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A personal blog by Pavan Kumar "Paavan"
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12:48 PM
Article Published by : PAVAN KUMAR SHARMA,' PAAVAN &MAAHIR
क्यों खयालों में कोई एक ख्याल अच्छा है जो ग़ज़ल बन पड़े तो ही मेरा हाल अच्छा है//1 मैं किसी हुस्न परी के ही तलब मैं हूँ जिंदा कोई हासिल तो हो जिसका की ज़माल अच्छा है//2 तू बिछड़ता तो भी ये कारवाँ चलता रहता तेरे होने नही होने से तो मेरा ये मलाल अच्छा है//3 कतरा कतरा लहू जलता गया अंदर से मेरे और वो सोचता है खूँ में उबाल अच्छा है//4 जब तरन्नुम में नही आता सलीका पढ़ने का फिर तो पढ़ने का तहत में ही कमाल अच्छा है//5 शायरी करना अदब मैं खरा व्यापार है मेरा कोई तो देखे की इस बनिए का माल अच्छा है//6 बोसा इक गाल पे देकर मैं यहीं सोचता हूँ दूसरी और का शायद तेरा गाल अच्छा है//7 एक ही बात पे मैंने दे दी जागीर मेरी कैसा भी है वो मगर उसका जमाल अच्छा है//8 क्यों मेरा तुझसे भी मिलना नही मुमकिन अब तक कुछ है अफ़सोस मगर मेरा ये हाल अच्छा है//9 'Maahir'
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