पराए मर्द से अफेयर चलाना दरअसल एक ऐसी 'डबल शिफ्ट' नौकरी है, जिसमें सैलरी ज़ीरो है और पकड़े जाने पर सीधा 'नौकरी से सस्पेंड' (तलाक) होने का खतरा रहता है! पराए मर्द से अफेयर रखना दरअसल 'बिना हेलमेट के 150 की स्पीड पर बाइक चलाने' जैसा है, जिसमें हवा तो बहुत अच्छी लगती है, लेकिन एक छोटा सा गड्ढा (यानी पति) आते ही सीधा हड्डियां टूटती हैं! फोन का पासवर्ड इतनी बार बदलता है कि महिला खुद भूल जाती है। फोन हमेशा स्क्रीन के बल उल्टा रखा जाता है, जैसे उसमें कोई खुफिया सरकारी राज छिपा हो। अगर गलती से पति फोन उठा ले, तो दिल की धड़कन सीधे 200 के पार पहुंच जाती है। राए पुरुष का नंबर फोन में 'पिंकी पार्लरवाली', 'धोबी' या 'कबाड़ीवाला' नाम से सेव होता है। बात करते समय आवाज इतनी धीमी हो जाती है कि चींटी की चाल भी उससे तेज सुनाई दे। इस रिश्ते में सबसे ज्यादा खर्च 'डिटर्जेंट' का होता है, क्योंकि मन के पाप और चेहरे का डर धोने में पूरा वक्त निकल जाता है। घर आते ही पति पर अचानक जरूरत से ज्यादा प्यार आने लगता है, ताकि शक की सुई घूमे ही नहीं। पकड़े जाने पर न पुराना बॉस (पति) रखता है और न नया क्लाइंट (पराया पुरुष) जिम्मेदारी लेता है। राए मर्द से दिल लगाना यानी 'आ बैल मुझे मार' वाली कहावत को सच करना है! इस डबल गेम का अंत बड़ा ही दर्दनाक (और थोड़ा मजेदार) होता है। जब राज खुलता है, तो पति घर का ताला बदल देता है और पराया मर्द अपना मोबाइल नंबर बदल लेता है। महिला बीच में खड़ी होकर सोचती है कि 'पिज्जा' के चक्कर में घर की 'दाल-रोटी' से भी हाथ धो बैठी…!!!