कॉम्प्लेक्स में, प्रोन्सुलिन अणुओं को मोड़ दिया जाता है, सहसंयोजक बंधन बनते हैं और अणुओं को झिल्ली-बाध्य स्रावी कणिकाओं में पैक किया जाता है । स्रावी कणिकाओं के भीतर, प्रिनसुलिन को एक एंजाइम द्वारा साफ किया जाता है जो 31 अमीनो एसिड के एक खंड को हटा देता है, जिसे सी चेन (या सी पेप्टाइड) कहा जाता है । शेष सक्रिय इंसुलिन अणुओं का निर्माण करता है, प्रत्येक एक ए श्रृंखला और एक बी श्रृंखला से बना होता है जो मजबूत सहसंयोजक डाइसल्फ़ाइड - एस – एस - बॉन्ड द्वारा एक साथ रखा जाता है । सक्रिय इंसुलिन को तब गोल्गी कॉम्प्लेक्स से रक्तप्रवाह में आवश्यकतानुसार निर्यात किया जाता है । इसकी रिहाई का संकेत सामान्य रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि है । यह आंकड़ा प्री-प्रोन्सुलिन को इंसुलिन में बदलने की इस प्रक्रिया का एक सरलीकृत सारांश देता है । प्री-प्रिनसुलिन से सक्रिय इंसुलिन के गठन को दर्शाने वाला आरेख। (ए) प्री-प्रिनसुलिन, जीन अनुवाद का तत्काल उत्पाद, प्रमुख सिग्नल अनुक्रम को हटाकर जल्दी से प्रिनसुलिन में संशोधित किया जाता है । (बी) इंसुलिन के निष्क्रिय अग्रदूत प्रोन्सुलिन को सी श्रृंखला को हटाकर सक्रिय इंसुलिन में संशोधित किया जाता है । (सी) सक्रिय इंसुलिन सी टुकड़े को हटाने से बनता है, ए और बी श्रृंखलाओं को सहसंयोजक डाइसल्फ़ाइड बांड द्वारा एक साथ रखा जाता है ।

Ghazal--202

दोस्तों पेश-ए-ख़िदमत है एक पुरानी ग़ज़ल अर्ज़ किया है- ग़ज़ल -------------------------- सियासत की बिना पे क्या किसी को तू बनाता है यहाँ मुस्लिम का बधना भी कोई हिन्दू बनाता है//१ हमारी खाट को जुम्मन चचा बुनते हैं हाथों से और उसके वास्ते तोशक मदन काकू बनाता है//२ पढ़ा लिक्खा हो नेता या नहीं,मंसूब इससे क्या यहाँ सरकार की हर योजना बाबू बनाता है//३ अगर आदम का बच्चा है तो मिहनत की डगर पर चल किसी के सामने क्यों भीख का चुल्लू बनाता है//४ कोई चिमटा बनाता है बनाने के लिए रोटी उसी लोहे के टुकड़े से कोई चाक़ू बनाता है//५ ख़िरद को रब की जानिब मोड़ती हैं मुश्किलें जाँ की ज़मन का दर्द ही इंसाँ को चारा जू बनाता है//६ अगर शौहर को तू लड़ने की ताक़त दे नहीं सकता तो फिर बीवी को क्यों तू ऐ ख़ुदा गबरू बनाता है//७ हक़ीक़त 'र' पे भी है अयाँ ऐ ख़ालिके दुन्या मिटा सकता है उसको कौन जिसको तू बनाता है //८ सियासत-राजनीति बिना पे-आधार पे बधना-लोटा,utensil(made of clay)with a pipe to wash;for ablution तोशक-खाट पे बिछाने वाला गद्दा मंसूब-संबंधित आदम-आदमी चुल्लू-अंजुलि ख़िरद-बुद्धि,अक़्ल जानिब-तरफ़,जानिब ज़मन-समय,ज़माना,काल,संसार चारा जू-समाधान ढूँढने वाला गबरू-हृष्ट-पुष्ट अयाँ-स्पष्ट,ज़ाहिर,दृष्टिगोचर,प्रकट,व्यक्त ख़ालिके दुन्या-दुनिया की रचना करने वाला अर्थात ईश्वर

Ghazal-201

ग़ज़ल ----- अर्ज़ किया है- चिंता नहीं है कुछ,मेरी दुनिया मज़े में है सागर में खो के जैसे कि दर्या मज़े में है //1 मैंने सुना है जागना-सोना मज़े में है मेरे बिना भी आपकी दुनिया मज़े में है //2 उसको भी आसमान की आती है याद पर हम सोचते हैं पिंजरे में तोता मज़े में है //3 इक हम है तेरे नाम जो हर सू हुए ज़लील जबकी तेरी गली का भी कुत्ता मज़े में है //4 दुनिया में आके उसको भी रोना है ज़ार ज़ार जब तक है मां के पेट में, बच्चा मज़े में है //5 कब तक मनाए ख़ैर वो, रेशम के वास्ते जब तक उबाला जाए न, कीड़ा मज़े में है //6 खा लो तुम अपने पैसों से तुमको अगर है भूख रहने दो मेरी जेब में रुपया, मज़े में है //7 आख़िर में उसको जाना है लोगों के पेट में जब तक नहीं बिका है, समोसा मज़े में है //8 थूका कभी तो जाएगा नाली में एक दिन जब तक है मुँह में आपके, गुटखा मज़े में है //9 मैंने सुना है बीवी के बाद-अज़-वफ़ात 'राज़' साली के साथ इन दिनों जीजा मज़े में है //10 چنتا نہیں ہے کچھ، میری دنیا مزے میں ہے ساگر میں کھو کے جیسے کہ دریا مزے میں ہے //1 میں نے سنا ہے جاگنا سونا مزے میں ہے میرے بنا بھی آپکی دنیا مزے میں ہے //2 اسکو بھی آسمان کی آتی ہے یاد پر ہم سوچتے ہیں پنجرے میں طوطا مزے میں ہے //3 اک ہم ہے تیرے نام جو ہر سو ہوئے ذلیل جب کی تیری گلی کا بھی کتا مزے میں ہے //4 دنیا میں آکے اسکو بھی رونا ہے زار زار جب تک ہے ماں کے پیٹ میں، بچہ مزے میں ہے //5 کب تک منائے خیر وہ، ریشم کے واسطے جب تک ابالا جائے نہ، کیڑا مزے میں ہے //6 کھا لو تم اپنے پیسوں سے تم کو اگر ہے بھوک رہنے دو میری جیب میں روپیہ، مزے میں ہے //7 آخر میں اسکو جانا ہے لوگوں کے پیٹ میں جب تک نہیں بکا ہے، سموسہ مزے میں ہے //8 تھوکا کبھی تو جائیگا نالی میں ایک دن جب تک ہے منہ میں آپکے، گٹکھا مزے میں ہے //9 میں نے سنا ہے بیوی کے بعد از وفات 'راز' سالی کے ساتھ ان دنوں جیجا مزے میں ہے //10 ज़लील-जिसका अपमान हुआ हो,बेइज़्ज़त,अपमानित,तिरस्कृत ज़ार ज़ार-अत्यधिक फूट-फूट कर बाद-अज़-वफ़ात-मृत्यु के बाद

Rasleela Nathdwara Style | Twin Eternals - Matter & Energy

Pavan Kumar Paavan Personal Blog Pavan Kumar Paavan Personal Blog